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  • क्रू की भारी कमी से संकट में आया इंडिगो. 70 से अधिक उड़ानें रद्द, देशभर के यात्रियों की बढ़ी परेशानी

    क्रू की भारी कमी से संकट में आया इंडिगो. 70 से अधिक उड़ानें रद्द, देशभर के यात्रियों की बढ़ी परेशानी

    मुंबई। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनियों में से एक इंडिगो बुधवार को गंभीर परिचालन संकट का शिकार हो गई। प्रशिक्षित क्रू की भारी कमी और तकनीकी समस्याओं के कारण इंडिगो को 70 से अधिक उड़ानें रद्द करनी पड़ीं, जबकि कई उड़ानों में घंटों की देरी हुई। इस अचानक फैसले से मुंबई, पुणे, नागपुर, बेंगलुरु समेत देशभर के एयरपोर्ट्स पर हजारों यात्री परेशान व नाराज़ नजर आए।

    सूत्रों के मुताबिक, फ्लाइट रद्द होने का मुख्य कारण प्रशिक्षित चालक दल की गंभीर कमी है। कई सेक्टर्स में इंडिगो को उड़ानें संचालित करने के लिए क्रू उपलब्ध नहीं हो पा रहा था, जिससे परिचालन प्रभावित हुआ और उड़ानें समय पर रवाना नहीं हो सकीं।

    पुणे एयरपोर्ट पर बेंगलुरु, दिल्ली, कोची और अगरतला सहित कई शहरों के लिए जाने वाली सुबह की उड़ानों में भारी देरी हुई। बिना स्पष्ट सूचना दिए उड़ानें रद्द हो जाने से यात्रियों की कनेक्टिंग फ्लाइट छूट गईं। कई यात्रियों ने शिकायत की कि इंडिगो की ओर से एसएमएस अलर्ट या घोषणा समय पर नहीं की गई।

    नागपुर एयरपोर्ट पर तो स्थिति और भी खराब रही। बताया गया कि पायलट उपलब्ध न होने के कारण यात्रियों को पहले विमान के अंदर और बाद में बस में घंटों तक इंतजार करवाया गया।

    इंडिगो के प्रवक्ता ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि “पिछले कुछ दिनों में तकनीकी दिक्कतों, एयरपोर्ट की भारी भीड़ और परिचालन संबंधी जरूरतों के कारण कई उड़ानों में देरी हुई है और कुछ को रद्द करना पड़ा है।”

    विशेषज्ञों के अनुसार, इस संकट के पीछे नागरिक उड्डयन मंत्रालय के नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों का दूसरा चरण भी एक बड़ा कारण है। नए प्रावधानों के तहत पायलट और केबिन क्रू की साप्ताहिक विश्राम अवधि बढ़ा दी गई है, जिससे एयरलाइनों के मौजूदा स्टाफ पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है और उड़ान संचालन प्रभावित हो रहा है।

  • नगरपालिकाओं के चुनाव आगे बढ़ाने के फैसले पर महाराष्ट्र सरकार की नाराज़गी, मंत्री बावनकुळे का चुनाव आयोग पर हमला

    नगरपालिकाओं के चुनाव आगे बढ़ाने के फैसले पर महाराष्ट्र सरकार की नाराज़गी, मंत्री बावनकुळे का चुनाव आयोग पर हमला

    नागपुर। महाराष्ट्र में कुछ नगरपालिका और नगर पंचायतों के चुनाव मतदान से एक दिन पहले ही आगे बढ़ाने के चुनाव आयोग के निर्णय पर राज्य सरकार ने कड़ा विरोध जताया है। नागपुर में मीडिया से बात करते हुए राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने स्पष्ट कहा कि सरकार आयोग के इस कदम से सहमत नाहीं है और यह फैसला पूरी तरह गलत है।

    बावनकुळे ने बताया कि सरकार ने चुनाव आगे न बढ़ाने के लिए आयोग को चार बार पत्र भेजे थे, लेकिन इसके बावजूद यह निर्णय लिया गया। उन्होंने कांग्रेस नेता नाना पटोले पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें हर मुद्दे में सिर्फ राजनीति ही दिखाई देती है।

