Category: BMC

  • One of the busiest bridges in the city, Dadar’s Tilak Bridge, will be closed in Mumbai: मुंबई के तिलक ब्रिज पर तीन महीने के लिए भारी गाड़ियों पर बैन, ट्रैफिक जाम से राहत के लिए कदम

    One of the busiest bridges in the city, Dadar’s Tilak Bridge, will be closed in Mumbai: मुंबई के तिलक ब्रिज पर तीन महीने के लिए भारी गाड़ियों पर बैन, ट्रैफिक जाम से राहत के लिए कदम

    मुंबई(Mumbai): देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक ट्रैफिक जाम की समस्या है, और इसे लेकर जल्द ही कोई स्थायी समाधान नजर नहीं आ रहा। शहर के सबसे व्यस्त पुलों में से एक दादर का तिलक ब्रिज अब भारी वाहनों के लिए तीन महीने (12 फरवरी से 12 मई, 2026) के लिए बंद रहेगा।

    क्यों लिया गया निर्णय:
    मुंबई में सायन ब्रिज और एलफिंस्टन ब्रिज के निर्माण कार्यों के चलते शहर में लगातार ट्रैफिक जाम लग रहा है। इन पुलों पर काम के कारण ठाणे और नवी मुंबई से आने वाले वाहन धारावी और तिलक ब्रिज की तरफ मोड़ दिए जा रहे हैं, जिससे दादर और माटुंगा इलाके में भीड़ और जाम बढ़ गया है।

    मुंबई ट्रैफिक पुलिस ने बताया कि सुबह 7 बजे से रात 11 बजे तक मिक्सर, डंपर, ट्रेलर और अन्य भारी वाहनों के लिए तिलक ब्रिज पर यात्रा पर रोक रहेगी। इस फैसले का उद्देश्य इमरजेंसी वाहनों के लिए रास्ता साफ रखना और ट्रैफिक की स्थिति में सुधार लाना है।

    भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग:

    • ईस्टर्न सबर्ब्स और नवी मुंबई से आने वाली गाड़ियां तिलक ब्रिज के बजाय सायन हॉस्पिटल जंक्शन से दाएं मुड़ेंगी, फिर वे सुलोचना शेट्टी मार्ग, कुंभारवाड़ा जंक्शन, कटारिया मार्ग, शोभा होटल, सावरकर रोड, चैत्यभूमि, सिद्धिविनायक मंदिर और अप्पासाहेब मराठे चौक होते हुए अपने गंतव्य पर पहुंचेंगी।
    • दक्षिणी दिशा में परेल और लालबाग के लिए दादर TT ब्रॉडवे जंक्शन से हिंदमाता ब्रिज, परेल वर्कशॉप, लालबाग ब्रिज, भारतमाता सिग्नल से गरम खाड़ा सिग्नल तक दाएं मुड़कर चिंचपोकली ब्रिज का रास्ता लिया जा सकता है।
    • डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर रोड से उत्तर की ओर जाने वाले ट्रैफिक के लिए भी वैकल्पिक मार्ग बनाए गए हैं।
    • सेना भवन से आने वाले वाहन सेना भवन, एल. जे. रोड, शोभा होटल, कटारिया रोड, कुंभारवाड़ा जंक्शन और सुलोचना शेट्टी मार्ग का उपयोग करेंगे।

    उल्लेखनीय है कि गुरुवार को मुंबई जिला की डीपीडीसी बैठक में, जिसकी अध्यक्षता डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने की, भी शहर में ट्रैफिक जाम की स्थिति और इसके समाधान के उपायों पर चर्चा हुई।

  • Mumbai News : मुंबई से बांग्लादेशियों को बाहर करने के बयान पर मचा सियासी घमासान, रितू तावडे के बयान पर संजय राउत का पलटवार

    Mumbai News : मुंबई से बांग्लादेशियों को बाहर करने के बयान पर मचा सियासी घमासान, रितू तावडे के बयान पर संजय राउत का पलटवार

    क्या मोदी सरकार ने बांग्लादेश में टूटे हिंदू मंदिरों के पुनर्निर्माण के लिए करोड़ों की मदद दी?:शिवसेना (यूबीटी)

    मुंबई। मुंबई महानगरपालिका के महापौर (Mumbai Mayor) पद के लिए भाजपा ने रितू तावडे को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। 11 फरवरी को होने वाले महापौर चुनाव में उनके निर्विरोध चुने जाने की संभावना जताई जा रही है। उम्मीदवार घोषित होने के साथ ही रितू तावडे के एक बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है, जिस पर शिवसेना (उद्धव गुट) के सांसद संजय राउत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

