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  • Donald Trump Tarrif: भारत-यूरोपियन यूनियन की ‘मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील’, ट्रंप की टैरिफ नीति पर बड़ा झटका

    Donald Trump Tarrif: भारत-यूरोपियन यूनियन की ‘मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील’, ट्रंप की टैरिफ नीति पर बड़ा झटका

    नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति और यूरोप के दबावों के बीच भारत ने यूरोपियन यूनियन (EU) के साथ एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर सहमति जताई है। इस डील को दोनों पक्षों ने “मदर ऑफ ऑल ट्रेड” कहा है और इसे वैश्विक व्यापार की दिशा बदलने वाला कदम माना जा रहा है।

    डील से भारत को मिलेगा बड़ा फायदा:
    इस समझौते के तहत भारत यूरोप के करीब 27 देशों के 2 अरब लोगों के बाजार तक सीधे पहुंच सकेगा। यूरोप में भारत के कपड़े, चमड़े, आभूषण और हस्तशिल्प जैसे उत्पाद अब ड्यूटी-फ्री पहुंचेंगे। वहीं, यूरोप से आने वाले वाइन, डेयरी प्रोडक्ट और ऑटोमोबाइल जैसी वस्तुएं भारत में कम टैक्स के साथ उपलब्ध होंगी।

    डॉलर की दादागिरी पर रोक:
    सबसे बड़ा प्रभाव वित्तीय क्षेत्र में होगा। यूरोप और भारत के बीच सीधे मुद्रा आदान-प्रदान से डॉलर पर निर्भरता कम होगी। यूरो और रुपया मजबूत होंगे, जबकि अमेरिकी डॉलर की वैश्विक दबदबे वाली स्थिति कमजोर हो सकती है।

    ट्रंप के लिए बड़ा झटका:
    ट्रंप की मेक अमेरिका ग्रेट अगेन योजना और टैरिफ की धमकी यूरोप और भारत को अमेरिकी दबदबे से मुक्त कर रही है। इससे ट्रंप ने यूरोपियन यूनियन के साथ संभावित ट्रेड डील का अवसर खो दिया है और उनकी वैश्विक आर्थिक रणनीति को चुनौती मिल रही है।

    भविष्य में रणनीतिक फायदे:
    यह डील सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं रहेगी। इससे भारत को रक्षा सौदे, साइबर सिक्योरिटी, समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग में भी मजबूती मिलेगी। आईटी और स्किल्ड प्रोफेशनल्स को यूरोप में काम करने के अवसर भी बढ़ेंगे।

    भारत की तैयारी:
    आरबीआई ने विदेशी बैंकों को भारत में स्पेशल रुपये वोस्ट्रो अकाउंट खोलने का निर्देश दिया है। इसके जरिए भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच रुपये और यूरो में सीधे कारोबार शुरू हो सकेगा। रूस, श्रीलंका, UAE और जर्मनी सहित 22 से अधिक देश भी इस प्रणाली में शामिल होने के लिए सहमत हैं।

    विशेषज्ञों की राय:
    विशेषज्ञ मानते हैं कि इस डील से भारत वैश्विक आर्थिक नक्शे में अपनी स्थिति मजबूत करेगा और ट्रंप के टैरिफ दवाब का असर यूरोप और भारत के सहयोग से कम होगा। यह डील भारत के लिए आर्थिक, रणनीतिक और वैश्विक प्रभाव के मामले में अब तक का सबसे बड़ा कदम है।

  • Richa Industries बैंक घोटाला: ED ने पूर्व प्रमोटर संदीप गुप्ता को गिरफ्तार, करोड़ों के फर्जीवाड़े का खुलासा

    Richa Industries बैंक घोटाला: ED ने पूर्व प्रमोटर संदीप गुप्ता को गिरफ्तार, करोड़ों के फर्जीवाड़े का खुलासा