    मंत्री ने यह भी कहा कि कामठी नगर परिषद चुनाव रद्द करने के लिए अदालत में याचिका दायर करना हर नागरिक का अधिकार है और अंतिम फैसला न्यायालय ही करेगा।

    स्थानीय स्तर पर महायुती में हुई नाराज़गी पर उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका गठबंधन की स्थिरता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण का 2 दिसंबर वाला अल्टीमेटम केवल स्थानीय चुनावों के संदर्भ में था, राज्य की महायुती सरकार से उसका कोई संबंध नहीं है।

  • शिक्षक ये सिर्फ तुम ही कर सकते हो

    शिक्षक ये सिर्फ तुम ही कर सकते हो

    रोते हुए बच्चों का आना,
    हँसते हुए उन्हें घर भिजवाना —
    ये सिर्फ तुम ही कर सकते हो!

    ऊँगली पकड़कर वर्ण को शब्द,
    शब्द से वाक्य बनाकर सिखाना —
    ये सिर्फ तुम ही कर सकते हो!

    बचपन की उनकी शरारतों को सकारात्मकता से लेना,
    गलती को सुधारना और सही होने पर प्रोत्साहन देना —
    ये सिर्फ तुम ही कर सकते हो!

    शिक्षा ही नहीं, हर क्षेत्र में रास्ता दिखाना,
    रंग, ढंग, उमंग भरी बातें सिखाना —
    ये सिर्फ तुम ही कर सकते हो!

    भाषा, गणित, विज्ञान, सामाजिक ज्ञान —
    इतनी क्षमता के काबिल बनाना —
    ये सिर्फ तुम ही कर सकते हो!

    छोटी-बड़ी समस्याएँ सुलझाना,
    आपस में न झगड़ना, मिल-बाँटकर खाना और दोस्ती करवाना —
    ये सिर्फ तुम ही कर सकते हो!

    माता-पिता ईश्वर, तो तुम मंदिर हो,
    हर अजनबी को प्यार से गले लगाना —
    ये सिर्फ तुम ही कर सकते हो!

    परीक्षा में निहारना, हर उम्र में निखारना,
    तीन घंटों का सफ़र बिना हिचकिचाहट गुज़ारना —
    ये सिर्फ तुम ही कर सकते हो!

    बिना जन्म दिए जननी बनना,
    पालक न होकर भी उससे बढ़कर सराहना —
    ये सिर्फ तुम ही कर सकते हो!

    बिन बोले आँखें पढ़ लेना,
    मन के क्लेश को हर लेना —
    हर मुश्किल पल में थाम लेना —
    ये सिर्फ तुम ही कर सकते हो!

    अनगिनत कार्य और भाँति-भाँति के लोग,
    किसी की उलाहना, किसी का प्रतिशोध —
    इन सभी का सामना करना —
    ये सिर्फ तुम ही कर सकते हो!

    कब उम्र बीती आपकी, पता न चला आपको,
    उम्र के हर पड़ाव में बचपना सँजोकर रखना —
    ये सिर्फ तुम ही कर सकते हो!

    शिक्षक वो जो आजीवन समय का पाबंद रहा,
    कब जीवन के संघर्षों में अब वो स्वच्छंद रहा!

    नीड़ गैरों की सेवा में ख़ुद को तुमने खोया है,
    पर सेवा-ख़ातिर ही ख़ुद को बहुत पिरोया है।

    बीज सफलता का बोकर, पर लोगों को जो ज्ञान दिया,
    सपना हो साकार सभी का — ऐसी शिक्षा का दान दिया।

    शिक्षक ही वह ज्योति है, जो तपकर जलता रहता है,
    इसी से विद्यार्थी का जीवन जगमग करता है!