    रितू तावडे ने कहा है कि वे मुंबई के हर नागरिक के लिए काम करना चाहती हैं। उनका दावा है कि मुंबईकर टैक्स (Mumbaikar Tax) देने वाला, जागरूक और संवेदनशील नागरिक है, लेकिन आज उसे फुटपाथ और सड़कों पर चलने तक की पर्याप्त जगह नहीं मिल पा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि शहर में फुटपाथ और सड़कों पर अतिक्रमण की बड़ी वजह बांग्लादेशी और रोहिंग्या हैं। तावडे के मुताबिक, यदि मुंबई को सुरक्षित रखना है, तो इन लोगों को शहर से बाहर करना उनकी प्राथमिकता होगी।

    इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कटाक्ष किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने बांग्लादेश में तोड़े गए हिंदू मंदिरों को बनाने के लिए सीधे “केंद्र सरकार की तरफ से करोड़ों रुपये की सहायता” देने का कोई आधिकारिक प्रावधान यूनियन बजट 2026-27 में नहीं किया है।

    वास्तव में, इस बजट में भारत ने बांग्लादेश को दी जाने वाली विदेशी मदद की राशि पहले के 120 करोड़ रुपये से घटाकर लगभग 60 करोड़ रुपये कर दी है, जो पिछले साल की तुलना में आधी है। यह बजट प्रावधान बांग्लादेश की सहायता के सामान्य विदेशी विकास सहयोग के रूप में है और उसमें किसी विशिष्ट धार्मिक स्थल की मरम्मत या मंदिर निर्माण जैसे प्रोजेक्ट का उल्लेख नहीं है। इस सहायता कटौती को दोनों देशों के बीच रिश्तों में तनाव और वहां चल रही अन्य परिस्थितियों के बीच एक आर्थिक निर्णय के रूप में देखा जा रहा है।

    महापौर चुनाव से पहले इस बयानबाज़ी ने मुंबई की राजनीति को गरमा दिया है। जहां भाजपा शहर की सुरक्षा और अतिक्रमण को बड़ा मुद्दा बना रही है, वहीं विपक्ष इस मुद्दे को केंद्र सरकार की नीतियों से जोड़ते हुए भाजपा पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगा रहा है।

  • The Freedom Trail Mumbai: मुंबई का फ्रीडम ट्रेल खुद आज़ादी को तरस रहा, आज़ादी के रास्ते पर हॉकर्स का कब्ज़ा

    The Freedom Trail Mumbai: मुंबई का फ्रीडम ट्रेल खुद आज़ादी को तरस रहा, आज़ादी के रास्ते पर हॉकर्स का कब्ज़ा

    मुंबई। भारत की आज़ादी की कहानी को ज़मीन पर उतारने वाला मुंबई का ‘फ्रीडम ट्रेल’(Mumbai Freedom Trail) आज खुद बेबसी की तस्वीर बन चुका है। जिस ऐतिहासिक पैदल मार्ग को देश के स्वतंत्रता संग्राम, खासकर अगस्त क्रांति मैदान (ग्वालिया टैंक) से जुड़े Quit India Movement की स्मृति को संजोने के लिए विकसित किया गया था, वही ट्रेल आज हॉकर्स, अतिक्रमण और अव्यवस्था का शिकार है।

    आजादी के नायकों की विरासत को दर्शाने वाला यह क्यूरेटेड वॉकिंग रूट आज भी हॉकर्स से आज़ाद नहीं हो पाया है। जगह-जगह ठेले, अस्थायी दुकानें और अवैध कब्ज़े न सिर्फ पैदल यात्रियों की राह रोक रहे हैं, बल्कि इस ऐतिहासिक धरोहर की गरिमा पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं।

    विडंबना यह है कि जिस रास्ते ने देश को “अंग्रेज़ों भारत छोड़ो” का नारा दिया, उसी रास्ते पर आज नागरिकों को चलने की आज़ादी तक नहीं मिल रही। पर्यटक, इतिहास प्रेमी और स्थानीय नागरिक—सभी को संकरे रास्तों, भीड़ और गंदगी से जूझना पड़ता है। सूचना पट्टिकाएं, विरासत चिन्ह और गाइडेड साइनबोर्ड कई जगह हॉकर्स के पीछे छिप चुके हैं।

    नगर निगम और प्रशासन ने फ्रीडम ट्रेल को सांस्कृतिक और पर्यटन विरासत के रूप में विकसित करने के बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों को आईना दिखा रही है। सवाल यह है कि जब मुंबई स्मार्ट सिटी, हेरिटेज सिटी और टूरिज़्म हब बनने की बात करती है, तो क्या उसकी आज़ादी की सबसे बड़ी कहानी को यूं ही अतिक्रमण के हवाले छोड़ दिया जाएगा?

