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  • आसमान में अफरातफरी, ज़मीन पर गुस्सा: इंडिगो संकट में टिकट 70 हज़ार पार, जनता पूछ रही है  “मोदी सरकार और DGCA चुप क्यों?”

    आसमान में अफरातफरी, ज़मीन पर गुस्सा: इंडिगो संकट में टिकट 70 हज़ार पार, जनता पूछ रही है “मोदी सरकार और DGCA चुप क्यों?”

    इंडिगो संकट के बाद हवाई टिकट 70 हजार तक पहुंचे। दिल्ली-बेंगलुरु- मुंबई से पटना फ्लाइट दाम 5-7 गुना। जनता नाराज़, सरकार और DGCA से कार्रवाई की मांग।

    इंडिगो एयरलाइंस में तकनीकी खराबी और पायलट-क्रू की कमी के कारण देशभर में सैकड़ों फ्लाइटें रद्द होने के बाद हवाई यात्रा में अफरातफरी मच गई है। सबसे बड़ा झटका टिकट दामों में आया, जो सामान्य दिनों की तुलना में 5 से 7 गुना तक बढ़ गए।इंडिगो संकट से पैदा विचित्र हालात में स्पाइसजेट, एयर इंडिया एक्सप्रेस, एयर इंडिया और अकासा एयरलाइंस कूटकर किराया वसूल रही है। पटना का टिकट दिल्ली से 40 हजार, मुंबई से 36 हजार और बेंगलुरु से 70 हजार पार हो गया है।इंडिगो संकट के बाद हवाई टिकट 70 हजार तक पहुंचे। दिल्ली-बेंगलुरु- मुंबई से पटना फ्लाइट दाम 5-7 गुना। जनता नाराज़, सरकार और DGCA से कार्रवाई की मांग।

    बेंगलुरु- पटना का टिकट 70,000 रुपये

    साधारण दिनों में 8–10 हजार में मिलने वाला टिकट 70,000 रुपये से ऊपर बिका। कई वेबसाइटों पर लगातार कीमत बढ़ती दिखी।


    जनता का सीधा सवाल: मंत्रालय और DGCA चुप क्यों?

    सोशल मीडिया पर यात्रियों का आरोप है कि:

    • हजारों फ्लाइटें रद्द हुईं
    • करोड़ों रुपये टिकट में फंस गए
    • रिफंड धीमा है
    • बाकी एयरलाइंस ने किराये बढ़ा दिए

    लेकिन नागरिक उड्डयन मंत्रालय और DGCA की ओर से सख्त दखल नहीं दिखा।

    लोग कह रहे हैं —

    “संकट में राहत देने के बजाय किराये आसमान भेज दिए, कोई रोक नहीं।”


    मंत्रालय पर निगरानी ढीली रखने के आरोप

    वर्तमान नागरिक उड्डयन मंत्री Kinjarapu Ram Mohan Naidu हैं।
    यात्रियों की शिकायत है कि:

    • टिकट प्राइस की कोई सीमा तय नहीं
    • रिफंड की गैर–साफ़ व्यवस्था
    • वैकल्पिक उड़ानों का कड़ाई से प्रबंध नहीं
    • एयरलाइंस पर कठोर निर्देश जारी नहीं किए गए

    इसलिए गुस्सा उमड़ा है कि:

    “संकट में भी आम जनता को बचाने के बजाय बाजार अपने आप चल रहा है।”

    सरकार की ओर से अभी तक मूल्य नियंत्रण या राहत पैकेज का कोई ऐलान नहीं हुआ।


    कई शहरों में दाम रिकॉर्ड स्तर पर

    दिल्ली – पटना

    • कई टिकट 40,000+
    • 5-6 दिसंबर में सिर्फ दो फ्लाइट दिखीं, दोनों महंगी

    मुंबई – पटना

    • सीधी फ्लाइट नहीं
    • एक-स्टॉप टिकट 80,000 रुपये तक

    बेंगलुरु – पटना

    • टिकट 72,000 रुपये पार

    दरभंगा, गया, पूर्णिया

    • किराये में 2–6 गुना बढ़ोतरी
    • कुछ तारीखों पर फ्लाइट ही नहीं

    नागरिकों का आरोप: संकट में बाजार को खुली छूट

    यात्रियों का कहना है:

    • “इंडिगो की उड़ानें बंद, बाकी कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं”
    • “मंत्रालय और DGCA केवल देख रहे हैं”
    • “कोई प्राइस कैप क्यों नहीं?”