    हर बात, हर जज़्बात के लिए शुक्रिया,
    हर एहसास के लिए शुक्रिया…
    शिक्षक — ये सिर्फ तुम ही कर सकते हो!! 🙏

    — विभा रू. द्विवेदी
    
    

  • Election News:बुलढाणा नगरपालिका चुनाव में हड़कंप: दो फर्जी मतदाता पकड़े गए, घाटाखाल से गाड़ियों में भरकर लाए जाने का आरोप

    बुलढाणा नगरपालिका चुनाव में आज सुबह 7 बजे से मतदान शुरू होते ही फर्जी मतदान का मामला सामने आ गया। मतदान शुरू हुए मुश्किल से डेढ़ घंटा भी नहीं बीता था कि प्रभाग क्रमांक 15 के गांधी प्राथमिक विद्यालय मतदान केंद्र पर दो बोगस मतदाता पकड़े गए।

    बुलढाणा नगरपालिका चुनाव में दो फर्जी मतदाता गिरफ्तार, घाटाखाल से गाड़ियों में भरकर लाए जाने का आरोप
    बुलढाणा नगरपालिका चुनाव में मतदान शुरू होते ही बड़ा विवाद सामने आया। प्रभाग 15 के गांधी प्राथमिक विद्यालय मतदान केंद्र पर दो बोगस मतदाता रंगेहाथ पकड़े गए। आरोप है कि कोथळी और इब्राहिमपुर से गाड़ियों में भरकर फर्जी मतदाता बुलढाणा लाए गए। कांग्रेस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है।

    जानकारी के अनुसार, कोथळी (ता. मोताळा) के एक व्यक्ति ने वैभव देशमुख नामक वोटर की जगह मतदान किया, जिसके तुरंत बाद उसे रंगेहाथ दबोचा गया। उसके साथ एक और व्यक्ति मिला, जो कथित रूप से फर्जी मतदान के लिए आया था। बताया जा रहा है कि कोथळी और इब्राहिमपुर से और भी लोगों को फर्जी मतदाता बनाकर बुलढाणा लाया गया है।

    स्थानीय सूत्रों का दावा है कि घाटाखाल क्षेत्र से करीब दो गाड़ियाँ भरकर फर्जी मतदाताओं को शहर में लाया गया। इस गंभीर प्रकरण को लेकर कांग्रेस ने पुलिस प्रशासन से तुरंत कार्रवाई करने और पूरे मामले की सख्त दखल लेने की मांग की है।

  • Maharashtra News:भंडारा में शिवाजी महाराज की प्रतिमा को भाजपा दुपट्टा-टोपी पहनाने पर विवाद, कांग्रेस प्रवक्ता अतुल लोंढे का भाजपा पर तीखा हमला

    Maharashtra News:भंडारा में शिवाजी महाराज की प्रतिमा को भाजपा दुपट्टा-टोपी पहनाने पर विवाद, कांग्रेस प्रवक्ता अतुल लोंढे का भाजपा पर तीखा हमला

    मुंबई। भंडारा नगरपालिका चुनाव के दौरान एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। प्रभाग संख्या दो से भाजपा उम्मीदवार चंद्रकला भोपे ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा को भाजपा का दुपट्टा और पार्टी की टोपी पहनाई। इस घटना के फोटो और वीडियो खुद उम्मीदवार ने अपने सोशल मीडिया पर साझा किए, जो तेजी से वायरल हो गए।

    महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमिटी के वरिष्ठ प्रवक्ता अतुल लोंढे ने इस पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि रयते के राजे छत्रपति शिवाजी महाराज का इस तरह राजनीतिक दुरुपयोग करना बेहद आपत्तिजनक है। लोंढे के अनुसार भाजपा नेताओं द्वारा शिवाजी महाराज की प्रतिमा के साथ ऐसा व्यवहार जनता की भावनाओं को आहत करने वाला है और इससे लोगों में तीव्र रोष फैल गया है।

    स्थानीय नागरिकों में भी इस घटना को लेकर गुस्सा पनप रहा है। भंडारा में यह मुद्दा अब राजनीतिक गरमाहट पैदा कर रहा है और चुनावी माहौल और भी तीखा होता दिखाई दे रहा है।

  • चुनावी ‘लुभावने वादों’ पर कार्रवाई की आहट: शिंदे–अजित पवार समेत 20 नेताओं पर निर्वाचन आयोग की नजर, DM से मांगी रिपोर्ट

    चुनावी ‘लुभावने वादों’ पर कार्रवाई की आहट: शिंदे–अजित पवार समेत 20 नेताओं पर निर्वाचन आयोग की नजर, DM से मांगी रिपोर्ट

