GST के दबाव में टूटा व्यापारी: वाराणसी में तंबाकू कारोबारी राजेश चौरसिया ने की आत्महत्या, परिवार ने टैक्स कार्रवाई को बताया वजह

वाराणसी के लहंगपुरा इलाके में तंबाकू कारोबारी राजेश चौरसिया ने आत्महत्या की

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वाराणसी में कारोबारी की आत्महत्या के बाद जीएसटी नीति पर सवाल

वाराणसी: उत्तर प्रदेश के वाराणसी के चेतगंज थाना क्षेत्र में एक तंबाकू कारोबारी की आत्महत्या के बाद जीएसटी की कार्यप्रणाली और छोटे व्यापारियों पर बढ़ते दबाव को लेकर बहस छिड़ गई है। लहंगपुरा इलाके में रहने वाले 53 वर्षीय कारोबारी राजेश चौरसिया ने शनिवार सुबह अपने घर में फांसी लगाकर जान दे दी।

परिजनों का आरोप है कि जीएसटी(GST) विभाग की कार्रवाई, भारी जुर्माना और आर्थिक दबाव के कारण वह लंबे समय से मानसिक तनाव में थे।

परिवार के अनुसार राजेश चौरसिया सिगरेट और पान-मसाले के थोक व्यापारी थे। साल 2024 में जीएसटी विभाग ने उनके प्रतिष्ठान पर छापेमारी की थी, जिसमें करीब 30 लाख रुपये की कर चोरी का मामला बताया गया था।

परिजनों का कहना है कि यह गड़बड़ी जानबूझकर नहीं हुई थी, बल्कि उनके अकाउंटेंट की कथित लापरवाही और कागजी हेरफेर के कारण हुई। इसके बावजूद उन पर भारी जुर्माना लगाया गया, जिसे जमा करने का दबाव लगातार बढ़ रहा था।

बताया जा रहा है कि आर्थिक संकट और सामाजिक प्रतिष्ठा पर पड़े असर के कारण राजेश चौरसिया गहरे तनाव में थे। शनिवार सुबह तक घर का माहौल सामान्य था, लेकिन कुछ ही घंटों बाद उनका शव कमरे में फंदे से लटका मिला।

परिवार के लोग उन्हें तुरंत नीचे उतारकर डॉक्टर के पास ले गए, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

चेतगंज थाना प्रभारी विजय कुमार शुक्ला के अनुसार प्रथम दृष्टया यह आत्महत्या का मामला है और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

शनिवार देर शाम पोस्टमार्टम के बाद वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। मुंबई में नौकरी करने वाले उनके बेटे ने पिता को मुखाग्नि दी।

इस घटना के बाद स्थानीय व्यापारियों में रोष देखने को मिला है। कई व्यापारियों का कहना है कि जीएसटी की जटिल प्रक्रिया, भारी जुर्माने और छापेमारी के दबाव से छोटे व्यापारी मानसिक और आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। व्यापारियों ने सरकार से मांग की है कि छोटे व्यापारियों के लिए जीएसटी व्यवस्था को सरल बनाया जाए और दंडात्मक कार्रवाई की जगह सहयोगात्मक रवैया अपनाया जाए।

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