    आज ज़रूरत इस बात की है कि फ्रीडम ट्रेल को सिर्फ इतिहास की निशानी नहीं, बल्कि सच में ‘फ्री’ बनाया जाए।

    अगर यही हाल रहा, तो आने वाली पीढ़ियां आज़ादी की कहानी किताबों में पढ़ेंगी—और मुंबई में उसका रास्ता तलाशती रह जाएंगी।

  • PM E-Bus Service Scheme:महाराष्ट्र में पीएम-ई-बस सेवा योजना कागज़ों तक सीमित, एक भी ई-बस सड़क पर नहीं उतरी: सांसद वर्षा गायकवाड़

    PM E-Bus Service Scheme:महाराष्ट्र में पीएम-ई-बस सेवा योजना कागज़ों तक सीमित, एक भी ई-बस सड़क पर नहीं उतरी: सांसद वर्षा गायकवाड़

    मुंबई। केंद्र की मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना (PM E-Bus Service Scheme) महाराष्ट्र में अब तक केवल कागज़ों तक ही सीमित दिखाई दे रही है। इस योजना के तहत राज्य के 22 शहरों के लिए 1,609 इलेक्ट्रिक बसों को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 1,411 बसों के लिए टेंडर भी जारी हो चुके हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक एक भी ई-बस प्रत्यक्ष सेवा में शामिल नहीं हुई है।

    यह जानकारी कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ द्वारा लोकसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने दी है। सांसद वर्षा गायकवाड़ ने महाराष्ट्र में पीएम-ई-बस सेवा योजना के वास्तविक क्रियान्वयन को लेकर सरकार को घेरा और योजना की प्रगति पर गंभीर सवाल उठाए।

    उन्होंने पूछा कि महाराष्ट्र में इस योजना के अंतर्गत कितने शहर शामिल हैं, कितनी इलेक्ट्रिक बसों को अब तक मंजूरी दी गई है, कितनी बसों के लिए निविदाएं निकाली गई हैं और कितनी बसें वास्तव में सेवा में आई हैं। साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या केंद्र सरकार ने राज्य में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, बस डिपो की तैयारी और बिजली की उपलब्धता की पर्याप्त समीक्षा की है या नहीं, और इस योजना से यात्रियों को वास्तविक रूप से क्या लाभ मिलने वाला है।

    केंद्र सरकार की ओर से नगर विकास मंत्रालय ने लिखित जवाब में बताया कि पीएम-ई-बस सेवा योजना के तहत ‘बिहाइंड-द-मीटर’ (BTM) इलेक्ट्रिकल और सिविल डिपो इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए 370.49 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इनमें से अब तक 200.18 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं।

    मंत्रालय के अनुसार, इस योजना के तहत प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन कमेटी (PMEC) और सेंट्रल स्टियरिंग एंड अप्रूवल कमेटी (CSAC) के माध्यम से राज्यों द्वारा भेजे गए प्रस्तावों का मूल्यांकन किया जाता है। पीएम-ई-बस सेवा योजना का उद्देश्य देश के 100 से अधिक शहरों में 10,000 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें शुरू करना है, ताकि शहरी परिवहन को स्वच्छ, स्मार्ट और समावेशी बनाया जा सके।

    इस योजना में 3 से 40 लाख आबादी वाले शहरों, 3 लाख से कम आबादी वाले राज्यों की राजधानियों तथा पूर्वोत्तर और पर्वतीय क्षेत्रों की राजधानियों को शामिल किया गया है। सरकार का दावा है कि इससे छोटे शहरों और उन इलाकों में रहने वाले यात्रियों को बड़ा लाभ मिलेगा, जहां संगठित बस सेवा उपलब्ध नहीं है।

    हालांकि, सांसद वर्षा गायकवाड़ ने महाराष्ट्र में अब तक एक भी ई-बस के सेवा में न आने को लेकर योजना के जमीनी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े किए हैं और इसे सरकार की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न बताया है।

  • Ajit Pawar Death: NCP at Crossroads, Sharad Pawar Emerges as Bhishma Pitamah: शरद पवार एक बार फिर एनसीपी के भीष्म पितामह की भूमिका में उभरकर आएंगे

    Ajit Pawar Death: NCP at Crossroads, Sharad Pawar Emerges as Bhishma Pitamah: शरद पवार एक बार फिर एनसीपी के भीष्म पितामह की भूमिका में उभरकर आएंगे

    अजित पवार के असामयिक निधन ने महाराष्ट्र की राजनीति को एक ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां हर फैसला इतिहास लिख सकता है। उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रमुख के रूप में अजित पवार केवल एक नेता नहीं थे, बल्कि सत्ता संतुलन की धुरी थे। उनके जाने के बाद न केवल पार्टी, बल्कि पूरी महायुति और विपक्षी खेमे में भी राजनीतिक भूचाल आ गया है।

    इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के बाद शरद पवार एक बार फिर एनसीपी के भीष्म पितामह की भूमिका में उभर आए हैं। भले ही अजित पवार की बगावत के बाद एनसीपी दो गुटों में बंटी हो, लेकिन संकट की इस घड़ी में परिवार और पार्टी—दोनों के सबसे वरिष्ठ मार्गदर्शक के रूप में शरद पवार की ओर सभी की निगाहें टिक गई हैं।

    क्या होगा अजित पवार गुट का भविष्य?