    महाराष्ट्र में चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए लुभावने, भ्रामक और संभावित रूप से आचार संहिता के उल्लंघन वाले बयानों पर अब बड़ी कार्रवाई का संकेत मिल रहा है। राज्य निर्वाचन आयोग ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री अजित पवार, मंत्री गुलाबराव पाटिल, विधायक चित्रा वाघ समेत 20 नेताओं के खिलाफ जिलाधिकारियों से तत्काल रिपोर्ट मांगी है।

    इन नेताओं के भाषणों के वीडियो और बयान वायरल होने के बाद आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट आने के बाद कई नेताओं की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।


    किस बयान पर फंसे कौन नेता?

    शिंदे का ‘खजाने की चाबी’ बयान बना परेशानी

    चुनावी सभा में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा था,
    “राज्य का खजाना हमारे पास है।”
    विपक्ष ने इस बयान को सत्ता के दुरुपयोग और मतदाताओं को प्रलोभन देने के तौर पर पेश किया था। अब आयोग ने इस पर भी रिपोर्ट तलब की है।


    गुलाबराव पाटिल का ‘लक्ष्मी दर्शन’ बयान

    सरकारी मंत्री गुलाबराव पाटिल ने मतदाताओं से कहा था—
    “लक्ष्मी आने वाली है, इसलिए बाहर खाट पर सोएं।”
    विपक्ष ने इसे चुनाव में धन वितरण का इशारा बताते हुए शिकायत की थी।


    चित्रा वाघ: ‘नमक कोई भी खा लें, बटन कमल का दबेगा’

    विधायक चित्रा वाघ के बयान को भी चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन माना गया है। आयोग ने यह भी पूछा है कि क्या बयान मतदाताओं पर दबाव या दुष्प्रचार का हिस्सा था।


    अजित पवार के भाषण भी हो सकते हैं जांच के दायरे में

    डिप्टी सीएम अजित पवार ने कई सभाओं में मतदाताओं को रिझाने वाले वादे और राजनीतिक संकेत दिए थे। आयोग ने संबंधित जिलाधिकारियों से उनके बयानों की पूरी रिपोर्ट मांगी है।


    DM को क्यों भेजा गया नोटिस?

    निर्वाचन आयोग ने उन सभी जिलाधिकारियों (District Magistrates) से फील्ड रिपोर्ट मांगी है जहां ये बयान दिए गए थे।
    रिपोर्ट में यह जानकारी मांगी गई है—

    • क्या बयान आचार संहिता का उल्लंघन है?
    • क्या मतदाताओं को प्रत्यक्ष/परोक्ष रूप से लुभाया गया?
    • क्या प्रशासन को शिकायतें मिलीं?
    • क्या सभा रिकॉर्डिंग और साक्ष्य उपलब्ध हैं?

    आगे क्या हो सकता है?

    सूत्रों के मुताबिक, आयोग रिपोर्ट मिलने के बाद नोटिस, चेतावनी या केस दर्ज करने जैसा कठोर कदम भी उठा सकता है। चुनावी माहौल में यह कार्रवाई राजनीतिक रूप से बड़ा असर डाल सकती है क्योंकि लगभग हर बड़े गुट के नेता इसके दायरे में आते हैं।

  • कफ सिरप कांड: 2000 करोड़ का अवैध कारोबार, ईडी की जांच से हिल गया नेटवर्क; कई सफेदपोश निगरानी में

    कफ सिरप कांड: 2000 करोड़ का अवैध कारोबार, ईडी की जांच से हिल गया नेटवर्क; कई सफेदपोश निगरानी में

    आशुतोष मिश्रा

    लखनऊ। नशीले कफ सिरप की तस्करी करने वाला यूपी आधारित एक बड़ा सिंडीकेट करीब 2000 करोड़ रुपये का अवैध कारोबार कर चुका है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की प्रारंभिक जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। एजेंसी के अनुसार, इस नेटवर्क की जड़ें इतनी गहरी हैं कि अधिकारी भी हैरान हैं। अब ईडी इस पूरे रैकेट को जोड़कर उन बाहुबलियों और सफेदपोश चेहरों को बेनकाब करने की तैयारी में है, जिनके संरक्षण में यह अवैध धंधा फलता-फूलता रहा।