    गुरुग्राम: रिचा इंडस्ट्रीज लिमिटेड(Richa Industries) से जुड़े बड़े बैंक फ्रॉड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की गुरुग्राम जोनल टीम ने कंपनी के पूर्व प्रमोटर और सस्पेंडेड मैनेजिंग डायरेक्टर संदीप गुप्ता को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें ED की कस्टडी में 8 दिन के लिए भेजा गया।

    236 करोड़ का चूना, फर्जी बिलिंग का खेल:
    ED की जांच में सामने आया है कि संदीप गुप्ता ने 2015 से 2018 के बीच जानबूझकर बिना माल सप्लाई किए फर्जी बिक्री दिखाकर सार्वजनिक बैंकों को 236 करोड़ रुपए का नुकसान पहुँचाया। इसमें कॉटन फैब्रिक सेल 7.42 करोड़ और सोलर संबंधित फर्जी बिक्री 8.50 करोड़ की पाई गई। फर्जी लेन-देन के लिए कई शेल कंपनियों का सहारा लिया गया और इनवॉइस व अकाउंट बुक्स में हेराफेरी की गई।

    फर्जी खरीद और लोन का घोटाला:
    कंपनी ने ZLD प्लांट और मशीनरी की 9.23 करोड़ की फर्जी खरीद दिखाई, जबकि FY 2015-16 से 2017-18 के बीच 16.40 करोड़ रुपये ग्रुप कंपनियों में लोन रीपेमेंट के नाम पर घुमाए गए। FY 2018-19 में RIL के पैसों से रिचा कृष्णा कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड में controlling stake खरीदकर अहम प्रोजेक्ट को बाहर ले जाया गया।

    संपत्तियों में हेरफेर, CIRP प्रभावित:
    ED ने आरोप लगाया कि CIRP शुरू होने से ठीक पहले संदीप गुप्ता ने कंपनी की कीमती संपत्तियों को डायवर्ट करने में भूमिका निभाई। इसके लिए कई शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया गया। दिसंबर 2018 में CIRP शुरू हुआ, लेकिन कोई रिज़ॉल्यूशन प्लान पास नहीं हो सका। 11 जून 2025 को NCLT ने कंपनी को लिक्विडेशन में डाल दिया।

    बैंकों को भारी नुकसान, रिजर्व प्राइस पर बेची गई कंपनी:
    16 अक्टूबर 2025 को कंपनी को ई-ऑक्शन में 96 करोड़ के रिजर्व प्राइस पर बेचा गया। इससे IOB और यूनियन बैंक जैसे पब्लिक सेक्टर बैंकों को 696 करोड़ के दावों के बदले मात्र 40.29 करोड़ मिले, यानी लगभग 94% का हेयरकट झेलना पड़ा।

    कोरपोरेट गारंटी और शेल कंपनियों का इस्तेमाल:
    ED की जांच में खुलासा हुआ कि CIRP शुरू होने से पहले रिचा इंडस्ट्रीज़ ने छह कंपनियों को 232 करोड़ से ज्यादा की कॉरपोरेट गारंटी दी, जिनमें CoC में करीब 48.25% वोटिंग राइट्स थे। संदीप गुप्ता ने शेल कंपनी सारिगा कंस्ट्रक्शन प्रा. लिमिटेड बनाई, जिसमें पूर्व कर्मचारी नेहा सिंह को बेनामी डायरेक्टर बनाया गया।

    ED की जांच जारी:
    ED ने आरोप लगाया कि CIRP के दौरान संदीप गुप्ता और उनके परिवार ने गैरकानूनी तरीके से कंपनी पर कंट्रोल बनाए रखा, एग्रीमेंट किए और सैलरी भी ली। CIRP शुरू होने से पहले मसूरी के एक बड़े प्रोजेक्ट को प्रमोटर से जुड़ी कंपनी को सब-कॉन्ट्रैक्ट दे दिया गया, जिससे करीब 40 करोड़ रुपये बाहर चले गए।