    सबसे बड़ा और निर्णायक सवाल यही है कि अब अजित पवार की एनसीपी का रास्ता क्या होगा? क्या यह गुट स्वतंत्र पहचान बनाए रख पाएगा या फिर इतिहास खुद को दोहराते हुए दोनों एनसीपी का विलय होगा?

    महानगरपालिका चुनाव के दौरान पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में बीजेपी को हराने के लिए अजित पवार का शरद पवार के साथ आना कोई सामान्य राजनीतिक घटना नहीं थी। तभी से यह संकेत मिलने लगे थे कि दोनों गुटों के बीच जमी बर्फ पिघल रही है। खुद अजित पवार ने भी एक इंटरव्यू में यह स्वीकार किया था कि कार्यकर्ता एकजुटता चाहते हैं और सही समय पर बड़ा फैसला लिया जाएगा।
    अब वही “सही समय” नियति ने तय कर दिया है।

    41 विधायक, एक सांसद और सत्ता की चाबी

    फिलहाल अजित पवार गुट के पास महाराष्ट्र विधानसभा में 41 विधायक और लोकसभा में एक सांसद—सुनील तटकरे—हैं। यह संख्या किसी भी गठबंधन सरकार को बनाने या गिराने की ताकत रखती है। यही वजह है कि बीजेपी, शिंदे सेना और शरद पवार—तीनों खेमे इस गुट पर नज़र गड़ाए बैठे हैं।

    अगर दोनों गुटों का विलय होता है तो सत्ता समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। ऐसे में शरद पवार गुट के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल डिप्टी सीएम पद के प्रबल दावेदार के रूप में उभर सकते हैं। लेकिन यह राह आसान नहीं होगी। इसके लिए उन्हें प्रफुल पटेल और सुनील तटकरे जैसे कद्दावर नेताओं का भरोसा जीतना होगा—जो कभी अजित पवार के सबसे विश्वस्त सिपहसालार रहे हैं।

    पटेल–तटकरे–भुजबल: किंगमेकर की भूमिका

    अजित पवार के बाद उनके गुट में सबसे मजबूत स्तंभ प्रफुल पटेल और सुनील तटकरे हैं। दोनों नेताओं ने एनसीपी के विभाजन में निर्णायक भूमिका निभाई थी। अब वही नेता तय करेंगे कि पार्टी का भविष्य किस दिशा में जाएगा—शरद पवार की छांव में या बीजेपी के साथ सत्ता के केंद्र में।

    इसके अलावा छगन भुजबल जैसे अनुभवी नेता भी इस राजनीतिक शतरंज के अहम मोहरे हैं। उनका एक कदम कई समीकरणों को उलट सकता है।

    सुनेत्रा पवार की अग्निपरीक्षा

    अजित पवार के निधन के बाद सबसे कठिन परीक्षा उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार के सामने है। निजी शोक और राजनीतिक जिम्मेदारी—दोनों का बोझ एक साथ उठाना आसान नहीं होगा। राज्यसभा सांसद होने के नाते वे पहले ही संसद में मौजूद हैं, लेकिन अब उन्हें पार्टी की विरासत को संभालने का प्रस्ताव भी मिल सकता है।

    राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि बीजेपी सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम पद का प्रस्ताव दे सकती है। इससे एक ओर अजित समर्थकों में भावनात्मक जुड़ाव बना रहेगा, तो दूसरी ओर महायुति की स्थिरता भी सुनिश्चित होगी। साथ ही कैबिनेट में एक महिला चेहरे की एंट्री भी बीजेपी के लिए राजनीतिक रूप से लाभकारी हो सकती है। हालांकि इस पर अंतिम फैसला शिंदे सेना से विचार-विमर्श के बाद ही होगा।

    पार्थ और जय पवार: उत्तराधिकार का संकट

    अजित पवार के बड़े बेटे पार्थ पवार पहले ही जमीन घोटाले के आरोपों और 2019 की लोकसभा हार के चलते कमजोर स्थिति में हैं। ऐसे में उन्हें तत्काल बड़ी जिम्मेदारी मिलना मुश्किल माना जा रहा है। छोटे बेटे जय पवार राजनीति में अभी सक्रिय नहीं हैं।
    इस हालात में शरद पवार की भूमिका निर्णायक हो जाती है। माना जा रहा है कि उनकी सहमति और मार्गदर्शन के बिना पवार परिवार और एनसीपी का कोई भी बड़ा फैसला संभव नहीं है।