    विशेषज्ञों का कहना है कि DGCA के पास आपातकालीन मूल्य-नियंत्रण के अधिकार हैं, लेकिन उपयोग नहीं किए गए।


    राजनीतिक सवाल तेज

    विपक्ष और यात्री पूछ रहे हैं:

    • इंडिगो संकट के समय अमल में क्या प्लान था?
    • यात्रियों के लिए राहत मैकेनिज्म कहाँ है?
    • टिकट कीमत इतनी तेज़ कैसे बढ़ी?

    मोदी सरकार की आलोचना हो रही है कि:

    “हर क्षेत्र में महंगाई बढ़ी, अब हवाई यात्रा भी आम आदमी की पहुंच से बाहर।”


    इंडिगो संकट ने दिखाया कि:

    • एयरलाइंस एक-दूसरे पर निर्भर हैं
    • कीमतें नियंत्रण में नहीं
    • यात्री सुरक्षा और सुविधा पर गंभीर सवाल खड़े हैं

    जब तक सख्त निगरानी और पारदर्शी प्राइस-रूल नहीं आते,
    यात्रियों का गुस्सा कम होने वाला नहीं।

  • मदरसों और मस्जिदों में भी लगाए जाएं सीसीटीवी कैमरे: अरुण गोविल ने संसद में जोरदार अपील की

    मदरसों और मस्जिदों में भी लगाए जाएं सीसीटीवी कैमरे: अरुण गोविल ने संसद में जोरदार अपील की

    नई दिल्ली: सांसद और टीवी के सुपरहिट सीरियल रामायण में भगवान राम का किरदार निभा चुके अरुण गोविल ने संसद में सुरक्षा और सार्वजनिक निगरानी को लेकर अहम सुझाव पेश किया। उन्होंने कहा कि देशभर के मंदिर, गुरुद्वारे, चर्च, स्कूल, कॉलेज और अस्पतालों में जहां पहले से ही सीसीटीवी कैमरे लगाए जाते हैं, वहीं मदरसों और मस्जिदों में भी आधुनिक सुरक्षा मानकों के तहत कैमरे लगाना अत्यंत आवश्यक है।

    अरुण गोविल ने अपने भाषण में जोर देकर कहा कि मस्जिदें भी सार्वजनिक स्थल हैं, जहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग आते-जाते हैं। ऐसे में सुरक्षा की दृष्टि से इन धार्मिक स्थलों पर निगरानी प्रणाली अनिवार्य होनी चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सऊदी अरब और अन्य मुस्लिम देशों में धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से लागू की जाती है।

    गोविल ने कहा, “जब सार्वजनिक स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे सुरक्षा और अपराध नियंत्रण के लिए अनिवार्य हैं, तो मदरसों और मस्जिदों को इस दिशा में पीछे क्यों रहना चाहिए? सुरक्षा, पारदर्शिता और निगरानी हर सार्वजनिक स्थल का मूलभूत अधिकार होना चाहिए।”

    सांसद ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह देशव्यापी सुरक्षा नीति के तहत सभी सार्वजनिक धार्मिक स्थलों पर आधुनिक सुरक्षा मानक लागू करने के लिए कदम उठाए। उनका मानना है कि ऐसा करने से न केवल सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि किसी भी अप्रिय घटना या आपराधिक गतिविधि की जांच और रोकथाम भी तेज होगी।

    गोविल ने यह भी सुझाव दिया कि सभी धर्मों के सार्वजनिक स्थलों पर समान सुरक्षा मानक लागू किए जाएं, ताकि कोई भेदभाव न हो और देशवासियों का विश्वास बढ़े। उनके अनुसार, यह कदम न केवल सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि धार्मिक स्थलों पर आने वाले लोगों की सुरक्षा और मन की शांति सुनिश्चित करेगा।

