Category: Politics

Politics is the art of looking for trouble, finding it everywhere, diagnosing it incorrectly and applying the wrong remedies.

  • Mumbai News : मुंबई से बांग्लादेशियों को बाहर करने के बयान पर मचा सियासी घमासान, रितू तावडे के बयान पर संजय राउत का पलटवार

    Mumbai News : मुंबई से बांग्लादेशियों को बाहर करने के बयान पर मचा सियासी घमासान, रितू तावडे के बयान पर संजय राउत का पलटवार

    क्या मोदी सरकार ने बांग्लादेश में टूटे हिंदू मंदिरों के पुनर्निर्माण के लिए करोड़ों की मदद दी?:शिवसेना (यूबीटी)

    मुंबई। मुंबई महानगरपालिका के महापौर (Mumbai Mayor) पद के लिए भाजपा ने रितू तावडे को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। 11 फरवरी को होने वाले महापौर चुनाव में उनके निर्विरोध चुने जाने की संभावना जताई जा रही है। उम्मीदवार घोषित होने के साथ ही रितू तावडे के एक बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है, जिस पर शिवसेना (उद्धव गुट) के सांसद संजय राउत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

    रितू तावडे ने कहा है कि वे मुंबई के हर नागरिक के लिए काम करना चाहती हैं। उनका दावा है कि मुंबईकर टैक्स (Mumbaikar Tax) देने वाला, जागरूक और संवेदनशील नागरिक है, लेकिन आज उसे फुटपाथ और सड़कों पर चलने तक की पर्याप्त जगह नहीं मिल पा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि शहर में फुटपाथ और सड़कों पर अतिक्रमण की बड़ी वजह बांग्लादेशी और रोहिंग्या हैं। तावडे के मुताबिक, यदि मुंबई को सुरक्षित रखना है, तो इन लोगों को शहर से बाहर करना उनकी प्राथमिकता होगी।

    इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कटाक्ष किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने बांग्लादेश में तोड़े गए हिंदू मंदिरों को बनाने के लिए सीधे “केंद्र सरकार की तरफ से करोड़ों रुपये की सहायता” देने का कोई आधिकारिक प्रावधान यूनियन बजट 2026-27 में नहीं किया है।

    वास्तव में, इस बजट में भारत ने बांग्लादेश को दी जाने वाली विदेशी मदद की राशि पहले के 120 करोड़ रुपये से घटाकर लगभग 60 करोड़ रुपये कर दी है, जो पिछले साल की तुलना में आधी है। यह बजट प्रावधान बांग्लादेश की सहायता के सामान्य विदेशी विकास सहयोग के रूप में है और उसमें किसी विशिष्ट धार्मिक स्थल की मरम्मत या मंदिर निर्माण जैसे प्रोजेक्ट का उल्लेख नहीं है। इस सहायता कटौती को दोनों देशों के बीच रिश्तों में तनाव और वहां चल रही अन्य परिस्थितियों के बीच एक आर्थिक निर्णय के रूप में देखा जा रहा है।

    महापौर चुनाव से पहले इस बयानबाज़ी ने मुंबई की राजनीति को गरमा दिया है। जहां भाजपा शहर की सुरक्षा और अतिक्रमण को बड़ा मुद्दा बना रही है, वहीं विपक्ष इस मुद्दे को केंद्र सरकार की नीतियों से जोड़ते हुए भाजपा पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगा रहा है।

  • Maharashtra Politics: विधान परिषद की जंग में उद्धव ठाकरे की अग्निपरीक्षा, महायुति के आगे MVA की रणनीति होगी निर्णायक

    Maharashtra Politics: विधान परिषद की जंग में उद्धव ठाकरे की अग्निपरीक्षा, महायुति के आगे MVA की रणनीति होगी निर्णायक

    मुंबई(Mumbai) में एक बार फिर सत्ता संतुलन की लड़ाई तेज हो गई है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे सहित विधान परिषद के नौ सदस्यों का कार्यकाल समाप्ति की ओर है। ऐसे में सबसे बड़ा राजनीतिक(Political) सवाल यही है कि क्या उद्धव ठाकरे दोबारा विधान परिषद का टिकट हासिल कर पाएंगे या नहीं। बदले हुए संख्याबल ने महाविकास आघाड़ी (MVA) के सामने मुश्किलें खड़ी कर दी हैं, जबकि भाजपा-महायुति मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है।