    अजित पवार का जाना केवल एक नेता का जाना नहीं है, बल्कि यह महाराष्ट्र की राजनीति में एक युगांतकारी क्षण है। आने वाले दिनों में तय होगा कि एनसीपी फिर से एकजुट होकर नई ताकत बनेगी या इतिहास के पन्नों में बिखर जाएगी। इतना तय है कि इस पूरे घटनाक्रम की धुरी—एक बार फिर—शरद पवार ही होंगे।

  • Mumbai Mayor Election: मेयर पद महिला के लिए आरक्षित होते ही बदले सियासी समीकरण

    Mumbai Mayor Election: मेयर पद महिला के लिए आरक्षित होते ही बदले सियासी समीकरण

    बीएमसी में भाजपा की छह महिला पार्षदें रेस में, तेजस्वी घोसालकर बाहर

    मुंबई। मुंबई महानगरपालिका (BMC) के मेयर पद के लिए लॉटरी सिस्टम से आरक्षण तय होते ही राजनीतिक तस्वीर साफ हो गई है। इस बार मेयर की कुर्सी महिला आरक्षण में जाने के बाद सत्ता समीकरण तेजी से बदल गए हैं। सत्तारूढ़ भाजपा के भीतर अब छह प्रमुख महिला पार्षदों के नामों पर गंभीर मंथन शुरू हो गया है, जिन्हें इस प्रतिष्ठित पद का दावेदार माना जा रहा है।

    लंबे समय से मेयर पद को लेकर जारी सस्पेंस उस वक्त खत्म हुआ जब आरक्षण प्रक्रिया में यह पद महिला के लिए सुरक्षित घोषित कर दिया गया। इसके साथ ही भाजपा खेमे में संभावित नामों को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया। हालांकि सबसे चौंकाने वाला घटनाक्रम यह रहा कि चुनाव नतीजों के बाद से मेयर पद के लिए सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे तेजस्वी घोसालकर अब इस दौड़ से बाहर हो गए हैं। घोसालकर ने चुनाव से ठीक पहले अविभाजित शिवसेना छोड़कर भाजपा का दामन थामा था और वार्ड नंबर 2 से जीत दर्ज की थी, लेकिन ताजा राजनीतिक समीकरणों में उनका नाम रेस से बाहर होना कई विश्लेषकों को हैरान कर रहा है।

    भाजपा की ओर से ये छह नाम चर्चा में

    महिला आरक्षण के बाद भाजपा में अब जिन छह महिला पार्षदों को मेयर पद के लिए सबसे आगे माना जा रहा है, उनमें से अलका केरकर (वार्ड 98): तीन बार की पार्षद और पूर्व उपमहापौर रह चुकी हैं। पार्टी के कोर ग्रुप में मजबूत पकड़ के कारण उन्हें सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है।

    हर्षिता नार्वेकर (वार्ड 225): महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर की रिश्तेदार होने के कारण राजनीतिक प्रभाव रखती हैं।

    रितू तावडे (वार्ड 132): पार्टी नेतृत्व का भरोसा इस नाम पर भी माना जा रहा है।

    राजश्री शिरवडकर (वार्ड 172): संगठन में सक्रिय भूमिका के चलते प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं।

    शीतल गंभीर (वार्ड 190): हालिया जीत के बाद उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है।

    आशा मराठे (वार्ड 152): जमीनी पकड़ और संगठनात्मक सक्रियता के कारण चर्चा में हैं।

    महायुति की मजबूत स्थिति

    बीएमसी चुनाव नतीजों में भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के गठबंधन महायुति ने शानदार प्रदर्शन किया है। 16 जनवरी को घोषित परिणामों में महायुति को कुल 118 सीटें मिलीं, जिनमें भाजपा के 89 और शिवसेना के 29 पार्षद शामिल हैं। बहुमत का यह आंकड़ा भाजपा को मेयर पद पर अपना उम्मीदवार बैठाने की मजबूत स्थिति में खड़ा करता है। वहीं उद्धव ठाकरे गुट को 65 सीटों पर संतोष करना पड़ा है।

    अब राजनीतिक हलकों की निगाहें दिल्ली और राज्य नेतृत्व पर टिकी हैं। देखना यह होगा कि इन छह महिला नामों में से किसके सिर पर मुंबई के मेयर का ताज सजता है।