  • Supreme Court: मौत की सजा फांसी की जगह इंजेक्शन या इलेक्ट्रिक चेयर?-सुप्रीम कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

    Supreme Court: मौत की सजा फांसी की जगह इंजेक्शन या इलेक्ट्रिक चेयर?-सुप्रीम कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

    नई दिल्ली। मौत की सजा देने के पारंपरिक तरीके ‘फांसी’ को लेकर उठे संवैधानिक और मानवीय सवालों पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अहम सुनवाई पूरी करते हुए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। अदालत में दाखिल जनहित याचिका में फांसी को क्रूर, अमानवीय और पीड़ादायक बताते हुए इसकी जगह लीथल इंजेक्शन, इलेक्ट्रिक चेयर या गोली मारने जैसे वैकल्पिक तरीकों को अपनाने की मांग की गई है।

    यह याचिका वरिष्ठ अधिवक्ता ऋषि मल्होत्रा द्वारा दाखिल की गई है, जिसमें कहा गया है कि फांसी देने की प्रक्रिया में दोषी को लंबे समय तक शारीरिक और मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ती है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 में निहित गरिमामय जीवन और मृत्यु के अधिकार के खिलाफ है। याचिका में यह भी सुझाव दिया गया है कि कम से कम दोषी को यह विकल्प दिया जाए कि वह फांसी चाहता है या घातक इंजेक्शन के जरिए मृत्यु।

    सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल ने अदालत को बताया कि इस संवेदनशील मुद्दे पर विचार के लिए एक समिति का गठन किया गया है, जो मौत की सजा के वैकल्पिक तरीकों का अध्ययन कर रही है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया कि फिलहाल फांसी को ही सबसे तेज और सुरक्षित तरीका माना जाता है और उसे बदलने के पक्ष में केंद्र नहीं है।

    केंद्र के इस रुख पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई। अदालत ने टिप्पणी की कि समय के साथ कानून और प्रक्रियाओं में बदलाव आवश्यक है। कोर्ट ने कहा कि भारतीय संविधान एक जीवंत और मानवीय दस्तावेज है, जिसमें सम्मानजनक मृत्यु का अधिकार भी निहित होना चाहिए।

    गौरतलब है कि यह याचिका वर्ष 2017 में दाखिल की गई थी और तब से इस पर कई चरणों में सुनवाई हो चुकी है। अदालत ने याचिकाकर्ता और केंद्र सरकार दोनों को तीन सप्ताह के भीतर अपनी लिखित दलीलें दाखिल करने का निर्देश दिया है।

    यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दुनिया के कई देशों ने फांसी को समाप्त कर लीथल इंजेक्शन जैसे तरीकों को अपनाया है, जबकि भारत में अब भी भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत मौत की सजा का एकमात्र तरीका फांसी ही है। सुप्रीम कोर्ट का आने वाला फैसला न केवल कानूनी बल्कि नैतिक और मानवीय दृष्टि से भी दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।

  • Mumbai BMC News: मुंबई में शिवसेना कॉरपोरेटर्स के लिए विशेष ट्रेनिंग कैंप, एकनाथ शिंदे देंगे मार्गदर्शन

