CJP Draws in Teenagers: सीजेपी ने किशोरों को किया आकर्षित, ‘जीवन के पहले प्रदर्शन’ में पहुंचे युवा!

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CJP Draws in Teenagers: सोशल मीडिया के जरिये सामने आयी कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की ओर से नीट-पेपर लीक को लेकर शनिवार को जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन में सैकड़ों की तादाद में लोग इकट्ठा हुए। हाथ में पोस्टर-पर्चे लिये कुछ लोगों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की, तो कुछ ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) को खत्म करने की मांग की।

जंतर-मंतर दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों का केंद्र है। सरकार की नीतियों के प्रति अपनी नाराज़गी व्यक्त करने के लिए हर शख्स एवं समूह इसकी ओर रुख करता है, हालांकि सीजेपी का यह प्रदर्शन खास था। यहां सिर्फ समाज के वरिष्ठ प्रतिभागी ही नहीं, बल्कि किशोर, यहां तक की स्कूली बच्चे भी मौजूद रहे।

ऐसे ही एक छात्र समर्थ अपने जीवन के पहले विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने जंतर-मंतर पहुंचे। बारहवीं कक्षा में पढ़ने वाले समर्थ की उम्र सिर्फ 17 वर्ष है लेकिन जब उसे यह पता चला कि यह विरोध प्रदर्शन शिक्षा के मुद्दे पर आयोजित हो रहा है तो उसने अपनी मां से ज़िद की कि वह जंतर-मंतर जाना चाहते हैं। उसकी यह ज़िद मान ली गयी।

समर्थन ने इस प्रदर्शन में शामिल होने के अनुभव पर यूनीवार्ता से कहा, “यह मेरे जीवन का पहला विरोध प्रदर्शन है। सालों से बहुत से ऐसे मुद्दे हैं जिनसे गुस्सा आता है। सीजेपी ने हमें एक मंच दिया जहां हम शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज़ उठा सकते हैं। हमारी यही मांग है कि हमारा भविष्य सुरक्षित रहे और व्यवस्था साफ हो जिसमें हम ठीक तरह परीक्षा दे सकें और आगे चलकर जीवन में कुछ बन सकें। कम से कम परीक्षाएं तो ठीक से हों।”

समर्थ ने अभी 12वीं कक्षा में प्रवेश किया है और आने वाले साल में वह बोर्ड परीक्षा देंगे। यही वजह है कि वह हाल ही में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के परीक्षा परिणाम में हुई ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) संबंधी अव्यवस्था को लेकर भी चिंतित हैं। उन्होंने कहा, “अगर मैं सोचूं कि इस साल मैंने बोर्ड परीक्षा नहीं दी तो मेरे लिए चिंता का विषय नहीं है, तो यह गलत होगा।

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आने वाले साल में मुझे भी परीक्षा देनी है। सीबीएसई एक बड़ा बोर्ड है और देशभर के बच्चे इस परीक्षा में हिस्सा लेते हैं। ओएसएम व्यवस्था इसलिए लायी गयी थी कि चेकिंग पारदर्शी हो। अगर यही प्रणाली ठीक से काम नहीं करेगी तो छात्रों का आक्रोशित होना लाजमी है।”

दूसरी ओर, हंसराज कॉलेज में पढ़ने वाले 19 वर्षीय निखिल गुप्ता भी एक नयी पहल को अनुभव करने के लिए जंतर-मंतर पहुंचे। वह अक्सर विरोध प्रदर्शनों में शामिल नहीं होते, लेकिन युवाओं और विद्यार्थियों से संबंधित मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन हुआ तो जंतर-मंतर चले आए। उन्होंने कहा, “यह (पेपर लीक) चिंता का विषय है। सीबीएसई-नीट की परीक्षाएं ठीक से न होना देश के युवाओं को प्रभावित करता है।”

निखिल ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तलब करने वाली सीजेपी की मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि वह सीजेपी का घोषणा-पत्र पढ़ चुके हैं और पार्टी की मांगों से इत्तफाक भी रखते हैं। राष्ट्रीय राजधानी की चिलचिलाती गर्मी और धूप में 13 वर्षीय अपरस कौर भी शिक्षा व्यवस्था की खामियों के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त करने जंतर-मंतर पहुंचीं। नौंवी कक्षा में पढ़ने वाली अपरस के हाथ में एक बैनर था, जिस पर काले वॉटर कलर से लिखा था, ‘बच्चे कोई प्रयोग नहीं हैं।’

उन्होंने अपनी नाराजगी को शब्दों में पिरोते हुए कहा, “मैं प्रदर्शन में आयी हूं क्योंकि हमारे साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ मेरे मन में आक्रोश है। शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए। अगर वह इस्तीफा नहीं दे सकते तो व्यवस्था सुधारने की जिम्मेदारी लें। मैं बड़ी होकर एक डिजाइनर-इलस्ट्रेटर बनना चाहती हूं। वहां तक पहुंचने के लिए मुझे कई पड़ाव पार करने होंगे। अगर एक आम नागरिक की इतनी जिम्मेदारी तय की जा सकती है तो मंत्रियों की क्यों नहीं।”

अपरस बताती हैं कि जब उन्हें पता चला कि उनके माता-पिता विरोध प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे हैं, तो उन्होंने भी साथ जाने की इच्छा जाहिर की। अपने जीवन के पहले विरोध प्रदर्शन में अपरस ने अनुभव किया कि एक लोकतंत्र का नागरिक होना कैसा है। उन्होंने कहा, “मुझे अच्छा लग रहा है कि मैं अपनी आवाज़ उठा पा रही हूं। अपनी अभिव्यक्ति की आज़ादी का इस्तेमाल कर रही हूं।”

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