  • यूपी पंचायत चुनाव 2026: कांग्रेस ने सपा से किया किनारा, अकेले लड़ने का ऐलान

    यूपी पंचायत चुनाव 2026: कांग्रेस ने सपा से किया किनारा, अकेले लड़ने का ऐलान

    उत्तर प्रदेश: आगामी पंचायत चुनाव 2026 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है। पार्टी का उद्देश्य अपने जमीनी संगठन को मजबूत करना और 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी करना है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि पंचायत चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करने वाले कार्यकर्ताओं को अगले विधानसभा चुनाव में टिकट दिया जाएगा।

    सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस यह निर्णय इसलिए कर रही है ताकि पार्टी जनाधार का सही अंदाजा लगा सके और संगठनात्मक मजबूती बढ़ा सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ गठबंधन को लेकर अंतिम निर्णय राष्ट्रीय नेतृत्व लेगा। फिलहाल यूपी में कांग्रेस अपने 403 विधानसभा सीटों पर संगठन सृजन पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

    यूपी कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडे ने भी पुष्टि की कि पार्टी इस बार सपा के साथ नहीं जाएगी। राजनीतिक विश्लेषक इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की नई रणनीति के रूप में देख रहे हैं। उनका मानना है कि पंचायत स्तर पर पार्टी का सक्रिय होना और कार्यकर्ताओं को टिकट देना कांग्रेस को स्थानीय स्तर पर मजबूती देने के साथ-साथ सपा पर दबाव बनाने में भी मदद करेगा।

    पिछली लोकसभा चुनाव 2024 में कांग्रेस-सपा गठबंधन ने बीजेपी को बहुमत से रोकने में सफलता हासिल की थी। अब पार्टी इसी रणनीति के तहत पंचायत चुनावों में सक्रिय भूमिका निभाने की योजना बना रही है। इस कदम से कांग्रेस को आगामी विधानसभा चुनावों में रणनीतिक लाभ मिलने की उम्मीद है।

  • 31 करोड़ की भारी धोखाधड़ी! मेसर्स रणबीर रियल एस्टेट के निदेशकों पर 18 निवेशकों को ठगा जाने का लगाआरोप

    31 करोड़ की भारी धोखाधड़ी! मेसर्स रणबीर रियल एस्टेट के निदेशकों पर 18 निवेशकों को ठगा जाने का लगाआरोप

    मुंबई: अंधेरी पुलिस स्टेशन में मेसर्स रणबीर रियल एस्टेट एंड डेवलपर्स और इसके निदेशकों जयकुमार गुप्ता व सुयश गुप्ता के खिलाफ ₹31.26 करोड़ की बड़ी धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि रियल एस्टेट परियोजनाओं में निवेश करने वाले 18 निवेशकों को वार्षिक 18 प्रतिशत रिटर्न का झांसा देकर ठगा गया।

    शिकायतकर्ता गुजरात के वापी के फार्मेसी व्यवसायी महेश दोशी हैं, जिन्होंने बताया कि मार्च 2021 में एक बिचौलिए के जरिए उन्हें कंपनी की सिफारिश की गई। आरोपियों ने माज़सवाड़ी में चल रही पुनर्विकास परियोजना के लिए निवेश की जरूरत बताकर और संबंधित दस्तावेज दिखाकर निवेश के लिए प्रेरित किया।

    अप्रैल 2021 में दोशी और उनके परिवार ने RTGS के जरिए कंपनी के खाते में ₹8.26 करोड़ जमा किए। शुरू में गुप्ता परिवार ने ब्याज का भुगतान किया, लेकिन 2021 से सितंबर 2024 तक यह भुगतान बंद हो गया और मूल राशि की वापसी में भी देरी होने लगी।

    एफआईआर में कहा गया है कि इसी तरह 17 अन्य निवेशकों को भी धोखा दिया गया। कुल मिलाकर पिता-पुत्र की जोड़ी ने 18 निवेशकों से लगभग ₹31.26 करोड़ की ठगी की है।

    पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा रही है।

  • हेमंत सोरेन की बीजेपी को करारी चेतावनी: हाई कोर्ट से राहत, NDA में जाने की अफवाहों पर पलटवार