    आर. एस. नेटवर्क

    मुंबई | मुंबई महानगरपालिका चुनाव में जीत हासिल करने वाले शिवसेना के 29 नवनिर्वाचित कॉरपोरेटर्स के लिए मुंबई में एक विशेष ट्रेनिंग कैंप का आयोजन किया गया है। यह जानकारी युवा सेना के जनरल सेक्रेटरी और कॉरपोरेटर अमेय घोले ने दी।अमेय घोले ने बताया कि इस प्रशिक्षण शिविर के दौरान शिवसेना के मुख्य नेता और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे कॉरपोरेटर्स को मुंबई महानगरपालिका की कार्यप्रणाली, प्रमुख विकास योजनाओं और आगामी पांच वर्षों के रोडमैप पर विस्तृत मार्गदर्शन देंगे। इसके साथ ही पार्टी के वरिष्ठ नेता वार्ड स्तर पर प्रभावी ढंग से कार्य करने के तरीकों की भी जानकारी देंगे।यह तीन दिवसीय ट्रेनिंग कैंप मुंबई के होटल ताज लैंड्स एंड में आयोजित किया जा रहा है। घोले ने कहा कि चुनाव परिणाम घोषित होने के अगले ही दिन से शिवसेना के कॉरपोरेटर्स ने जनहित के कार्यों की शुरुआत कर दी है, ताकि जनता द्वारा जताए गए विश्वास पर खरा उतरा जा सके।उन्होंने यह भी बताया कि राज्यभर में शिवसेना के कुल 397 कॉरपोरेटर्स निर्वाचित हुए हैं, जो मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में जनता के भरोसे और पार्टी की बढ़ती ताकत को दर्शाता है।मुंबई के महापौर पद को लेकर घोले ने स्पष्ट किया कि यह पद ग्रैंड अलायंस के खाते में जाएगा और इस संबंध में अंतिम निर्णय पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा।

  • Fraud Voter Name 2026: कालबादेवी के रामवाड़ी में मतदाता सूची में बड़ा फर्जीवाड़ा, एक व्यक्ति के दो नाम और दो फोटो से मचा हड़कंप

    मतदाता सूची में गड़बड़ी पर विपक्ष सख्त हो, चुप्पी टूटी नहीं तो लोकतंत्र पर खतरा: पार्टियों को चेतावनी

    आर.एस. नेटवर्क। अश्विनीकुमार

    मुंबई | कालबादेवी के रामवाड़ी स्थित प्रभु सुंदर बिल्डिंग, वार्ड क्रमांक 222 में मतदाता सूची को लेकर सामने आई गंभीर अनियमितताओं ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आरोप है कि एक ही व्यक्ति के दो अलग-अलग नाम और दो अलग-अलग फोटो के आधार पर दो मतदाता दर्ज किए गए हैं। इस खुलासे के बाद पूरे इलाके में राजनीतिक हलचल मच गई है और नागरिकों में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है।


    स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह महज़ प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से किया गया खेल प्रतीत होता है, जिसका सीधा असर चुनाव परिणामों पर पड़ सकता है। प्रभु सुंदर बिल्डिंग में रहने वाले एक व्यक्ति, जिसका नाम बदले हुए रूप में रुद्रेश बताया जा रहा है, से इलाके के लोगों की नियमित मुलाकात होती रहती है। रविवार को जब कुछ नागरिक उनके घर पहुंचे, तो जानकारी मिली कि भाजपा उम्मीदवार रीता मकवाना की ओर से मतदाता पर्चियों का वितरण किया जा रहा था। संबंधित बिल्डिंग के लिए कुल चार शीट की मतदाता पर्चियां तैयार की गई थीं।


    जब इन शीट्स की गहन जांच की गई, तो चौंकाने वाली गड़बड़ियां सामने आईं। एक ही व्यक्ति का नाम दो अलग-अलग स्थानों पर दर्ज पाया गया। एक जगह पिता के नाम की जगह मां का नाम दर्ज था, तो दूसरी जगह पिता का नाम लिखा गया था। इतना ही नहीं, एक स्थान पर कमरे का नंबर 61 दर्शाया गया, जबकि दूसरी जगह वही व्यक्ति कमरे नंबर 6 में दर्ज मिला। दोनों प्रविष्टियों में अलग-अलग फोटो लगाए गए थे, जिससे दो अलग मतदाताओं का आभास पैदा किया गया।