    मई 2020 में जिन नौ नेताओं को निर्विरोध(unopposed) विधान परिषद में भेजा गया था, उस समय राजनीतिक समीकरण अलग थे। तब MVA को पांच और भाजपा को चार सीटें मिली थीं। अब तस्वीर उलट है। विधानसभा में महायुति के पास करीब 235 विधायकों का संख्याबल है, जबकि MVA के पास माकपा और शेकाप को मिलाकर मात्र 48 विधायक हैं। दो सीटें रिक्त हैं और यदि मई से पहले इन पर उपचुनाव हो जाता है, तो सभी 288 विधायक विधान परिषद चुनाव में वोट डालेंगे।

    विधान परिषद चुनाव से पहले सात सीटों के लिए राज्यसभा चुनाव होना है। संख्याबल के हिसाब से MVA को एक ही राज्यसभा सीट मिलने की संभावना है। ऐसे में तय माना जा रहा है कि गठबंधन के भीतर सीटों को लेकर समझौता करना पड़ेगा—एक दल को राज्यसभा और दूसरे को विधान परिषद से संतोष करना होगा।

    भाजपा के लिए भी यह चुनाव आसान नहीं है। मौजूदा चार विधान परिषद सदस्यों में से तीन अब विधानसभा में पहुंच चुके हैं, जिससे नए चेहरों को मौका देने का दबाव बढ़ेगा। वहीं, सोलापुर की राजनीति में हुए हालिया घटनाक्रम के बाद रणजीतसिंह मोहिते पाटील को लेकर भाजपा का फैसला राजनीतिक संकेत देने वाला होगा।

    उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद छोड़ते समय विधान परिषद से इस्तीफा देने की घोषणा जरूर की थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। अब सवाल यह है कि क्या वे स्वयं फिर से विधान परिषद जाने के इच्छुक हैं और क्या MVA उनके नाम पर सहमति बना पाएगी। यदि उद्धवसेना राज्यसभा की सीट पर कांग्रेस या शरद पवार गुट के उम्मीदवार को समर्थन देती है, तो इसे उद्धव ठाकरे के विधान परिषद जाने का स्पष्ट संकेत माना जाएगा।

    आने वाले दिनों में राज्यसभा और विधान परिषद दोनों चुनावों ने महाराष्ट्र की राजनीति को निर्णायक मोड़ पर ला खड़ा किया है। समझौते, रणनीति और उम्मीदवार चयन—तीनों मोर्चों पर फैसले तय करेंगे कि सत्ता संतुलन किसके पक्ष में झुकेगा।

  • Mayor Election 2026: भिवंडी के पूर्व महापौर विलास पाटील को मिली अंतरिम जमानत; महापौर चुनाव में नया मोड़

    Mayor Election 2026: भिवंडी के पूर्व महापौर विलास पाटील को मिली अंतरिम जमानत; महापौर चुनाव में नया मोड़

    भिवंडी: कोणार्क विकास अघाड़ी के पूर्व महापौर विलास पाटील और उनके बेटे पार्षद मयूरेश पाटील को शनिवार को भिवंडी कोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई है। जमानत मिलने के बाद महापौर पद के चुनाव (Mayor Election) में प्रतिस्पर्धा और भी तेज हो गई है।

    भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका चुनाव के बाद कोणार्क विकास अघाड़ी के पूर्व महापौर विलास पाटील और भाजपा विधायक महेश चौगुले के समर्थकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस मामले में निजामपुरा पुलिस स्टेशन में दोनों गुटों के लगभग 51 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इस एफआईआर में विलास पाटील और उनके बेटे मयूरेश पाटील का नाम भी शामिल था।

    शनिवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने विलास पाटील और मयूरेश पाटील को राहत देते हुए उनकी अग्रिम जमानत मंजूर कर ली। इनके साथ ही कोणार्क विकास अघाड़ी के कुल 23 लोगों को जमानत मिली। वहीं, भाजपा विधायक के 3 समर्थकों को भी जमानत मिली। कुल मिलाकर 26 लोगों को भिवंडी कोर्ट से राहत मिली है।