  • Mumbai BMC News: मुंबई में शिवसेना कॉरपोरेटर्स के लिए विशेष ट्रेनिंग कैंप, एकनाथ शिंदे देंगे मार्गदर्शन

    आर. एस. नेटवर्क

    मुंबई | मुंबई महानगरपालिका चुनाव में जीत हासिल करने वाले शिवसेना के 29 नवनिर्वाचित कॉरपोरेटर्स के लिए मुंबई में एक विशेष ट्रेनिंग कैंप का आयोजन किया गया है। यह जानकारी युवा सेना के जनरल सेक्रेटरी और कॉरपोरेटर अमेय घोले ने दी।अमेय घोले ने बताया कि इस प्रशिक्षण शिविर के दौरान शिवसेना के मुख्य नेता और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे कॉरपोरेटर्स को मुंबई महानगरपालिका की कार्यप्रणाली, प्रमुख विकास योजनाओं और आगामी पांच वर्षों के रोडमैप पर विस्तृत मार्गदर्शन देंगे। इसके साथ ही पार्टी के वरिष्ठ नेता वार्ड स्तर पर प्रभावी ढंग से कार्य करने के तरीकों की भी जानकारी देंगे।यह तीन दिवसीय ट्रेनिंग कैंप मुंबई के होटल ताज लैंड्स एंड में आयोजित किया जा रहा है। घोले ने कहा कि चुनाव परिणाम घोषित होने के अगले ही दिन से शिवसेना के कॉरपोरेटर्स ने जनहित के कार्यों की शुरुआत कर दी है, ताकि जनता द्वारा जताए गए विश्वास पर खरा उतरा जा सके।उन्होंने यह भी बताया कि राज्यभर में शिवसेना के कुल 397 कॉरपोरेटर्स निर्वाचित हुए हैं, जो मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में जनता के भरोसे और पार्टी की बढ़ती ताकत को दर्शाता है।मुंबई के महापौर पद को लेकर घोले ने स्पष्ट किया कि यह पद ग्रैंड अलायंस के खाते में जाएगा और इस संबंध में अंतिम निर्णय पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा।

  • Fraud Voter Name 2026: कालबादेवी के रामवाड़ी में मतदाता सूची में बड़ा फर्जीवाड़ा, एक व्यक्ति के दो नाम और दो फोटो से मचा हड़कंप

    मतदाता सूची में गड़बड़ी पर विपक्ष सख्त हो, चुप्पी टूटी नहीं तो लोकतंत्र पर खतरा: पार्टियों को चेतावनी

    आर.एस. नेटवर्क। अश्विनीकुमार

    मुंबई | कालबादेवी के रामवाड़ी स्थित प्रभु सुंदर बिल्डिंग, वार्ड क्रमांक 222 में मतदाता सूची को लेकर सामने आई गंभीर अनियमितताओं ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आरोप है कि एक ही व्यक्ति के दो अलग-अलग नाम और दो अलग-अलग फोटो के आधार पर दो मतदाता दर्ज किए गए हैं। इस खुलासे के बाद पूरे इलाके में राजनीतिक हलचल मच गई है और नागरिकों में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है।


    स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह महज़ प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से किया गया खेल प्रतीत होता है, जिसका सीधा असर चुनाव परिणामों पर पड़ सकता है। प्रभु सुंदर बिल्डिंग में रहने वाले एक व्यक्ति, जिसका नाम बदले हुए रूप में रुद्रेश बताया जा रहा है, से इलाके के लोगों की नियमित मुलाकात होती रहती है। रविवार को जब कुछ नागरिक उनके घर पहुंचे, तो जानकारी मिली कि भाजपा उम्मीदवार रीता मकवाना की ओर से मतदाता पर्चियों का वितरण किया जा रहा था। संबंधित बिल्डिंग के लिए कुल चार शीट की मतदाता पर्चियां तैयार की गई थीं।


    जब इन शीट्स की गहन जांच की गई, तो चौंकाने वाली गड़बड़ियां सामने आईं। एक ही व्यक्ति का नाम दो अलग-अलग स्थानों पर दर्ज पाया गया। एक जगह पिता के नाम की जगह मां का नाम दर्ज था, तो दूसरी जगह पिता का नाम लिखा गया था। इतना ही नहीं, एक स्थान पर कमरे का नंबर 61 दर्शाया गया, जबकि दूसरी जगह वही व्यक्ति कमरे नंबर 6 में दर्ज मिला। दोनों प्रविष्टियों में अलग-अलग फोटो लगाए गए थे, जिससे दो अलग मतदाताओं का आभास पैदा किया गया।