    हेमंत सोरेन की बीजेपी को करारी चेतावनी: हाई कोर्ट से राहत, NDA में जाने की अफवाहों पर पलटवार

    Ranchi: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की दिल्ली में बीजेपी नेताओं से मुलाकात ने राज्य की सियासी गलियों में हलचल मचा दी थी। हालांकि, अब हाई कोर्ट ने उन्हें बड़ी राहत दी है। रांची हाई कोर्ट ने सीएम को निचली अदालत में सशरीर उपस्थिति से छूट दे दी है, और वे केवल 6 दिसंबर को ट्रायल के दौरान अदालत में उपस्थित होंगे। यह राहत प्रवर्तन निदेशालय (ED) के समन की अवहेलना मामले में दी गई है।

    28 नवंबर से दिल्ली में रहे हेमंत सोरेन बुधवार शाम को अपनी पत्नी कल्पना सोरेन के साथ रांची लौट आए। इस दौरान मीडिया में खबरें आई थीं कि उन्होंने बीजेपी के बड़े नेताओं के साथ गुप्त बैठक की। इस खबर ने अफवाहों का बाजार गर्म कर दिया कि क्या सीएम विपक्षी गठबंधन छोड़कर एनडीए में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं।

    हालांकि, झारखंड बीजेपी और जेएमएम नेताओं ने इन अटकलों को तुरंत खारिज कर दिया। जेएमएम के एक्स हैंडल पर भी “झारखंड झुकेगा नहीं” कैप्शन के साथ पोस्ट किया गया, जिससे साफ संकेत मिला कि राज्य में गठबंधन मजबूत है और अफवाहों से प्रभावित नहीं होगा।

    सीएम हेमंत सोरेन के रांची लौटने के बाद कांग्रेस विधायक और राज्य मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने कहा, “इन तरह की अटकलों पर रोक लगनी चाहिए। यह लोकतंत्र के लिए हानिकारक है। झारखंड में ग्रैंड अलायंस को स्पष्ट जनादेश मिला है। बीजेपी की कोशिशें गठबंधन को कमजोर करने की हैं, लेकिन सफल नहीं होंगी। हमारे मुख्यमंत्री कभी भी बीजेपी की चालों में नहीं आएंगे। जो नेता राज्य और जनता के हित के लिए जेल जा सकता है, वह कभी भी विपक्ष की साजिशों में शामिल नहीं होगा। हमारी सरकार मजबूत है और आगे भी मजबूत रहेगी।”

    राज्य की सियासी प्रतिक्रिया साफ है: हेमंत सोरेन अपनी राजनीतिक जमीन पर अडिग हैं और बीजेपी की साजिशों के बावजूद ग्रैंड अलायंस मजबूत रहेगा।

  • सिंहस्थ कुंभमेला 2027: नासिक का 200 करोड़ का ‘गोदावरी बॉण्ड’ NSE पर सूचीबद्ध

    सिंहस्थ कुंभमेला 2027: नासिक का 200 करोड़ का ‘गोदावरी बॉण्ड’ NSE पर सूचीबद्ध

    नासिक। सिंहस्थ कुंभमेला 2027 की तैयारियों को गति देने के लिए नासिक महानगरपालिका ने 200 करोड़ रुपये के ‘एनएमसी क्लीन गोदावरी बॉण्ड्स’ को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर सूचीबद्ध कर दिया है। यह बॉण्ड नासिक मनपा द्वारा बुनियादी ढांचा विकास के लिए जारी तीसरी वित्तपोषण पहल है और कुंभमेला से संबंधित महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए निधि उपलब्ध कराएगा।

    मुंबई स्थित NSE में आयोजित लिस्टिंग समारोह में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बॉण्ड की लिस्टिंग की। समारोह में महाराष्ट्र शासन के मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल, NSE के प्रबंध निदेशक और CEO आशीषकुमार चौहान, कुंभमेला प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. प्रवीण गेडाम, कुंभमेला आयुक्त शेखर सिंह, नासिक मनपा आयुक्त मनीषा खत्री सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

