मुंबई। प्रॉपटाइगर डॉटकॉम की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी-मार्च 2025 में भारत के 8 प्रमुख शहरों में घर बिक्री में 19% की गिरावट आई। प्रमुख कारण रहे – संपत्ति की बढ़ती कीमतें, आर्थिक अनिश्चितता और जियोपॉलिटिकल तनाव।
🔹 बिक्री में शहरवार स्थिति: बेंगलुरु: 13% वृद्धि (11,731 यूनिट्स)
चेन्नई: 8% वृद्धि (4,774 यूनिट्स)
घटती बिक्री:
मुंबई (-26%), पुणे (-25%), हैदराबाद (-26%), अहमदाबाद (-17%), दिल्ली-एनसीआर (-16%), कोलकाता (-1%)
🔹 नए प्रोजेक्ट लॉन्च: कुल 10% की गिरावट
सबसे अधिक गिरावट:
पुणे (-38%), हैदराबाद (-33%), अहमदाबाद (-23%)
वृद्धि:
बेंगलुरु (82%), कोलकाता (138%), दिल्ली-एनसीआर (16%)
🔹 प्रमुख टिप्पणी: प्रॉपटाइगर डॉटकॉम के सीईओ ध्रुव अग्रवाल ने कहा कि यदि RBI ने रेपो रेट में कटौती न की होती, तो गिरावट और अधिक होती।
भिवंडी: भिवंडी शहर के पास कारिवली ग्राम पंचायत क्षेत्र में टोरेंट पावर कंपनी ने सवा तीन लाख रुपये की बिजली चोरी का मामला उजागर किया है। यह बिजली वितरण एवं वसूली का कार्य संभाल रही कंपनी है।
जांच के दौरान सामने आया कि हनुमान मंदिर के पास स्थित विश्वनाथ जगन्नाथ पाटील ने अपने घर के पास से गुजर रही टोरेंट पावर की केबल से अवैध रूप से एक साल तक कनेक्शन जोड़कर बिजली का उपयोग किया। उन्होंने बिना बिजली मीटर के सीधे केबल जोड़कर 10329 यूनिट बिजली की खपत की, जिसकी कुल अनुमानित कीमत ₹3,37,974 बताई गई है। इस गंभीर अनियमितता के बाद शांतिनगर पुलिस स्टेशन में संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस आगे की जांच कर रही है।
“जो पार्टी कभी देश की पहचान थी, वह आज खुद को पहचानने की जद्दोजहद में है।”
अश्विनी कुमार दुबे। राष्ट्रीय स्वाभिमान
नई दिल्ली। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Indian National Congress – INC), देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी, आज गहरे आत्ममंथन के दौर से गुजर रही है। वह पार्टी जिसने स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व किया, संविधान निर्माण में अहम भूमिका निभाई और आज़ादी के बाद दशकों तक सत्ता में रही — आज उसे देश की राजनीति में खुद के लिए जगह बनाने में संघर्ष करना पड़ रहा है।”यह केवल एक पार्टी नहीं, यह तो उस सपने का नाम है जिसने गुलामी की जंजीरों को तोड़ने की हिम्मत की थी…”जब हम कांग्रेस का नाम लेते हैं, तो केवल एक राजनीतिक दल की छवि आंखों में नहीं उभरती है, वो स्वतंत्रता की पहली चीख, वो चर्खा, वो नमक सत्याग्रह, और वो तिरंगे की पहली लहराती हुई लकीर। कांग्रेस कोई दफ्तरों में बंद बैठा संगठन नहीं था; वह तो गाँव-गाँव, दिल-दिल में फैला एक आंदोलन था — एक जुनून, एक सपना, एक विचार।
सत्ता की शिखर से नीचे तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 1885 में हुई थी और यह जल्दी ही देश की आज़ादी की लड़ाई की धुरी बन गई। महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस जैसे नेताओं ने कांग्रेस को केवल एक राजनीतिक संगठन नहीं, बल्कि एक जनआंदोलन बना दिया।
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आज़ादी के बाद, 1952 से लेकर 1989 तक, कांग्रेस ने अधिकांश समय केंद्र में सत्ता संभाली। यह पार्टी न केवल सरकार थी, बल्कि शासन की परिभाषा थी। इंदिरा गांधी की ताकतवर नेतृत्व शैली, राजीव गांधी की तकनीकी दृष्टि और नरसिम्हा राव के आर्थिक सुधार आज भी याद किए जाते हैं। लेकिन 1990 के दशक के बाद कांग्रेस का राजनीतिक प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगा। मंडल-कमंडल राजनीति, क्षेत्रीय दलों का उदय और अंततः भारतीय जनता पार्टी (BJP) का उभार कांग्रेस के लिए चुनौती बनते गए।
वर्तमान संकट: नेतृत्व, रणनीति और संगठन की त्रासदी नेतृत्व की अस्पष्टता कांग्रेस की सबसे बड़ी समस्या उसका नेतृत्व बन चुका है। राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद छोड़ा, फिर भारत जोड़ो यात्रा निकाली, लेकिन उनके राजनीतिक दृष्टिकोण में स्थिरता का अभाव रहा है। कांग्रेस कार्यकर्ता अभी भी असमंजस में हैं कि पार्टी का असली नेता कौन है — सोनिया गांधी, राहुल गांधी या फिर सिर्फ एक अंतरिम व्यवस्था?