    इस बीच, शुक्रवार को भाजपा की ओर से नारायण चौधरी के नाम की आधिकारिक घोषणा महापौर पद के लिए की गई थी। हालांकि, इस घोषणा के बाद भाजपा पार्षद और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल पाटील के भतीजे सुमित पाटील ने अपनी नाराजगी जाहिर की, जिससे पार्टी में दो गुट बन गए हैं।

    विलास पाटील के चुनावी मैदान में सक्रिय होने और भाजपा के आंतरिक मतभेदों के कारण महापौर पद की जंग काफी दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण हो गई है। इससे पहले कोणार्क विकास अघाड़ी ने सिर्फ़ छह सीटें होने के बावजूद कांग्रेस में फूट डालकर महापौर पद पर कब्ज़ा किया था। अब अग्रिम जमानत मिलने के बाद पार्टी की बढ़ती सक्रियता और शहर में मची आपसी कलह का फायदा उठाकर समीकरण बदल सकती है, जो शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • The Freedom Trail Mumbai: मुंबई का फ्रीडम ट्रेल खुद आज़ादी को तरस रहा, आज़ादी के रास्ते पर हॉकर्स का कब्ज़ा

    The Freedom Trail Mumbai: मुंबई का फ्रीडम ट्रेल खुद आज़ादी को तरस रहा, आज़ादी के रास्ते पर हॉकर्स का कब्ज़ा

    मुंबई। भारत की आज़ादी की कहानी को ज़मीन पर उतारने वाला मुंबई का ‘फ्रीडम ट्रेल’(Mumbai Freedom Trail) आज खुद बेबसी की तस्वीर बन चुका है। जिस ऐतिहासिक पैदल मार्ग को देश के स्वतंत्रता संग्राम, खासकर अगस्त क्रांति मैदान (ग्वालिया टैंक) से जुड़े Quit India Movement की स्मृति को संजोने के लिए विकसित किया गया था, वही ट्रेल आज हॉकर्स, अतिक्रमण और अव्यवस्था का शिकार है।

    आजादी के नायकों की विरासत को दर्शाने वाला यह क्यूरेटेड वॉकिंग रूट आज भी हॉकर्स से आज़ाद नहीं हो पाया है। जगह-जगह ठेले, अस्थायी दुकानें और अवैध कब्ज़े न सिर्फ पैदल यात्रियों की राह रोक रहे हैं, बल्कि इस ऐतिहासिक धरोहर की गरिमा पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं।

    विडंबना यह है कि जिस रास्ते ने देश को “अंग्रेज़ों भारत छोड़ो” का नारा दिया, उसी रास्ते पर आज नागरिकों को चलने की आज़ादी तक नहीं मिल रही। पर्यटक, इतिहास प्रेमी और स्थानीय नागरिक—सभी को संकरे रास्तों, भीड़ और गंदगी से जूझना पड़ता है। सूचना पट्टिकाएं, विरासत चिन्ह और गाइडेड साइनबोर्ड कई जगह हॉकर्स के पीछे छिप चुके हैं।

    नगर निगम और प्रशासन ने फ्रीडम ट्रेल को सांस्कृतिक और पर्यटन विरासत के रूप में विकसित करने के बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों को आईना दिखा रही है। सवाल यह है कि जब मुंबई स्मार्ट सिटी, हेरिटेज सिटी और टूरिज़्म हब बनने की बात करती है, तो क्या उसकी आज़ादी की सबसे बड़ी कहानी को यूं ही अतिक्रमण के हवाले छोड़ दिया जाएगा?

    आज ज़रूरत इस बात की है कि फ्रीडम ट्रेल को सिर्फ इतिहास की निशानी नहीं, बल्कि सच में ‘फ्री’ बनाया जाए।

    अगर यही हाल रहा, तो आने वाली पीढ़ियां आज़ादी की कहानी किताबों में पढ़ेंगी—और मुंबई में उसका रास्ता तलाशती रह जाएंगी।

  • PM E-Bus Service Scheme:महाराष्ट्र में पीएम-ई-बस सेवा योजना कागज़ों तक सीमित, एक भी ई-बस सड़क पर नहीं उतरी: सांसद वर्षा गायकवाड़

    PM E-Bus Service Scheme:महाराष्ट्र में पीएम-ई-बस सेवा योजना कागज़ों तक सीमित, एक भी ई-बस सड़क पर नहीं उतरी: सांसद वर्षा गायकवाड़