    मनपा आयुक्त मनीषा खत्री ने बताया कि इश्यू में 100 करोड़ रुपये का बेस इश्यू था, जिसे संस्थागत निवेशकों से 3.95 गुना अधिक प्रतिसाद मिला, जो नासिक के विकास कार्यों पर निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।

    निधि का उपयोग:

    • रामझूला पैदल यात्री पुल का निर्माण
    • कालाराम मंदिर परिसर में वेंडिंग प्लाजा और आधारभूत विकास
    • कापलेश्वर मंदिर क्षेत्र के आसपास सुविधाओं का विकास
    • पंचवटी, सातपूर और नासिकपश्चिम क्षेत्रों में सीवरेज नेटवर्क सुधार
    • सड़क, जल आपूर्ति, स्वच्छता और कुंभमेला संबंधित अन्य सुविधाओं का निर्माण

    मनपा आयुक्त मनीषा खत्री ने कहा, “200 करोड़ रुपये के इस बॉण्ड की लिस्टिंग नासिक की विकास यात्रा में नया अध्याय है। यह नवाचारपूर्ण वित्तपोषण पारदर्शिता, समयबद्ध कार्य और कुंभमेला परियोजनाओं की सफलता का प्रमाण है।”

  • प्रजा फाउंडेशन ने महाराष्ट्र नगरपालिका चुनाव 2025 के लिए जारी किया नागरिक घोषणापत्र

    प्रजा फाउंडेशन ने महाराष्ट्र नगरपालिका चुनाव 2025 के लिए जारी किया नागरिक घोषणापत्र

    मुंबई। प्रजा फाउंडेशन ने 2 दिसंबर, 2025 को महाराष्ट्र नगरपालिकाओं के आगामी चुनाव 2025 के लिए नागरिक घोषणापत्र का जारी किया। यह घोषणापत्र सेवा वितरण में सुधार, पारदर्शी शासन, डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से नागरिक भागीदारी और नगरपालिका क्षमता को मजबूत करने पर केंद्रित है।

    घोषणापत्र में नगर निगमों को पूर्ण अधिकार देने, सेवा मानक तय करने, वास्तविक पारदर्शिता सुनिश्चित करने, नागरिकों की आवाज़ को सक्षम बनाने और डिजिटल रूप से सशक्त वार्ड समितियों के साथ प्रशासनिक सुधार लागू करने जैसी पांच प्रमुख प्राथमिकताओं को रेखांकित किया गया है।

    प्रजा फाउंडेशन के संस्थापक निताई मेहता और सी.ई.ओ. मिलिंद म्हस्के ने बताया कि यह घोषणापत्र पारदर्शी और जिम्मेदार स्थानीय शासन को बढ़ावा देने के लिए राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए एक प्रतिज्ञा है। अनुसंधान प्रबंधक आसिफ खान ने कहा कि इसमें सेवा स्तर, त्रैमासिक रिपोर्ट, अपशिष्ट प्रबंधन और मानसून भेद्यता मानचित्रण जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से शहरी जीवन की गुणवत्ता सुधारने की रूपरेखा दी गई है।

  • तत्काल टिकट बुकिंग में बड़ा बदलाव: अब OTP से होगी पुष्टि, यात्रियों की बढ़ेगी मुश्किल या मिलेगी राहत?

    तत्काल टिकट बुकिंग में बड़ा बदलाव: अब OTP से होगी पुष्टि, यात्रियों की बढ़ेगी मुश्किल या मिलेगी राहत?

    मुंबई। भारतीय रेलवे ने अचानक एक बड़ा कदम उठाते हुए तत्काल टिकट बुकिंग सिस्टम में बड़ा बदलाव कर दिया है। अब फिजिकल रिज़र्वेशन काउंटर पर तत्काल टिकट बुकिंग के लिए यात्रियों को वन-टाइम पासवर्ड (OTP) वेरिफिकेशन कराना होगा। यानी बिना OTP के टिकट बुक ही नहीं होगा।

    17 नवंबर से शुरू हुआ नया सिस्टम, अब 52 ट्रेनों तक बढ़ाया गया दायरा

    सरकारी सूत्रों के मुताबिक यह सिस्टम 17 नवंबर से पायलट आधार पर शुरू किया गया था। शुरुआत में सिर्फ कुछ ही ट्रेनों पर इसे लागू किया गया था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 52 ट्रेनों में लागू कर दिया गया है।
    आगे चलकर इसे चरणबद्ध तरीके से देशभर की सभी ट्रेनों पर लागू किया जाएगा।

    कैसे मिलेगा OTP?

