रामेश्वरम (तमिलनाडु): पवित्र रामेश्वरम धाम इन दिनों दिव्यता और भक्ति से सराबोर है। श्रीमद्भागवत कथा की अमृतमयी ध्वनि यहां के वातावरण में गूंज रही है। प्रख्यात कथा वाचक पं. पवन शास्त्री मिश्र (दंदरौआ धाम) के मुखारविंद से प्रवाहित यह आध्यात्मिक ज्ञानगंगा श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर रही है।पं. शास्त्री जी ने कथा के दौरान श्रीमद्भागवत को “वेदों का सार” बताते हुए कहा कि “यह कोई साधारण ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाली दिव्य वाणी है। इसका रसपान करने से मनुष्य जन्म-जन्मांतर के बंधनों से मुक्त हो सकता है। भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम, करुणा और धर्म के संदेश आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं।”भक्ति, सेवा और धर्म का संदेशप्रतिदिन कथा स्थल पर सैकड़ों श्रद्धालु एकत्र हो रहे हैं, वातावरण हरिनाम संकीर्तन और भजनों से गुंजायमान है। कथा के माध्यम से भक्ति, सेवा और सच्चे धर्म का संदेश अत्यंत सरल और मार्मिक शब्दों में श्रोताओं तक पहुँच रहा है।यह श्रीमद्भागवत कथा 22 जुलाई से 28 जुलाई 2025 तक आयोजित की जा रही है। परीक्षित की भूमिका में सतीश श्रीवास्तव एवं ममता श्रीवास्तव ने यह पुण्य अवसर प्राप्त किया है।आयोजन और व्यवस्थाइस आयोजन की संकल्पना दंदरौआ धाम कथा परिवार भक्त मंडल की है, जबकि व्यवस्थापक की भूमिका में तहसीलदार यादव (बजाज एजेंसी) निष्ठा से सेवा दे रहे हैं।श्रद्धालुओं के लिए समुचित बैठने, प्रसाद, जल एवं अन्य सुविधाओं की व्यवस्था सराहनीय रही है।यदि आप चाहें तो इसका संक्षिप्त सोशल मीडिया कैप्शन, मराठी अनुवाद, या बुलेटिन शैली में भी संस्करण उपलब्ध कराया जा सकता है।
रामेश्वरम में गूंज रही श्रीमद्भागवत कथा की अमृतवाणी: पं. पवन शास्त्री मिश्र की वाणी में बह रही आध्यात्मिक सरिता,श्रद्धालु हो रहे भावविभोर

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