    मुंबई। केंद्र की मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना (PM E-Bus Service Scheme) महाराष्ट्र में अब तक केवल कागज़ों तक ही सीमित दिखाई दे रही है। इस योजना के तहत राज्य के 22 शहरों के लिए 1,609 इलेक्ट्रिक बसों को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 1,411 बसों के लिए टेंडर भी जारी हो चुके हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक एक भी ई-बस प्रत्यक्ष सेवा में शामिल नहीं हुई है।

    यह जानकारी कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ द्वारा लोकसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने दी है। सांसद वर्षा गायकवाड़ ने महाराष्ट्र में पीएम-ई-बस सेवा योजना के वास्तविक क्रियान्वयन को लेकर सरकार को घेरा और योजना की प्रगति पर गंभीर सवाल उठाए।

    उन्होंने पूछा कि महाराष्ट्र में इस योजना के अंतर्गत कितने शहर शामिल हैं, कितनी इलेक्ट्रिक बसों को अब तक मंजूरी दी गई है, कितनी बसों के लिए निविदाएं निकाली गई हैं और कितनी बसें वास्तव में सेवा में आई हैं। साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या केंद्र सरकार ने राज्य में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, बस डिपो की तैयारी और बिजली की उपलब्धता की पर्याप्त समीक्षा की है या नहीं, और इस योजना से यात्रियों को वास्तविक रूप से क्या लाभ मिलने वाला है।

    केंद्र सरकार की ओर से नगर विकास मंत्रालय ने लिखित जवाब में बताया कि पीएम-ई-बस सेवा योजना के तहत ‘बिहाइंड-द-मीटर’ (BTM) इलेक्ट्रिकल और सिविल डिपो इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए 370.49 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इनमें से अब तक 200.18 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं।

    मंत्रालय के अनुसार, इस योजना के तहत प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन कमेटी (PMEC) और सेंट्रल स्टियरिंग एंड अप्रूवल कमेटी (CSAC) के माध्यम से राज्यों द्वारा भेजे गए प्रस्तावों का मूल्यांकन किया जाता है। पीएम-ई-बस सेवा योजना का उद्देश्य देश के 100 से अधिक शहरों में 10,000 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें शुरू करना है, ताकि शहरी परिवहन को स्वच्छ, स्मार्ट और समावेशी बनाया जा सके।

    इस योजना में 3 से 40 लाख आबादी वाले शहरों, 3 लाख से कम आबादी वाले राज्यों की राजधानियों तथा पूर्वोत्तर और पर्वतीय क्षेत्रों की राजधानियों को शामिल किया गया है। सरकार का दावा है कि इससे छोटे शहरों और उन इलाकों में रहने वाले यात्रियों को बड़ा लाभ मिलेगा, जहां संगठित बस सेवा उपलब्ध नहीं है।

    हालांकि, सांसद वर्षा गायकवाड़ ने महाराष्ट्र में अब तक एक भी ई-बस के सेवा में न आने को लेकर योजना के जमीनी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े किए हैं और इसे सरकार की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न बताया है।

  • Mahatma Jyotiba Phule : तेलंगाना में महात्मा फुले की प्रतिमा तोड़ने की कोशिश निंदनीय, मनुवादी भाजपा का कड़ा विरोध: सचिन सावंत

    Mahatma Jyotiba Phule : तेलंगाना में महात्मा फुले की प्रतिमा तोड़ने की कोशिश निंदनीय, मनुवादी भाजपा का कड़ा विरोध: सचिन सावंत

    हैदराबाद/मुंबई।
    कांग्रेस नेता और तेलंगाना प्रभारी सचिन सावंत ने तेलंगाना के तेल्लापूर इलाके में महात्मा ज्योतिबा फुले(Mahatma Jyotiba Phule) की प्रतिमा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे भाजपा की “अत्यंत विषाक्त राजनीति” करार देते हुए इस कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा की है।

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (ट्विटर) पर जारी बयान में सचिन सावंत ने कहा कि जिस तरह भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा महात्मा फुले की प्रतिमा तोड़ने का प्रयास किया गया, वह पूरी तरह से निषेधार्ह और शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि महात्मा ज्योतिबा फुले वही महान समाज सुधारक हैं जिन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज को ‘कुळवाडी भूषण’ की उपाधि दी और उनकी ऐतिहासिक समाधि की खोज का कार्य किया।