संगठन की जड़ता कांग्रेस पार्टी में लंबे समय से कोई गंभीर संगठनात्मक चुनाव नहीं हुए। जमीनी स्तर पर कार्यकर्ता असंगठित हैं, बूथ स्तर पर मौजूदगी कमजोर हो गई है, और नेताओं के बीच गुटबाजी आम हो चुकी है। कई राज्यों में पार्टी के पास कोई मज़बूत चेहरा ही नहीं है।
राजनीतिक रणनीति का अभाव बीजेपी जहां आक्रामक प्रचार, सोशल मीडिया और जातीय समीकरणों का खुलकर इस्तेमाल करती है, वहीं कांग्रेस अब भी पारंपरिक राजनीति में उलझी हुई दिखाई देती है। चुनावी घोषणापत्र तो आते हैं, लेकिन उन्हें जनता तक ले जाने का तंत्र विफल है।
राज्यों में स्थिति: कुछ उम्मीदें, पर ज़्यादा निराशा कई राज्यों में कांग्रेस को सत्ता में आने का अवसर मिला, जैसे राजस्थान, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश। लेकिन इन राज्यों में भी गुटबाजी और नेतृत्व संघर्ष ने पार्टी की छवि को धूमिल किया है। पंजाब में आम आदमी पार्टी का उदय और मध्य प्रदेश में सिंधिया जैसे नेताओं के बाहर जाने से नुकसान हुआ।
कुछ सकारात्मक बातें भी हैं — छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल ने लोकप्रियता हासिल की है। लेकिन ये अपवाद हैं, नियम नहीं।
क्षेत्रीय दलों की मार और गठबंधन की राजनीति एक समय था जब कांग्रेस देशभर में सर्वव्यापी थी। लेकिन आज उसके पारंपरिक वोट बैंक पर क्षेत्रीय दलों का कब्जा हो चुका है। यूपी में समाजवादी पार्टी और बसपा, बिहार में राजद-नीतीश, बंगाल में तृणमूल, दक्षिण में डीएमके और टीआरएस जैसे दल कांग्रेस के विकल्प बन चुके हैं।
गठबंधन की राजनीति में कांग्रेस अब “बड़ा भाई” नहीं रही। विपक्षी एकता की बात होती है तो कांग्रेस को बराबरी का दर्जा देना बाकी दलों को मुश्किल लगता है। ‘INDIA’ गठबंधन एक पहल थी, लेकिन उसमें भी आपसी समन्वय की कमी दिखी।
भारत जोड़ो यात्रा: एक नई उम्मीद? 2022 में राहुल गांधी द्वारा शुरू की गई भारत जोड़ो यात्रा ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं में एक नई ऊर्जा फूंकी। यह यात्रा सामाजिक मुद्दों, आर्थिक असमानता और सांप्रदायिकता के खिलाफ एक संदेश लेकर चली। कई जगहों पर इसे जनता का समर्थन भी मिला। लेकिन यह यात्रा एक आंदोलन के रूप में थी, न कि चुनावी हथियार।
जब तक इस ऊर्जा को चुनावी रणनीति और संगठनात्मक बदलाव में नहीं बदला जाएगा, तब तक सिर्फ यात्राओं से बदलाव संभव नहीं।
क्या पुनरुत्थान संभव है? बिलकुल, लेकिन इसके लिए कांग्रेस को नीचे दिए गए कुछ ठोस कदम उठाने होंगे:
नया और स्पष्ट नेतृत्व: कांग्रेस को तय करना होगा कि नेतृत्व किसके हाथ में होगा, और वह व्यक्ति न केवल पार्टी के भीतर, बल्कि जनता के बीच भी विश्वसनीय और प्रभावशाली हो। संगठन का पुनर्गठन: जमीनी कार्यकर्ताओं को फिर से जोड़ने, बूथ स्तर पर मज़बूती और युवा नेतृत्व को बढ़ावा देना जरूरी है।
स्पष्ट वैकल्पिक एजेंडा: सिर्फ बीजेपी का विरोध करने से कुछ नहीं होगा। कांग्रेस को एक ठोस नीति, विज़न और योजनाओं के साथ सामने आना होगा — शिक्षा, रोजगार, महंगाई, स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर।
डिजिटल युग की राजनीति: सोशल मीडिया, डिजिटल कैंपेन, डेटा एनालिटिक्स जैसे आधुनिक चुनावी टूल्स को अपनाना होगा। 21वीं सदी की राजनीति 20वीं सदी के तरीकों से नहीं जीती जा सकती।
गांधी का सत्य, नेहरू का स्वप्न कांग्रेस की आत्मा को समझने के लिए इतिहास की किताबें नहीं, देश के ज़ख्मों को पढ़ना होता है। गांधी जी जब चंपारण के खेतों में पहुंचे, तो उनके साथ एक पूरी सोच आई — सत्याग्रह की। नेहरू जब लाल किले से बोले, तो केवल भाषण नहीं दिया, आज़ाद भारत की आत्मा को स्वर दिया।