    स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इस प्रकार की त्रुटियां यह साफ़ संकेत देती हैं कि मतदाता सूची तैयार करने में या तो घोर लापरवाही बरती गई है या फिर जानबूझकर गड़बड़ी की गई है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जिस मतदाता सूची के निर्माण पर चुनाव आयोग करोड़ों रुपये खर्च करता है, उसमें ऐसी गंभीर चूक कैसे संभव है। लोगों को आशंका है कि यह मामला केवल इसी एक बिल्डिंग तक सीमित नहीं, बल्कि शहर के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के फर्जी और डुप्लिकेट मतदाता तैयार किए गए हो सकते हैं।
    इस प्रकरण के सामने आने के बाद विपक्षी दलों कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और वंचित बहुजन आघाड़ी से तत्काल और आक्रामक भूमिका निभाने की मांग तेज़ हो गई है। नागरिकों का कहना है कि यदि अब भी विपक्ष चुप्पी साधे रहता है, तो आने वाले चुनावों में लोकतंत्र के साथ बड़ा खिलवाड़ होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
    स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि फर्जी आधार कार्ड के सहारे फर्जी मतदान कराया जा सकता है और अलग-अलग इमारतों में इस तरह के डुप्लिकेट मतदाता खड़े किए जा सकते हैं। नागरिकों ने चुनाव आयोग से मांग की है कि तत्काल आधार कार्ड की सत्यता जांचने के लिए सख्त और पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए, ताकि डुप्लिकेट और फर्जी आधार के जरिए किसी अन्य के नाम पर मतदान कराने की साजिश को समय रहते रोका जा सके।
    यह मामला न केवल सत्ताधारी दलों के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहा है, बल्कि चुनाव आयोग(Mumbai Election 2026) की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है। यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो यह मामला आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक तूफान बन सकता है।

  • Mahanagar Palika 2026: ‘सात संकल्प, नई शुरुआत’, पिंपरी-चिंचवड़ के लिए अजित पवार का घोषणापत्र जारी

    Mahanagar Palika 2026: ‘सात संकल्प, नई शुरुआत’, पिंपरी-चिंचवड़ के लिए अजित पवार का घोषणापत्र जारी

    पिंपरी-चिंचवड़: नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री अजितदादा पवार ने पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका चुनाव के लिए पार्टी का घोषणापत्र ‘सात संकल्प, एक नई शुरुआत’ के नारे के साथ जारी किया। इस घोषणापत्र में शहर की बुनियादी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए विकास का स्पष्ट रोडमैप पेश किया गया है।

    घोषणापत्र में रोज़ाना जलापूर्ति, बेहतर सड़कें, ट्रैफिक प्रबंधन, स्वच्छता, स्वास्थ्य, शिक्षा और पारदर्शी विकास योजना जैसे मुद्दों पर ठोस वादे किए गए हैं। पार्टी का दावा है कि यह घोषणापत्र छह महीने के ऑन-ग्राउंड सर्वे, वार्ड-स्तरीय संवाद और नागरिकों से सीधी बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। इस दौरान नागरिकों की प्रमुख मांगों नियमित पानी की आपूर्ति, तेज़ और सुरक्षित परिवहन, स्वच्छ वातावरण, सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं और प्रत्यक्ष आर्थिक राहत को घोषणापत्र में प्राथमिकता दी गई है।

    सात प्रमुख संकल्प

    • रोज़ाना स्वच्छ जलापूर्ति
      हर घर में तय समय पर हाई-प्रेशर नल से पानी, टैंकर निर्भरता खत्म करना, लीकेज-फ्री पाइपलाइन, नदियों का पुनर्जीवन और बाढ़ नियंत्रण के उपाय।
    • ट्रैफिक-फ्री और गड्ढा-मुक्त पीसीएमसी
      सड़कों की समयबद्ध मरम्मत, गुणवत्ता की ज़िम्मेदारी ठेकेदारों पर, डिजिटल शिकायत प्रणाली, मेट्रो रूट और फ्लाईओवर परियोजनाओं की पारदर्शी निगरानी।
    • देश का सबसे स्वच्छ शहर
      100% कचरा पृथक्करण, वैज्ञानिक निपटान, ज़ीरो लैंडफिल और स्वच्छता के लिए हाउसिंग सोसाइटियों की सक्रिय भागीदारी।
    • सस्ते और हाई-टेक हेल्थकेयर सेंटर
      बड़े अस्पताल, नए मेडिकल संस्थान, 100 सब-अर्बन क्लिनिक, किफायती जांच और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए मजबूत स्वास्थ्य सुविधाएं।
      -पारदर्शी विकास योजना (DP)
      मौजूदा ड्राफ्ट डीपी को रद्द कर नागरिकों की भागीदारी से नई योजना, कानूनी घरों की सुरक्षा और विस्थापन के बजाय पुनर्वास पर ज़ोर।
    • पीसीएमसी मॉडल स्कूल
      100 आधुनिक नगर निगम स्कूल-राष्ट्रीय मानकों की शिक्षा, आधुनिक उपकरण, प्रशिक्षित शिक्षक और निःशुल्क सुविधाएं।
      -सीधी राहत और ज़िम्मेदार शासन
      मुफ़्त मेट्रो-बस यात्रा, छोटे घर मालिकों को प्रॉपर्टी टैक्स में छूट, छात्रों को टैबलेट, महिलाओं के लिए बिना ब्याज ऋण योजना तथा खेल-संस्कृति को प्रोत्साहन।

