राष्ट्रसंत आचार्य चंद्रानन सागर सूरिश्वरजी 19 जुलाई को करेंगे ठाणे में ऐतिहासिक चातुर्मास मंगल प्रवेश!

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ठाणे: ठाणे की पुण्यधरा पर आस्था, भक्ति और संयम का एक ऐसा अनुपम संगम होने जा रहा है, जिसकी गूँज वर्षों तक श्रद्धालुओं के मानस पटल पर अंकित रहेगी। राजस्थान श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ, ठाणे एवं ऋषभदेवजी महाराज जैन धर्म टेंपल ऐंड ज्ञाति ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित होने वाला इस वर्ष का चातुर्मास केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्म-कल्याण और शासन प्रभावना का एक महाकुंभ सिद्ध होगा। इस अलौकिक अवसर के केंद्र में हैं कोकण शत्रुंजय स्वरूप ठाणा नगरे 258 जिनालयों के अद्वितीय प्रतिष्ठाकारक और नाकोडा भैरव दर्शन धाम महातीर्थ (मुंबई) के दूरदर्शी संस्थापक, परम पूज्य राष्ट्रसंत आचार्य गुरुदेव चंद्राननसागर सूरीश्वरजी महाराज साहेब।(Acharya Chandranan Sagar’s Auspicious Arrival)

आगामी आषाढ़ सूद 6, दिनांक 19 जुलाई 2026, रविवार का दिन ठाणे के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। जब सूर्य की प्रथम किरणें धरा को स्पर्श करेंगी, तब हजारों गुरुभक्तों का जनसैलाब, ढोल-नगाड़ों की गूंज और ‘गुरुदेव’ के जयकारों के बीच शासन सम्राट का भव्य मंगल प्रवेश होगा। गुरुदेव के साथ इस आध्यात्मिक यात्रा में प्रवर्तक मुनिराज हरिशचंद्र सागरजी म.सा., तपस्वी मुनिराज जैनेशचंद्रसागरजी म.सा., एवं अपनी कार्यकुशलता के लिए प्रसिद्ध मुनिराज मननचंद्र सागरजी म.सा. आदि ठाणा का सान्निध्य प्राप्त होगा। साथ ही, पूज्य विदुषी साध्वीजी कल्पिताश्रीजी म.सा. एवं पूज्य साध्वीजी चारुताश्रीजी म. सा. आदि श्रमण श्रमणीवृंद की उपस्थिति इस चातुर्मास को ज्ञान और वैराग्य की त्रिवेणी बना देगी।

इस चातुर्मास को ‘ऐतिहासिक’ और ‘अभूतपूर्व’ बनाने का संकल्प लेकर राजस्थान श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ के कर्मठ पदाधिकारी दिन-रात एक कर रहे हैं। संघ के अध्यक्ष उत्तमचंद यू. सोलंकी और मैनेजिंग ट्रस्टी उदय एम. परमार के कुशल मार्गदर्शन में तैयारियों भव्य स्वरूप दिया जा रहा है। उपमैनेजिंग ट्रस्टी सुकनराज परमार, सेक्रेटरी सुरेश जे. गुंगलिया, को उपसेक्रेटरी गुणवंत एम. सालेचा, कोषाध्यक्ष अशोक एस. पारेख, उपकोषाध्यक्ष प्रवीण के. राठौड, ट्रस्टीगण महिपाल एस. मंडेशा, रमेश के. ढेलरियावोरा, महावीर डी. पुनमिया, संपतराज डी. कंकूचोपडा, राजू डी. मेहता सहित समस्त कार्यकारिणी सदस्य और विभिन्न मंडल पूरे समर्पण और भक्ति के साथ जुटे हुए हैं।

यह चातुर्मास ठाणे नगर के लिए केवल धार्मिक प्रवचनों का समय नहीं है। बल्कि यह समय है तप, जप और साधना के माध्यम से स्वयं को तराशने का। गुरुदेव की ओजस्वी वाणी और मुनिराजों के संयमित जीवन का प्रभाव समाज के हर वर्ग को धर्म की ओर प्रेरित करेगा। संघ का प्रत्येक सदस्य इस विराट आयोजन को सफल बनाने के लिए सेवा भाव से ओत-प्रोत है। 19 जुलाई का वह दृश्य अत्यंत रोमांचक होगा जब संपूर्ण ठाणे नगरी श्वेत वस्त्रधारी श्रावक-श्राविकाओं से अट जाएगी और गुरुदेव के चरणों की रज से यहाँ की माटी पावन हो जाएगी। आप सभी इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनें और धर्म लाभ उठाएं।

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