    सचिन सावंत ने आरोप लगाया कि भाजपा एक तरफ छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर राजनीति करती है, वहीं दूसरी तरफ महात्मा फुले के विचारों और प्रतीकों का विरोध कर रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “ज्योतिबा फुले को शिवरायों से अलग नहीं किया जा सकता। जो लोग यह कोशिश कर रहे हैं, उन्हें न तो शिवराय समझ आए हैं और न ही फुले का विचार।”

    कांग्रेस नेता ने भाजपा को मनुवादी सोच वाली पार्टी बताते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं सामाजिक समरसता और महापुरुषों के सम्मान पर सीधा हमला हैं। उन्होंने भाजपा की इस मानसिकता का खुला और सार्वजनिक विरोध करने का आह्वान किया।

  • Pakistan v/s Baloochistan: पाकिस्तान के बलूचिस्तान में BLA और सेना के बीच बड़े पैमाने पर झड़पें, 10 सैनिकों की मौत

    Pakistan v/s Baloochistan: पाकिस्तान के बलूचिस्तान में BLA और सेना के बीच बड़े पैमाने पर झड़पें, 10 सैनिकों की मौत

    इस्लामाबाद: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में सेना और विद्रोहियों के बीच बड़े पैमाने पर संघर्ष शुरू हो गया है। विद्रोही गुट बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने ऑपरेशन हेरोफ शुरू करते हुए पाकिस्तानी सेना के ठिकानों को निशाना बनाया। शनिवार तड़के से बलूचिस्तान के कई जिलों में धमाके, मिलिट्री ठिकानों पर हमले और झड़पों की खबरें मिल रही हैं।

    बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा में विस्फोट हुए हैं, वहीं ग्वादर पोर्ट के पास भी फायरिंग हुई। इन हमलों में कम से कम 10 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं।

    BLA के शीर्ष कमांडरों ने ऑपरेशन हेरोफ का दूसरा चरण शुरू करने की घोषणा की है। गुट ने इसे मातृभूमि की रक्षा के लिए अभियान बताया। क्वेटा, नुश्की, कलात, मस्तंग, दलबांदिन, खारान, ग्वादर, पसनी, टंप और बुलेदा में भारी गोलीबारी, विस्फोट और सैन्य ठिकानों पर हमले किए गए।

    क्वेटा में हथियारबंद लोगों ने पुलिस मोबाइल पर हमला किया, जिसमें दो पुलिसकर्मी मारे गए और पुलिस वाहन में आग लगा दी। रेलवे स्टेशन के पास भी गोलीबारी हुई। नुश्की में फ्रंटियर कॉर्प्स मुख्यालय के पास झड़प हुई, जबकि कलात में सेना के कैंप के गेट पर विस्फोटक वाहन का उपयोग किया गया।

    BLA के प्रवक्ता जीयांद बलूच ने कहा कि उनके लड़ाकों ने सैन्य और प्रशासनिक ढांचों को निशाना बनाया। BLA के कमांडर-इन-चीफ बशीर जेब बलूच ने बलूच लोगों से अपील की कि वे अपनी घरों से बाहर निकलें और पाकिस्तानी सेना के खिलाफ लड़ें।

    पाकिस्तान के प्रमुख अखबार द डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार तड़के से चल रही झड़पों में कई हमलों को नाकाम किया गया और सुरक्षा बलों ने 58 आतंकियों को मार गिराया। इस संघर्ष में 10 सैनिकों की मौत की पुष्टि की गई है।

  • Congress 2026: भाजपा पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाळ का हमला, कहा – सत्ता के अहंकार में समाज में नफरत फैलाने का काम कर रही है भारतीय जनता पार्टी

    Congress 2026: भाजपा पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाळ का हमला, कहा – सत्ता के अहंकार में समाज में नफरत फैलाने का काम कर रही है भारतीय जनता पार्टी

    मुंबई: महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाळ ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी सत्ते के लिए समाज में जाति और धर्म के नाम पर भांडने कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा केवल हिंदू-मुस्लिम विवाद तक सीमित नहीं रही, बल्कि मराठा, ओबीसी, आदिवासी और दलित समाज में भी भड़के पैदा कर महाराष्ट्र के सामाजिक एकता को बिगाड़ने का काम कर रही है।