    तीन राज्यों और विदेश तक फैला नेटवर्क

    सूत्रों की मानें तो ईडी ने एसटीएफ, एसआईटी, जिला पुलिस और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की अब तक की कार्रवाई का पूरा रिकॉर्ड जुटा लिया है। जांच में सामने आया कि इस सिंडीकेट ने तीन राज्यों और विदेश में करीब 2000 करोड़ रुपये की नशीली कफ सिरप की तस्करी की है।

    जांच एजेंसियां फर्जी फर्मों, शेल कंपनियों और आरोपियों की संपत्तियों की पड़ताल में जुटी हैं। कई संदिग्ध बैंक खातों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ मिली हैं, जिनका लिंक इस अवैध कारोबार से जोड़ा जा रहा है।


    बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह की तलाश, लुकआउट नोटिस जारी

    कफ सिरप रैकेट में आरोपी बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह की गिरफ्तारी के लिए एसटीएफ ने लुकआउट नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू की है। लगातार छापेमारी के बावजूद एसटीएफ अब तक उसके किसी ठिकाने तक नहीं पहुंच सकी है।

    सूत्रों के मुताबिक आलोक सिंह ने चार दिन पहले राजधानी की एक अदालत में आत्मसमर्पण की अर्जी भी दी है। वह गाजियाबाद की एफआईआर में नामजद है, जबकि लखनऊ में दर्ज केस की विवेचना में उसका नाम बढ़ाया गया है।


    माफिया की भूमिका पर सवाल, एसटीएफ की जांच भी कटघरे में

    इस रैकेट को संरक्षण देने वाले एक बाहुबली माफिया से भी अब तक पूछताछ न होने पर एसटीएफ की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि आरोपी माफिया की आरोपियों से गहरी सांठगांठ है, लेकिन फिर भी उसे तलब नहीं किया गया।


    दुबई कनेक्शन: विशाल सिंह की तलाश तेज

    जांच एजेंसियां उन कड़ियों को भी जोड़ रही हैं, जिनके जरिए आरोपी अमित सिंह टाटा और आलोक सिंह को दुबई ले जाया गया था। इस कड़ी में जौनपुर निवासी विशाल सिंह की तलाश की जा रही है। बताया जाता है कि विशाल सिंह एक पूर्व आईएएस अधिकारी का करीबी है और लखनऊ में रियल एस्टेट का बड़ा कारोबार करता है।

    सूत्रों के अनुसार, वह बाहुबली नेटवर्क की मदद से सुल्तानपुर रोड पर जमीनों की खरीद-फरोख्त करता है। ईडी और एसटीएफ को उससे दुबई कनेक्शन से जुड़ी अहम जानकारियों की उम्मीद है।


    जांच तेज, कई बड़े चेहरे बेनकाब होने की संभावना

    ईडी की लखनऊ और प्रयागराज टीमें इस मामले की गहराई से जांच कर रही हैं। माना जा रहा है कि जल्द ही कई बड़े नाम—राजनीति, पुलिस और कारोबार जगत—इस जांच की आंच में आ सकते हैं।

    कफ सिरप कांड सिर्फ एक अवैध दवा कारोबार नहीं, बल्कि एक बड़े संगठित अपराध की ओर इशारा करता है, जिसके पीछे ताकतवर संरक्षण और करोड़ों की समानांतर अर्थव्यवस्था खड़ी हुई है।

  • BJP Faces Internal Rift Over New Varanasi District President: वाराणसी BJP में जिलाध्यक्ष की नियुक्ति पर मचा घमासान, बड़े नेताओं की खींचतान तेज

    BJP Faces Internal Rift Over New Varanasi District President: वाराणसी BJP में जिलाध्यक्ष की नियुक्ति पर मचा घमासान, बड़े नेताओं की खींचतान तेज

