Sneha Patil Fierce Campaign: भिवंडी में बढ़ते प्रदूषण पर भाजपा नगरसेविका स्नेहा पाटिल का हल्लाबोल!

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Sneha Patil Fierce Campaign: भिवंडी शहर में लगातार बढ़ रहे वायु प्रदूषण को लेकर भाजपा नगरसेविका स्नेहा मेहुल पाटिल ने महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष सिद्धेश कदम से मुंबई में मुलाकात कर शहर की गंभीर पर्यावरणीय स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने ज्ञापन सौंपकर प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ तत्काल आपराधिक मामले दर्ज करने और कड़ी कार्रवाई की मांग की।

ज्ञापन में कहा गया है कि भिवंडी में डाइंग-साइजिंग इकाइयों की चिमनियों से निकलने वाले धुएं और मोती निर्माण कारखानों में रासायनिक पदार्थों के जलने से वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 333 के पार पहुंच गया है। इसके कारण बुजुर्गों, बच्चों और श्वसन रोगियों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

स्नेहा पाटिल ने आरोप लगाया कि कई साइजिंग कारखानों में कोयले के बजाय प्लास्टिक, प्लाईवुड और रासायनिक कचरे जैसे खतरनाक पदार्थों को खुलेआम जलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की जानकारी में यह सब होने के बावजूद संबंधित इकाइयों को अब तक ‘ग्रीन कैटेगरी’ में रखा गया है। उन्होंने ऐसे उद्योगों को तत्काल ‘रेड कैटेगरी’ में डालकर सील करने की मांग की।

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ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि शहर में प्रतिदिन 75 मीट्रिक टन क्षमता वाला कचरा प्रसंस्करण प्रकल्प केवल कागजों तक सीमित है और वर्षों से बंद पड़ा है। साथ ही वर्ष 2022 से 2026 तक भिवंडी महानगरपालिका द्वारा एक भी पर्यावरण स्थिति रिपोर्ट जारी नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया है।

स्नेहा पाटिल ने दावा किया कि शहर में वायु गुणवत्ता मापने वाले उपकरण भी बंद रखे गए हैं, जिससे वास्तविक प्रदूषण स्तर सामने नहीं आ पा रहा है। उन्होंने मनपा प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों पर केवल कागजी कार्रवाई कर जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आगामी दिनों में प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो भिवंडीवासियों को साथ लेकर “अधिकारी हटाओ, महानगरपालिका को ताला लगाओ” आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली किसी भी कानून-व्यवस्था संबंधी समस्या की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। भिवंडी में बढ़ते प्रदूषण को लेकर उठी यह मांग अब स्थानीय प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।

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