    सपकाळ ने छत्रपती संभाजीनगर जिले के लाडसावंगी, गणोरी, बाजार सावंगी और नागव में जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव के लिए आयोजित प्रचार सभाओं में यह बयान दिया। इस अवसर पर जालना के सांसद डॉ. कल्याण काळे, कांग्रेस सेवादल के प्रदेशाध्यक्ष विलास औताडे, जिला अध्यक्ष किरण पाटील डोणगावकर, प्रदेश सचिव सुदामराव मते, शिवसेना उपजिल्हाप्रमुख जगन्नाथराव पवार, फुलंब्री नगराध्यक्ष राजेंद्र ठोंबरे सहित कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता उपस्थित थे।

    सपकाळ ने कहा कि भाजपा सरकार देश की लोकतंत्र और संविधान को कमजोर करने का काम कर रही है। विपक्षी दलों को खत्म करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव में पैसे की बर्बादी और धमकियों का खेल चल रहा है, और चुनाव आयोग भी सत्ताधारी पार्टी के पक्ष में काम कर रहा है। बावजूद इसके, कांग्रेस जनता के हित, लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए संघर्ष कर रही है।

    सपकाळ ने जनता से अपील की कि नगरपालिका और महानगरपालिका चुनावों में कांग्रेस को मिली सफलता को जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों में भी दोहराएं। उन्होंने कहा कि भाजपा को किसान, महिला, कामगार और युवाओं की समस्याएं दिखाई नहीं देतीं। किसानों की आत्महत्याएं बढ़ रही हैं, फसल के सही दाम नहीं मिल रहे हैं, युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा है और महंगाई चरम पर है। इसके बावजूद भाजपा सामाजिक तेढ फैलाकर जनता का ध्यान भटका रही है।

    सपकाळ ने कहा, “भारतीय जनता पार्टी का यह चालाकी भरा खेल जनता पहचानें और चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवारों को विजयी बनाएं।”

  • Talent Hunt 2026: कांग्रेस ने शुरू किया ‘प्रतिभा खोज’ अभियान, विशेषज्ञों को मिलेगा पार्टी में जुड़ने का अवसर

    Talent Hunt 2026: कांग्रेस ने शुरू किया ‘प्रतिभा खोज’ अभियान, विशेषज्ञों को मिलेगा पार्टी में जुड़ने का अवसर

    मुंबई: अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने नई और विशेषज्ञ प्रतिभाओं को अवसर देने के उद्देश्य से ‘प्रतिभा खोज’ अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत देशभर के विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को कांग्रेस पार्टी में काम करने का मंच उपलब्ध कराया जाएगा। यह जानकारी कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व विधायक हरि शंकर गुप्ता ने पत्रकार परिषद में दी।

    हरि शंकर गुप्ता ने बताया कि यह अभियान तीन चरणों में आयोजित किया जाएगा। पहले चरण में ऑनलाइन आवेदन 15 फरवरी तक स्वीकार किए जाएंगे। इसके बाद इन आवेदनों की छानबीन की जाएगी और वरिष्ठ नेताओं, अनुभवी पत्रकारों और समाज के विशेषज्ञों की समिति द्वारा प्रत्यक्ष साक्षात्कार लिया जाएगा। साक्षात्कार के आधार पर अंतिम चयन किया जाएगा।

    गुप्ता ने कहा कि इस अभियान से चयनित लोगों को कांग्रेस पार्टी के साथ काम करने का मौका मिलेगा। उन्हें प्रवक्ता, सोशल मीडिया और शोध कार्यों में योगदान देने का अवसर मिलेगा। इसका मुख्य उद्देश्य कांग्रेस पार्टी की विचारधारा को देशभर में पहुंचाना और पार्टी में नए, ताजगी भरे चेहरों को जोड़ना है।

    मुंबई कांग्रेस के प्रवक्ता सुरेशचंद्र राजहंस ने बताया कि मुंबई कांग्रेस अध्यक्षा वर्षाताई गायकवाड़ के नेतृत्व में टैलेंट हंट कमिटी बनाई गई है। इस कार्यक्रम को सफल बनाने और सभी जिलों में समन्वय स्थापित करने का काम कमिटी द्वारा किया जाएगा। राजहंस ने कहा कि यह अभियान कांग्रेस संगठन को मजबूत बनाने और पार्टी के विचारों को व्यापक स्तर पर पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