    अश्विनी कुमार दुबे

    मुंबई। भारतीय जनता पार्टी की वाराणसी जिला इकाई में नए जिलाध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर चल रहा विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। लंबे समय से फैसले के टलने के पीछे संगठन के भीतर बढ़ती खींचतान और बड़े नेताओं के प्रभाव के चलते उनके प्रतिनिधियों को आगे बढ़ाने की कोशिशों को कारण माना जा रहा है। इससे 25–30 वर्षों से पार्टी के साथ खड़े पुराने कार्यकर्ताओं में उपेक्षा की भावना गहरी होती दिख रही है।

    पिंडरा विधायक व पूर्व कांग्रेसी नेता डाॅ अवधेश सिंह

    पूर्व केंद्रीय मंत्री महेंद्र नाथ पाण्डेय

    चार बड़े नेता – चार प्रतिनिधि, बढ़ी खींचतान

    सूत्रों के मुताबिक, भाजपा के वर्तमान एमएलसी और जिलाध्यक्ष हंसराज विश्वकर्मा अपने प्रतिनिधि तथा सपा से आए रामप्रकाश सिंह ‘विरु’ को जिलाध्यक्ष बनवाने की तैयारी में लगे हैं।

    वहीं, पिंडरा विधायक और कांग्रेस पृष्ठभूमि वाले डॉ. अवधेश सिंह, अपने करीबी पवन सिंह को दौड़ में सबसे आगे लाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

    योगी सरकार के प्रभावशाली मंत्री अनिल राजभर की पसंद संजय सिंह बताई जा रही है।
    इसके अलावा, पूर्व केंद्रीय मंत्री महेंद्र पांडेय भी अपने करीबी और विवादित भूमि कारोबारी अखंड प्रताप सिंह को अध्यक्ष बनाने की मशक्कत में जुटे हैं।

    चार नेताओं के चार अलग-अलग नामों की अनुशंसा ने संगठन में गुटबाजी को तेज कर दिया है, जिससे निर्णय लगातार अटकता जा रहा है।


    योगी सरकार में मंत्री अनिल राजभर

    पुराने कार्यकर्ताओं में बढ़ी उपेक्षा की भावना

    जिलाध्यक्ष पद की रेस में पूरी तरह नेताओं के प्रतिनिधियों के शामिल होने से उन समर्पित कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ गई है, जिन्होंने वर्षों तक पार्टी की जड़ों को सींचा है।
    सवाल यह उठ रहा है कि—

    क्या भाजपा अपने पुराने समर्पित कार्यकर्ताओं को फिर से दरकिनार करने जा रही है?

    पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच यह संदेश तेजी से फैल रहा है कि नेतृत्व केवल शक्ति केंद्रित गुटों और उनके प्रतिनिधियों को तरजीह दे रहा है, जबकि संगठन को जमीन पर मजबूत बनाने वाले पुराने चेहरे पीछे छूटते जा रहे हैं।


    योगी सरकार में मंत्री अनिल राजभर

    मोदी के संसदीय क्षेत्र में पद का महत्व बढ़ा दबाव

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र होने के कारण वाराणसी जिलाध्यक्ष का पद अत्यंत रणनीतिक माना जाता है।
    यही वजह है कि प्रदेश नेतृत्व किसी तरह की चूक नहीं करना चाहता। गुटों को साधने और विवाद को शांत करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन अलग-अलग नेताओं के दबाव में निर्णय बार-बार आगे बढ़ता जा रहा है।


    जल्द मिल सकता है नया अध्यक्ष, लेकिन कौन?

    संगठन सूत्रों का कहना है कि गहन खींचतान के बावजूद जल्द ही जिलाध्यक्ष की घोषणा हो सकती है।
    लेकिन बड़ा सवाल जस का तस है—

    • क्या पद नेताओं के प्रतिनिधियों को मिलेगा?
    • या तीन दशक से पार्टी का झंडा उठाने वाले किसी पुराने चेहरे को मौका मिलेगा?