    स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इस प्रकार की त्रुटियां यह साफ़ संकेत देती हैं कि मतदाता सूची तैयार करने में या तो घोर लापरवाही बरती गई है या फिर जानबूझकर गड़बड़ी की गई है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जिस मतदाता सूची के निर्माण पर चुनाव आयोग करोड़ों रुपये खर्च करता है, उसमें ऐसी गंभीर चूक कैसे संभव है। लोगों को आशंका है कि यह मामला केवल इसी एक बिल्डिंग तक सीमित नहीं, बल्कि शहर के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के फर्जी और डुप्लिकेट मतदाता तैयार किए गए हो सकते हैं।
    इस प्रकरण के सामने आने के बाद विपक्षी दलों कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और वंचित बहुजन आघाड़ी से तत्काल और आक्रामक भूमिका निभाने की मांग तेज़ हो गई है। नागरिकों का कहना है कि यदि अब भी विपक्ष चुप्पी साधे रहता है, तो आने वाले चुनावों में लोकतंत्र के साथ बड़ा खिलवाड़ होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
    स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि फर्जी आधार कार्ड के सहारे फर्जी मतदान कराया जा सकता है और अलग-अलग इमारतों में इस तरह के डुप्लिकेट मतदाता खड़े किए जा सकते हैं। नागरिकों ने चुनाव आयोग से मांग की है कि तत्काल आधार कार्ड की सत्यता जांचने के लिए सख्त और पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए, ताकि डुप्लिकेट और फर्जी आधार के जरिए किसी अन्य के नाम पर मतदान कराने की साजिश को समय रहते रोका जा सके।
    यह मामला न केवल सत्ताधारी दलों के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहा है, बल्कि चुनाव आयोग(Mumbai Election 2026) की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है। यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो यह मामला आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक तूफान बन सकता है।

  • Mahanagar Palika 2026: ‘सात संकल्प, नई शुरुआत’, पिंपरी-चिंचवड़ के लिए अजित पवार का घोषणापत्र जारी

    Mahanagar Palika 2026: ‘सात संकल्प, नई शुरुआत’, पिंपरी-चिंचवड़ के लिए अजित पवार का घोषणापत्र जारी

    पिंपरी-चिंचवड़: नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री अजितदादा पवार ने पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका चुनाव के लिए पार्टी का घोषणापत्र ‘सात संकल्प, एक नई शुरुआत’ के नारे के साथ जारी किया। इस घोषणापत्र में शहर की बुनियादी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए विकास का स्पष्ट रोडमैप पेश किया गया है।

    घोषणापत्र में रोज़ाना जलापूर्ति, बेहतर सड़कें, ट्रैफिक प्रबंधन, स्वच्छता, स्वास्थ्य, शिक्षा और पारदर्शी विकास योजना जैसे मुद्दों पर ठोस वादे किए गए हैं। पार्टी का दावा है कि यह घोषणापत्र छह महीने के ऑन-ग्राउंड सर्वे, वार्ड-स्तरीय संवाद और नागरिकों से सीधी बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। इस दौरान नागरिकों की प्रमुख मांगों नियमित पानी की आपूर्ति, तेज़ और सुरक्षित परिवहन, स्वच्छ वातावरण, सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं और प्रत्यक्ष आर्थिक राहत को घोषणापत्र में प्राथमिकता दी गई है।