    इस अवसर पर मुंबई कांग्रेस के अन्य नेता निजामुद्दीन राईन, शकील चौधरी और अनुसूचित जाति विभाग मुंबई अध्यक्ष सुभाष भालेराव भी उपस्थित थे।

  • Maharashtra Politics: अजित पवार के निधन के बाद बदले सियासी संकेत, शरद पवार ने फैसलों से बनाई दूरी

    Maharashtra Politics: अजित पवार के निधन के बाद बदले सियासी संकेत, शरद पवार ने फैसलों से बनाई दूरी

    मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में अजित पवार के निधन के बाद बनी परिस्थितियों पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार के ताजा बयानों ने नए सियासी समीकरणों के संकेत दे दिए हैं। जहां एक ओर शरद पवार ने अजित पवार की कार्यशैली और जनसेवा की खुलकर सराहना की, वहीं दूसरी ओर प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे द्वारा लिए जा रहे राजनीतिक फैसलों से खुद को पूरी तरह अलग कर लिया है।

    अजित पवार के निधन (Ajit Pawar Death) के बाद तेजी से हो रहे राजनीतिक घटनाक्रम पर पूछे गए सवालों के जवाब में शरद पवार ने कहा, “ये सारी चर्चाएं यहां नहीं हो रही हैं, बल्कि मुंबई में हो रही हैं। प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे और अन्य वरिष्ठ नेता इन विषयों पर चर्चा कर रहे हैं। जो कुछ भी सामने आ रहा है, वह उनके द्वारा लिए गए फैसले लगते हैं। मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा।”

    अजित पवार की जमकर सराहना

    शरद पवार ने अजित पवार को एक सक्षम और समर्पित नेता बताते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा जनता के हित में काम किया।
    “अजित पवार लोगों के मुद्दों को अच्छी तरह समझते थे और यह सुनिश्चित करते थे कि आम जनता को न्याय मिले। बारामती की जनता ने हमेशा उनका साथ दिया और उन्होंने भी अपनी जिम्मेदारियों में कभी कोई कमी नहीं छोड़ी। उनके निधन से हम सभी को गहरा आघात पहुंचा है,” शरद पवार ने कहा।

    उन्होंने आगे कहा कि अजित पवार के निधन के बाद बनी स्थिति पार्टी और परिवार को और मजबूती से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।
    शरद पवार ने कहा, “हमें लोगों के दुख को कम करने के लिए काम करना चाहिए और जिस सोच व मूल्यों के साथ उन्होंने सेवा की, उसे आगे बढ़ाना चाहिए। मुझे पूरा भरोसा है कि उनके परिवार की नई पीढ़ी उनकी विरासत को आगे ले जाएगी।”

    सुनेत्रा पवार को लेकर अनभिज्ञता

    सुनेत्रा पवार के उपमुख्यमंत्री बनने की चर्चाओं पर शरद पवार ने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।
    “मैंने आज यह खबर अखबार में देखी। प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे जैसे कुछ नाम सामने आ रहे हैं, जिन्होंने कुछ फैसलों की पहल की है। मेरी इस संबंध में कोई चर्चा नहीं हुई है और मुझे नहीं पता कि ऐसा कुछ हो भी रहा है या नहीं,” उन्होंने स्पष्ट किया।

    परिवार को भरोसे में लेने के सवाल पर शरद पवार ने कहा,
    “अगर परिवार में कोई मुद्दा होता है तो परिवार एकजुट रहता है। फिलहाल परिवार में कोई मुद्दा नहीं है।”

    NDA को लेकर टालमटोल

    प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे द्वारा ‘जल्दबाजी में फैसले लेने’ के सवाल पर शरद पवार ने कहा कि NCP (शरद पवार गुट) और अजित पवार की NCP के साथ मिलकर काम करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी और इस पर जल्द फैसला होना था, लेकिन इसी बीच यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना हो गई।

    जब उनसे पूछा गया कि यदि NCP के दोनों गुट एकजुट होते हैं तो क्या वह NDA में शामिल होने पर विचार करेंगे, तो शरद पवार ने साफ कहा, “यह सब मीडिया में चल रहा है, यहां ऐसा कुछ नहीं है।”