    फिलहाल यह वाराणसी भाजपा की सबसे बड़ी राजनीतिक पहेली बनी हुई है।

  • Asaram bail cancellation Supreme Court Petition:आसाराम की जमानत रद्द करने की मांग: दुष्कर्म पीड़िता के पिता पहुंचे सुप्रीम कोर्ट

    Asaram bail cancellation Supreme Court Petition:आसाराम की जमानत रद्द करने की मांग: दुष्कर्म पीड़िता के पिता पहुंचे सुप्रीम कोर्ट

    शाहजहांपुर दुष्कर्म मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम की इंटरिम बेल रद्द कराने की मांग को लेकर पीड़िता के पिता अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं। मामले में शुक्रवार को सुनवाई होने की संभावना जताई जा रही है।

    पीड़िता के पिता ने कहा कि आसाराम के जेल से बाहर आने के बाद परिवार को जान का गंभीर खतरा है। उनके अनुसार, आसाराम के करीबी गुर्गे शहर में सक्रिय हैं और अक्सर धमकी भरे फोन कर रहे हैं।


    क्यों मांगी गई जमानत रद्द?

    शाहजहांपुर की रहने वाली पीड़िता ने आसाराम पर दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसके बाद अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
    हाल ही में आसाराम ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए 6 महीने की अंतरिम जमानत मांगी थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया था। इसके बाद वह जेल से बाहर आ गया।

    पीड़िता के पिता का कहना है—

    • “आसाराम पूरी तरह स्वस्थ है, घूम-फिर रहा है।”
    • “बीमारी का बहाना करके जमानत ली गई है।”
    • “उपचार कराना है तो जेल में भी कराया जा सकता है।”

    उनका कहना है कि दो वकील सुप्रीम कोर्ट में उनकी पैरवी करेंगे और वे अदालत से आसाराम की बेल निरस्त करने की मांग करेंगे।


    शहर में आसाराम के गुर्गे सक्रिय?

    पीड़िता के पिता ने आरोप लगाया कि—

    • आसाराम के समर्थक शहर में कई जगह ठिकाने बनाकर सक्रिय हैं
    • वे लगातार फोन पर धमकियां दे रहे हैं
    • कई बार आसपास नजर भी आते हैं

    परिवार को आशंका है कि आसाराम के बाहर रहने से उनकी सुरक्षा को बड़ा खतरा है।


    पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था

    परिवार की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए घर पर चार सिपाही तैनात हैं।
    पीड़िता के पिता के साथ दो गनर चलते हैं।
    एसपी राजेश द्विवेदी ने बताया—

    “परिवार की सुरक्षा का पूरा इंतजाम है। जरूरत पड़ने पर सुरक्षा और बढ़ाई जाएगी।”

  • Trump Maduro ultimatum Venezuela-US tension: अब देश छोड़ दो, वरना हालात और बिगड़ेंगे:डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति मादुरो को दिया अल्टीमेटम

    Trump Maduro ultimatum Venezuela-US tension: अब देश छोड़ दो, वरना हालात और बिगड़ेंगे:डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति मादुरो को दिया अल्टीमेटम

    अमेरिका और वेनेज़ुएला के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। सूत्रों के अनुसार, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को एक फोन कॉल में साफ शब्दों में चेतावनी दी है—“अब देश छोड़ दो, वरना हालात और बिगड़ेंगे।”

    जानकारी के मुताबिक यह बातचीत हाल ही में हुई, जिसमें ट्रंप ने मादुरो के शासन को “अवैध और दमनकारी” करार दिया। ट्रंप ने कहा कि वेनेज़ुएला की जनता “तानाशाही से मुक्ति चाहती है” और मादुरो को सत्ता छोड़कर देश से बाहर जाना चाहिए ताकि वहां लोकतांत्रिक प्रक्रिया बहाल हो सके।

    हालांकि मादुरो सरकार ने इस कथित कॉल को “फर्जी” बताया है और कहा है कि विपक्ष तथा अमेरिकी राजनीति में चल रहे चुनावी माहौल का फायदा उठाने के लिए इस तरह की कहानियां फैलाई जा रही हैं। वेनेज़ुएलाई अधिकारियों ने कहा कि मादुरो “जनता के समर्थन” से चुने गए हैं और किसी भी विदेशी दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं।