    सात प्रमुख संकल्प

    • रोज़ाना स्वच्छ जलापूर्ति
      हर घर में तय समय पर हाई-प्रेशर नल से पानी, टैंकर निर्भरता खत्म करना, लीकेज-फ्री पाइपलाइन, नदियों का पुनर्जीवन और बाढ़ नियंत्रण के उपाय।
    • ट्रैफिक-फ्री और गड्ढा-मुक्त पीसीएमसी
      सड़कों की समयबद्ध मरम्मत, गुणवत्ता की ज़िम्मेदारी ठेकेदारों पर, डिजिटल शिकायत प्रणाली, मेट्रो रूट और फ्लाईओवर परियोजनाओं की पारदर्शी निगरानी।
    • देश का सबसे स्वच्छ शहर
      100% कचरा पृथक्करण, वैज्ञानिक निपटान, ज़ीरो लैंडफिल और स्वच्छता के लिए हाउसिंग सोसाइटियों की सक्रिय भागीदारी।
    • सस्ते और हाई-टेक हेल्थकेयर सेंटर
      बड़े अस्पताल, नए मेडिकल संस्थान, 100 सब-अर्बन क्लिनिक, किफायती जांच और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए मजबूत स्वास्थ्य सुविधाएं।
      -पारदर्शी विकास योजना (DP)
      मौजूदा ड्राफ्ट डीपी को रद्द कर नागरिकों की भागीदारी से नई योजना, कानूनी घरों की सुरक्षा और विस्थापन के बजाय पुनर्वास पर ज़ोर।
    • पीसीएमसी मॉडल स्कूल
      100 आधुनिक नगर निगम स्कूल-राष्ट्रीय मानकों की शिक्षा, आधुनिक उपकरण, प्रशिक्षित शिक्षक और निःशुल्क सुविधाएं।
      -सीधी राहत और ज़िम्मेदार शासन
      मुफ़्त मेट्रो-बस यात्रा, छोटे घर मालिकों को प्रॉपर्टी टैक्स में छूट, छात्रों को टैबलेट, महिलाओं के लिए बिना ब्याज ऋण योजना तथा खेल-संस्कृति को प्रोत्साहन।

    -एक्शन-ओरिएंटेड विज़न डॉक्यूमेंट
    अजित पवार ने कहा कि ये सात संकल्प छत्रपति शिवाजी महाराज के लोककल्याणकारी शासन, छत्रपति शाहू महाराज के सामाजिक न्याय, महात्मा फुले के शिक्षा-समानता के विचार और डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के समता सिद्धांत से प्रेरित हैं। बढ़ती महंगाई और आर्थिक दबावों के बीच यह घोषणापत्र नागरिकों को सीधी राहत, मजबूत बुनियादी ढांचा और आत्मनिर्भर शहर की दिशा में ले जाने का संकल्प दर्शाता है। एनसीपी का यह घोषणापत्र नारों से अधिक एक्शन-ओरिएंटेड विज़न डॉक्यूमेंट के रूप में पेश किया गया है।

  • Election Commission 2026: बीजेपी ने यूपी से मंगाए नेता और प्रचार गाड़ियाँ, चुनाव आयोग की निष्क्रियता पर उठे गंभीर सवाल

    Election Commission 2026: बीजेपी ने यूपी से मंगाए नेता और प्रचार गाड़ियाँ, चुनाव आयोग की निष्क्रियता पर उठे गंभीर सवाल

    मुंबई | विशेष प्रतिनिधि
    महाराष्ट्र में चुनावी ज़मीन कमजोर पड़ते ही भारतीय जनता पार्टी ने प्रचार के लिए उत्तर प्रदेश से नेताओं, प्रचार गाड़ियों और सामग्री का आयात शुरू कर दिया है। जिस ईडी–सीबीआई के डर के सहारे भाजपा उत्तर भारत में राजनीतिक बढ़त बनाती रही, वही दबाव की राजनीति महाराष्ट्र में कारगर नहीं हो पा रही है। नतीजतन अब भाजपा को प्रचार के लिए स्थानीय स्तर पर पर्याप्त वाहन तक उपलब्ध नहीं हो पा रहे, और मजबूरी में यूपी से गाड़ियाँ मंगाई जा रही हैं।


    सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इन सभी प्रचार वाहनों की जानकारी चुनाव आयोग को दी गई है? या फिर भाजपा चुनाव आयोग की आंखों में धूल झोंककर बाहरी राज्यों से संसाधन लाकर खुलेआम आचार संहिता की धज्जियाँ उड़ा रही है?
    जानकारों के मुताबिक, चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार हर प्रचार वाहन, उसका नंबर, मालिकाना हक, खर्च और उपयोग की पूरी जानकारी आयोग के पास दर्ज होना अनिवार्य है। लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि महाराष्ट्र की सड़कों पर यूपी नंबर की प्रचार गाड़ियाँ धड़ल्ले से घूम रही हैं, जिनका न तो स्थानीय स्तर पर कोई लेखा-जोखा दिख रहा है और न ही सार्वजनिक रूप से उनकी अनुमति स्पष्ट है।


    राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा को महाराष्ट्र में जनाधार की कमी का सामना करना पड़ रहा है। उत्तर भारतीय वोट बैंक को साधने के लिए बाहरी चेहरों को मैदान में उतारा जा रहा है, लेकिन यह प्रयास भी स्थानीय मतदाताओं को रास नहीं आ रहा। सवाल उठता है कि जब महाराष्ट्र में भाजपा के पास पर्याप्त संगठनात्मक ताकत और संसाधन हैं, तो प्रचार के लिए दूसरे राज्य पर निर्भरता क्यों?
    विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग भाजपा के मामले में चयनात्मक चुप्पी साधे हुए है। आम उम्मीदवारों और छोटे दलों पर सख्ती से नियम लागू किए जाते हैं, लेकिन सत्ताधारी दल द्वारा नियमों के संभावित उल्लंघन पर आयोग की निष्क्रियता लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।
    – अब मांग उठ रही है कि चुनाव आयोग यह स्पष्ट करे कि
    – महाराष्ट्र में भाजपा के लिए कितनी प्रचार गाड़ियाँ पंजीकृत हैं?
    – यूपी से आई गाड़ियों की अनुमति किस आधार पर दी गई?
    – उनके खर्च का लेखा-जोखा किस खाते में दर्ज है?
    अगर इन सवालों के जवाब नहीं दिए गए, तो यह साफ माना जाएगा कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर आंच आई है। लोकतंत्र में चुनाव सिर्फ वोट से नहीं, नियमों की समानता से भी लड़े जाते हैं—और यही कसौटी आज भाजपा और चुनाव आयोग दोनों के सामने खड़ी है।

  • Tamilnadu Politics: चुनाव से पहले तमिलनाडु की सियासत में घमासान, स्टालिन की हठधर्मिता से BJP को मिल रहा फायदा

    Tamilnadu Politics: चुनाव से पहले तमिलनाडु की सियासत में घमासान, स्टालिन की हठधर्मिता से BJP को मिल रहा फायदा

    New Delhi: तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी उथल-पुथल तेज हो गई है। कांग्रेस की सत्ता में हिस्सेदारी की पुरानी मांग को एक बार फिर मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने सिरे से खारिज कर दिया है। डीएमके नेतृत्व का साफ संदेश है कि गठबंधन चुनाव तक ठीक है, लेकिन सरकार में हिस्सेदारी नहीं। स्टालिन की यही “एकला चलो” नीति अब गठबंधन धर्म पर सवाल खड़े कर रही है।

    कांग्रेस नेताओं के तीखे बयानों से साफ है कि सहयोगी दल खुद को सिर्फ बाहरी समर्थन तक सीमित नहीं रखना चाहते। बावजूद इसके डीएमके का अड़ियल रवैया जारी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्टालिन का यह रुख सीधे तौर पर बीजेपी के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। अमित शाह पहले ही राज्य में आक्रामक मोड में नजर आ रहे हैं, वहीं थलपति विजय की संभावित एंट्री ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।

    अगर डीएमके ने सहयोगियों को नजरअंदाज करना जारी रखा, तो गठबंधन में दरार तय मानी जा रही है—और इसका सीधा लाभ बीजेपी को मिल सकता है। चुनावी रण में सबसे बड़ा सवाल यही है: स्टालिन की जिद डीएमके को भारी पड़ेगी या बीजेपी इस मौके को भुनाने में कामयाब होगी?