    -एक्शन-ओरिएंटेड विज़न डॉक्यूमेंट
    अजित पवार ने कहा कि ये सात संकल्प छत्रपति शिवाजी महाराज के लोककल्याणकारी शासन, छत्रपति शाहू महाराज के सामाजिक न्याय, महात्मा फुले के शिक्षा-समानता के विचार और डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के समता सिद्धांत से प्रेरित हैं। बढ़ती महंगाई और आर्थिक दबावों के बीच यह घोषणापत्र नागरिकों को सीधी राहत, मजबूत बुनियादी ढांचा और आत्मनिर्भर शहर की दिशा में ले जाने का संकल्प दर्शाता है। एनसीपी का यह घोषणापत्र नारों से अधिक एक्शन-ओरिएंटेड विज़न डॉक्यूमेंट के रूप में पेश किया गया है।

  • MUSLIM-HINDU: कांग्रेस राम-विरोधी और उबाठा मुस्लिम वोटों के लिए उर्दू में प्रचार कर रही है: संजय निरुपम

    MUSLIM-HINDU: कांग्रेस राम-विरोधी और उबाठा मुस्लिम वोटों के लिए उर्दू में प्रचार कर रही है: संजय निरुपम

    मुंबई। शिवसेना नेता संजय निरुपम(Sanjay Nirupam) ने कांग्रेस और उद्धव ठाकरे गुट (उबाठा) (UBT Shiv Sena) पर जोरदार हमला बोला है। नाना पटोले (Nana Patole) द्वारा राहुल गांधी(Rahul Gandhi) की तुलना भगवान राम से किए जाने पर निरुपम ने कांग्रेस को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि कांग्रेस की पहचान शुरू से ही राम-विरोधी रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाए और आज तक अयोध्या में बने राम मंदिर में दर्शन तक नहीं किए।

    संजय निरुपम ने कहा, “कांग्रेस के नेता खुद को राम के आदर्शों से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि वे रावण के अनुयायी रहे हैं। अगर नाना पटोले का दावा है कि राहुल गांधी भगवान राम के आदर्शों के अनुसार दबे-कुचले लोगों के लिए काम कर रहे हैं, तो फिर हर दो महीने में वे कोलंबिया, पेरू, इटली, लंदन और थाईलैंड क्यों जाते हैं? आखिर यह किस तरह का जनसेवा कार्य है?”

    निरुपम ने उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना पर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जिस शिवसेना की स्थापना हिंदूहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे ने की थी और जो हमेशा हिंदी, हिंदू और हिंदुस्तान के विचारों के साथ मजबूती से खड़ी रही, आज वही पार्टी मुस्लिम वोट बैंक के लिए अपनी मूल पहचान से भटकती नजर आ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि उबाठा गुट प्रचार में हिंदी और मराठी को छोड़कर उर्दू भाषा का इस्तेमाल कर रहा है।

    संजय निरुपम ने आगे कहा कि उद्धव ठाकरे गुट जिहादी सोच रखने वालों के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है और उन्हें अपनी पार्टी में शामिल कर रहा है। यह इस गुट की असलियत को उजागर करता है और शिवसेना की मूल विचारधारा से पूरी तरह अलग है।

    मुंबई महानगरपालिका (मनपा) चुनाव को लेकर निरुपम ने दावा किया कि मुंबई का अगला मेयर मराठी मानुस होगा और वह छत्रपति शिवाजी महाराज के विचारों से प्रेरित होगा। उन्होंने कहा कि मुंबई की मराठी जनता ही अंतिम फैसला करेगी और किसी भी तरह की तुष्टिकरण की राजनीति को नकार देगी।

    इसके अलावा संजय निरुपम ने बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों को देखते हुए शाहरुख खान को अपनी टीम में बांग्लादेशी खिलाड़ी शामिल नहीं करने चाहिए। निरुपम के इस बयान ने राजनीतिक के साथ-साथ फिल्मी हलकों में भी चर्चा तेज कर दी है।

    कुल मिलाकर संजय निरुपम के इन बयानों से महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सियासी तापमान बढ़ गया है और आगामी मनपा चुनावों से पहले आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।