    नई प्रक्रिया के अनुसार:

    • यात्री को रिज़र्वेशन फॉर्म में अपना मोबाइल नंबर लिखना होगा।
    • उसी नंबर पर रेलवे की ओर से OTP भेजा जाएगा।
    • OTP वेरिफाई होने के बाद ही तत्काल टिकट जारी होगा।

    क्यों बदला गया नियम?—हेराफेरी रोकने की तैयारी

    रेलवे मंत्रालय के मुताबिक यह कदम तत्काल टिकटों की बढ़ती हेराफेरी और ब्लैकिंग रोकने के लिए उठाया गया है।
    तत्काल टिकट की मांग बहुत अधिक रहती है, ऐसे में कई एजेंट और दलाल सिस्टम को चकमा देकर टिकट बुक कर लेते थे। रेलवे का मानना है कि OTP वेरिफिकेशन से यह धंधा काफी हद तक रुक जाएगा और टिकट सही यात्रियों तक पहुंच पाएंगे।

    पहले भी बदले थे कई नियम

    रेलवे इस साल टिकटिंग सिस्टम में लगातार बदलाव कर रहा है—

    • जुलाई में तत्काल टिकट की ऑनलाइन बुकिंग के लिए आधार-आधारित OTP वेरिफिकेशन अनिवार्य किया गया था।
    • 1 अक्टूबर से IRCTC पर बुकिंग विंडो खुलने के शुरुआती 15 मिनट केवल आधार-ऑथेंटिकेटेड यूजर्स को टिकट बुक करने की अनुमति दी गई।

    यात्रियों को क्या मिलेगा फायदा?

    अधिकारियों का दावा है कि—

    • सिस्टम ज्यादा पारदर्शी होगा
    • दलालों की परेशानी बढ़ेगी
    • पीक डिमांड में आम यात्रियों के टिकट मिलने की संभावना बढ़ेगी
    • बुकिंग प्रक्रिया और सुरक्षित होगी

    हालांकि, यात्रियों को मोबाइल नेटवर्क और OTP देरी जैसी समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है।

  • सालेकसा में EVM का सील खुला तो मचा हंगामा, क्लोज बटन की जांच के लिए हटाया गया था सील

    सालेकसा में EVM का सील खुला तो मचा हंगामा, क्लोज बटन की जांच के लिए हटाया गया था सील

    सालेकसा: सालेकसा नगर पंचायत के चुनाव 2 दिसंबर को शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हुए। मतदान के बाद केंद्राध्यक्षों ने सीलबंद ईवीएम मशीनें चुनाव निर्णय अधिकारी को सौंप दी थीं। लेकिन जब इन मशीनों को स्ट्रॉन्ग रूम में रखने की प्रक्रिया शुरू हुई, तो कंट्रोल यूनिट के क्लोज बटन की जांच (शहानिशा) के लिए चुनाव निर्णय अधिकारी मोनिका कांबळे ने ईवीएम का सील हटाने के निर्देश दिए।

    जैसे ही यह जानकारी राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों तक पहुँची, उन्होंने बुधवार (3 दिसंबर) को तहसील कार्यालय पहुँचकर गंभीर आपत्ति जताई और ईवीएम से छेड़छाड़ का आरोप लगाया। इस विवाद के चलते कार्यालय में देर शाम तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।

    राजनीतिक दलों ने सवाल उठाया कि यदि क्लोजर बटन की जांच आवश्यक थी, तो इसे पार्टी प्रतिनिधियों की मौजूदगी में क्यों नहीं किया गया? उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे मामले में पारदर्शिता नहीं बरती गई और चुनाव निर्णय अधिकारी को तुरंत निलंबित करने की मांग की।