आज भी जब हम ‘भारत’ कहते हैं, उसमें कांग्रेस का सपना गूंजता है।
संघर्षों की वो गाथा जो मिट नहीं सकती कांग्रेस ने सिर्फ सत्ता में रहना नहीं सीखा — इसने जेलों की दीवारें देखीं, गोली खाई, जूते घिसे, और फिर भी मुस्कराते हुए कहा “देश सबसे पहले है।” आज भले ही टीवी डिबेट में कांग्रेस को ‘खत्म होती पार्टी’ कहा जाए, लेकिन सच यह है कि जो पार्टी 130 करोड़ लोगों की भावनाओं से कभी जुड़ी थी.
वह एक चुनाव में हारी हुई हो सकती है — पर मिट नहीं सकती
आज की हालत: धुंधला होता आदर्श, लेकिन बुझा हुआ दीप नहीं है। आज कांग्रेस एक आत्ममंथन के दौर से गुजर रही है। कभी-कभी लगता है कि पार्टी अपने ही बनाए उस आईने को पहचान नहीं पा रही, जिसमें खुद का अक्स सबसे सुंदर था। नेतृत्व असमंजस में है, कार्यकर्ता हतोत्साहित हैं, और जनता का भरोसा डगमगाया है। मगर जब-जब इस पार्टी ने खुद को भीतर से झांका है, तब-तब नए सवेरे ने दस्तक दी है।
भारत जोड़ो यात्रा: एक कविता, एक पुकार राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ केवल एक राजनीतिक आयोजन नहीं थी — वह तो दिल से दिल को जोड़ने की कवायद थी। वो पाँव जो कन्याकुमारी से कश्मीर तक चले, वो सड़कें जिन्होंने देश की धड़कनों को महसूस किया — वहां केवल नारे नहीं लगे, वहां लोगों की कहानियाँ सुनी गईं।
क्या यही वह राह है जिससे कांग्रेस फिर अपने मूल विचार — “सेवा, समर्पण और समभाव” की ओर लौट सकती है?
कांग्रेस: एक बीज जो हर पीढ़ी में उगता है भले ही आज यह बीज धूप से झुलसा हो, भले ही इस पर शक के बादल हों, मगर यह बीज मिट्टी में गहराई से गड़ा हुआ है।
हर वो युवा जो संविधान पढ़ता है, हर वो बच्चा जो “आजादी” शब्द बोलता है, हर वो औरत जो अपने अधिकारों के लिए लड़ती है — वो कांग्रेस की ही कहानियों का कोई ना कोई अध्याय है।
निष्कर्ष: कांग्रेस एक पार्टी नहीं, एक प्रतीक है इस दौर में जब राजनीति केवल सत्ता की कुर्सी बन गई है, कांग्रेस अब भी उस आदर्श की तलाश में है, जहां राजनीति का मतलब था — “जनसेवा”, ना कि “जनमत प्रबंधन”।
कांग्रेस को फिर से सिर्फ वोट पाने वाली पार्टी नहीं, विचार रचने वाली संस्था बनना होगा। यह काम सिर्फ जमीनी स्तर से लेकर ऊपर तक के संगठन को करना होगा बिना किसी भेद-भाव और गुटबाजी के।
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में बवाल, बांग्लादेशी उपद्रवियों पर शक
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में वक्फ (संशोधन) अधिनियम के विरोध में भड़की हिंसा ने गंभीर रूप ले लिया है। 12 और 13 अप्रैल 2025 को सुत्ती, धूलियान और जंगीपुर क्षेत्रों में हुए प्रदर्शन हिंसक हो गए, जिसमें अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है और कई घायल हुए हैं। मृत्यु और गिरफ्तारी: हिंसा में चंदन दास (40) और उनके पिता हरगोविंद दास (70) की भीड़ द्वारा हत्या कर दी गई। पुलिस ने अब तक 200 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है और 11 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। पलायन की खबरें: हिंसा के बाद, कुछ हिंदू परिवारों के मालदा जिले की ओर पलायन की खबरें सामने आईं। हालांकि, पुलिस ने सुरक्षा प्रदान कर कई परिवारों को वापस उनके घरों में पहुंचाया है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप: समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी ने आरोप लगाया कि बीजेपी माहौल बिगाड़ने के लिए हिंदुओं का पलायन करवा रही है। वहीं, बीजेपी ने टीएमसी सांसद खलीलुर्रहमान पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है। सीमा पार साजिश की आशंका: गृह मंत्रालय की प्रारंभिक जांच में हिंसा में बांग्लादेशी उपद्रवियों की संलिप्तता की आशंका जताई गई है। इस पर केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है और सीमा सुरक्षा बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। दक्षिण 24 परगना में भी हिंसा: मुर्शिदाबाद के बाद, दक्षिण 24 परगना के भांगर इलाके में भी वक्फ अधिनियम के विरोध में हिंसक प्रदर्शन हुए, जिसमें कई पुलिस वाहन जला दिए गए और कई लोग घायल हुए।