    ट्रंप और मादुरो के बीच संबंध हमेशा तनावपूर्ण रहे हैं। अपने कार्यकाल के दौरान भी ट्रंप प्रशासन ने वेनेज़ुएला पर कठोर आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे। अब इस नए विवाद से एक बार फिर लैटिन अमेरिका में भू-राजनीतिक उथल-पुथल बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह कॉल वास्तव में हुई है, तो आने वाले दिनों में वेनेज़ुएला में राजनीतिक हलचल और तेज हो सकती है। दूसरी ओर, मादुरो सरकार ने देश में “स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने” का भरोसा दिलाया है।

    शर्तों की वजह से अटका समाधान

    सूत्रों के मुताबिक बातचीत के दौरान मादुरो ने दो प्रमुख मांगें रखीं:

    1. वैश्विक स्तर पर पूर्ण माफी, ताकि उन पर और उनकी टीम पर लगे सभी मौजूदा आरोप हट जाएं।
    2. वेनेज़ुएला की सेना पर उनका नियंत्रण बना रहे, चाहे भविष्य में देश में स्वतंत्र चुनाव ही क्यों न हों।

    अमेरिका ने दोनों शर्तों को प categorically खारिज कर दिया और दोहराया कि मादुरो को “तुरंत पद छोड़ना चाहिए”। इसके बाद मादुरो प्रशासन ने बातचीत बहाल करने की कोशिश की, लेकिन अमेरिकी पक्ष की ओर से कोई जवाब नहीं मिला।

    रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति मादुरो शासन पर अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक और सैन्य दबाव बनाती है।


    कैरेबियन में बढ़ी हलचल

    बातचीत टूटने के बाद अमेरिका ने न केवल अपने बयान कड़े किए, बल्कि अपनी सैन्य गतिविधियां भी तेज कर दीं। ट्रंप ने संकेत दिए कि अमेरिकी सैन्य अभियान कभी भी शुरू हो सकते हैं। इसके बाद कैरेबियन क्षेत्र में अमेरिकी युद्धपोतों और लड़ाकू विमानों की गतिविधि अचानक बढ़ गई।

    अमेरिका का आरोप है कि वेनेज़ुएला से निकलने वाली ड्रग तस्करी की वजह से अमेरिकी समाज में लगभग 1 लाख मौतें हुई हैं।
    सीनेटर डेव मैकॉरमिक ने इसे “फेंटेनाइल, कोकीन और ओपिऑयड का युद्ध” बताते हुए मादुरो सरकार पर संकट बढ़ाने का आरोप लगाया।

    दूसरी ओर, आलोचकों ने अमेरिकी कार्रवाई को एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल बताया है। कांग्रेस एक विवादित डबल-टैप हमले की जांच भी कर रही है, जिसने बहस को और गरमा दिया है।


    जवाबी कदम और बढ़ता गतिरोध

    अमेरिका द्वारा एयरस्पेस प्रतिबंध लगाने के बाद वेनेज़ुएला ने कड़ा रुख अपनाते हुए कई विदेशी एयरलाइनों के परिचालन अधिकार रद्द कर दिए। मादुरो सरकार का कहना है कि अमेरिका की मौजूदा नीति “औपनिवेशिक आक्रामकता” जैसी है और वह कैरेबियन में तनाव बढ़ाकर वेनेज़ुएला को झुकाना चाहता है।

    एयरस्पेस बंद होने का असर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी पड़ा है—

    • कई रूट बदले गए,
    • यात्रियों को घंटों अतिरिक्त समय लगा,
    • और एयरलाइंस को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।

    अंतरराष्ट्रीय उड्डयन संगठनों ने हालात पर चिंता जताई है और स्थिति को “गंभीर और अस्थिर करने वाली” बताया है।


    आगे क्या?

    अमेरिका और वेनेज़ुएला के रिश्ते जिस दिशा में बढ़ रहे हैं, उससे विशेषज्ञों को आशंका है कि कैरेबियन क्षेत्र आने वाले हफ्तों में नई भू-राजनीतिक टकराहट का केंद्र बन सकता है।
    अभी तक न तो कॉल की आधिकारिक पुष्टि हुई है और न ही किसी पक्ष ने पीछे हटने के संकेत दिए हैं।