    स्थिति बिगड़ने पर तहसील कार्यालय में हंगामा बढ़ गया। नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध दर्ज कराया, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस का भारी बंदोबस्त तैनात किया गया और भीड़ को रोकने के लिए बैरिकेड्स लगाए गए।

    अधिकारियों का कहना है कि प्रक्रिया नियमों के तहत ही की गई, जबकि राजनीतिक दल इस पर कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं। मामला फिलहाल जांच के दायरे में है।

  • सगे भाइयों की ‘गोलमाल’ कहानी: पुलिस बनने के लिए उपनिरीक्षक ने ही भाई की जगह देकर दी परीक्षा, 9 साल बाद सच उजागर

    सगे भाइयों की ‘गोलमाल’ कहानी: पुलिस बनने के लिए उपनिरीक्षक ने ही भाई की जगह देकर दी परीक्षा, 9 साल बाद सच उजागर

    पुणे: भाई के लिए कोई भी हद तक जाने की कहावत को सच कर दिखाते हुए पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस आयुक्तालय में कार्यरत एक उपनिरीक्षक ने अपने ही सगे भाई को पुलिस में भर्ती कराने के लिए बड़ा फर्जीवाड़ा किया। वर्ष 2016 में उसने अपने भाई की जगह खुद ही लिखित परीक्षा दी। यह घोटाला नौ साल बाद उजागर हुआ और पुणे पुलिस ने उपनिरीक्षक को गिरफ्तार कर लिया। अदालत ने उसे तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है।

    गिरफ्तार उपनिरीक्षक का नाम सुप्पडसिंग शिवलाल गुसिंगे है। उसके साथ उसके भाई गजानन शिवलाल गुसिंगे के खिलाफ भी शिवाजीनगर पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया है। दोनों पर धोखाधड़ी, जालसाजी, बनावट दस्तावेज तैयार करना, फर्जी दस्तावेजों को असली बताना और साजिश रचने जैसी धाराओं के साथ परीक्षा गैरव्यवहार प्रतिबंधक कानून के तहत केस दर्ज हुआ है। यह घटना 24 अप्रैल 2016 को शिवाजीनगर पुलिस मुख्यालय के मैदान में घटी थी।

    कैसे हुआ था फर्जीवाड़ा?

    2016 में पुणे शहर पुलिस भर्ती प्रक्रिया के दौरान गजानन गुसिंगे ने मैदान परीक्षण तो खुद दिया, लेकिन 24 अप्रैल की लिखित परीक्षा में अपनी जगह “डमी” उम्मीदवार बैठाया। इस डमी उम्मीदवार के लिए फर्जी पहचान पत्र भी बनाए गए। मामला सामने आने पर गजानन और उसके स्थान पर परीक्षा देने वाले व्यक्ति के खिलाफ अपराध दर्ज किया गया।

    जांच के दौरान पता चला कि परीक्षा देने वाला डमी कोई और नहीं, बल्कि गजानन का सगा भाई सुप्पडसिंग था। इसी बीच सुप्पडसिंग 2023 में महाराष्ट्र पुलिस में उपनिरीक्षक के रूप में नियुक्त हो गया और वर्तमान में पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस आयुक्तालय में तैनात था।

    9 साल बाद खुला राज, एसआई गिरफ्तार

    जांच अधिकारियों ने पुलिस मुख्यालय से जानकारी मंगाई और सुप्पडसिंग की नियुक्ति की पुष्टि की। इसके बाद क्राइम ब्रांच ने राज्य राखीव दल (SRPF) ग्रुप नंबर 7 से सुप्पडसिंग को गिरफ्तार कर लिया।

    अब पुलिस को गजानन की तलाश है और यह भी जांच की जा रही है कि फर्जी पहचान पत्र कहां से और कैसे बनाए गए थे। इसी आधार पर आरोपी को पुलिस हिरासत में देने की मांग की गई, जिसे अदालत ने स्वीकार किया और सुप्पडसिंग को तीन दिन की पुलिस कोठड़ी सुनाई।

    बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता चेतन भुतडा ने पैरवी की, जबकि सरकारी वकील श्रीधर जावळे ने पुलिस का पक्ष रखा।