  • Bangladesh-Rohingya Matter: बांग्लादेशी–रोहिंग्या मुद्दे पर कांग्रेस का हमला, फडणवीस से मांगे ठोस आंकड़े

    Bangladesh-Rohingya Matter: बांग्लादेशी–रोहिंग्या मुद्दे पर कांग्रेस का हमला, फडणवीस से मांगे ठोस आंकड़े

    मुंबई। महाराष्ट्र में बांग्लादेशी और रोहिंग्या प्रवासियों को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस मुद्दे पर दावे नहीं, बल्कि प्रमाण देने की मांग की है। प्रदेश कांग्रेस ने कहा है कि अगर सरकार ने वाकई राज्य में अवैध प्रवासियों की “सबसे अधिक संख्या” की पहचान कर ली है, तो उसके स्पष्ट और सार्वजनिक आंकड़े सामने रखे जाएं।

    प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने फडणवीस पर तीखा हमला करते हुए उन्हें “सपनों का सौदागर” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार हकीकत से ज्यादा भविष्य के वादों और घोषणाओं पर निर्भर है। सावंत ने कहा कि मुंबई को बाढ़-मुक्त करने, ईस्टर्न फ्रीवे को ठाणे से जोड़ने और एक हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था जैसे बड़े-बड़े दावे किए गए, लेकिन ज़मीन पर नतीजे नज़र नहीं आते।

    बीएमसी चुनाव से पहले बांग्लादेशी-रोहिंग्या मुद्दे को उठाने को लेकर कांग्रेस ने बीजेपी पर राजनीतिक फायदे का आरोप लगाया है। कांग्रेस का कहना है कि डर और भ्रम की राजनीति के बजाय सरकार को अपने दावों की सच्चाई आंकड़ों के साथ जनता के सामने रखनी चाहिए।

  • Pakistan Bangladesh Politics: ओवैसी के बयान पर भड़के देवकीनंदन ठाकुर, पाकिस्तान–बांग्लादेश को लेकर कर दी ‘भविष्यवाणी’

    Pakistan Bangladesh Politics: ओवैसी के बयान पर भड़के देवकीनंदन ठाकुर, पाकिस्तान–बांग्लादेश को लेकर कर दी ‘भविष्यवाणी’

    New Delhi: हिजाब को लेकर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बयान पर सियासी और धार्मिक हलकों में घमासान मच गया है। कथावाचक और धार्मिक नेता देवकीनंदन ठाकुर ने ओवैसी पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि अगर उनका सपना है कि भारत में हिजाब पहनने वाली महिला प्रधानमंत्री बने, तो “हमारा भी सपना है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश में तिलक और भगवा वस्त्र पहनने वाले लोग सत्ता में आएं।”

    देवकीनंदन ठाकुर ने इसे विचारधाराओं की टक्कर बताते हुए कहा कि जैसे ओवैसी भविष्य की कल्पना कर रहे हैं, वैसे ही सनातन समाज भी अपनी आकांक्षाएं रखता है। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    ओवैसी के बयान पर बीजेपी ने भी कड़ा रुख अपनाया है। बीजेपी सांसद अनिल बोंडे ने इसे गैर-जिम्मेदाराना करार देते हुए कहा कि ओवैसी “आधा सच” बोल रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कई मुस्लिम महिलाएं हिजाब को मजबूरी मानती हैं और ईरान में हुए विरोध प्रदर्शनों का हवाला देते हुए कहा कि कोई भी गुलामी पसंद नहीं करता।

    गौरतलब है कि ओवैसी ने सोलापुर की जनसभा में भारतीय संविधान का हवाला देते हुए कहा था कि भारत में कोई भी नागरिक प्रधानमंत्री बन सकता है और भविष्य में हिजाब पहनने वाली महिला भी इस पद तक पहुंचेगी। इसी बयान ने अब सियासी आग में घी डालने का काम किया है।