हनुमान जन्मोत्सव पर देशभर में हुआ धार्मिक आयोजन। हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर देशभर में मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
आईपीएल 2025: लखनऊ बनाम गुजरात मुकाबला और आईपीएल 2025 में आज लखनऊ सुपर जायंट्स और गुजरात टाइटन्स के बीच रोमांचक मुकाबला खेला जाएगा।
आगरा में करणी सेना का शक्ति प्रदर्शन हुआ तेज। आगरा में करणी सेना राणा सांगा जयंती मना रही है। इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
तहव्वुर राणा से NIA की पूछताछ जारी है। 26/11 मुंबई हमलों के आरोपी तहव्वुर राणा से NIA की पूछताछ जारी है। सूत्रों के अनुसार, राणा सहयोग नहीं कर रहे हैं और बीमारी का बहाना बना रहे हैं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की विदेश यात्रा से हुई वापसी । राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पुर्तगाल और स्लोवाकिया की चार दिवसीय राजकीय यात्रा के बाद दिल्ली वापस लौट आई हैं।
दिल्ली में धूल भरी आंधी से जनजीवन प्रभावित हुआ। दिल्ली में धूल भरी आंधी के कारण कई इलाकों में पेड़ गिर गए और यातायात प्रभावित हुआ।
पटना में NSUI का प्रदर्शन, कन्हैया कुमार को हिरासत में लिया गया । पटना में NSUI द्वारा वक्फ कानून के विरोध में प्रदर्शन किया गया, जिसमें कन्हैया कुमार को पुलिस ने हिरासत में लिया।
मुंबई में वक्फ कानून के विरोध में प्रदर्शन तेज हुई। मुंबई में वक्फ कानून के विरोध में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने कार्रवाई की।
मुंबई में टैंकर एसोसिएशन की हड़ताल जारी है। मुंबई में टैंकर एसोसिएशन की हड़ताल के कारण पानी की आपूर्ति प्रभावित हुई है।
बिहार में वक्फ कानून पर सियासी घमासान जारी है। बिहार में वक्फ कानून को लेकर सियासी घमासान जारी है, जिसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच तीखी बयानबाजी हो रही है।
नालासोपारा पूर्व: विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल गोरेगांव प्रखंड के सौजन्य से श्री हनुमान जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में शनिवार को एक भव्य श्री राम रथ शोभायात्रा का आयोजन किया गया। इस शोभायात्रा में क्षेत्र के सनातनी महिला, पुरुष और बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। भक्ति भाव से ओतप्रोत श्रद्धालुओं ने राम-हनुमान के जयघोष, भजन और पदयात्रा के माध्यम से भक्ति की भावना का प्रदर्शन किया।
शाम 5 बजे ओसवाल नगर स्थित इच्छापूर्ति बालाजी हनुमान मंदिर से शुरू हुई शोभायात्रा, सीताराम नगर, जिजाई नगर, मोरेगांव, नारायण नगर और प्रगति नगर होते हुए पुनः ओसवाल नगर में समाप्त हुई।
कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला कार्यवाह अंकित उपाध्याय और स्थानीय विधायक राजन नाईक द्वारा श्रीराम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की झांकी की आरती से हुआ। इस अवसर पर क्षेत्र की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के अध्यक्षों ने भी अपनी उपस्थिति से शोभा बढ़ाई और शुभकामनाएं दीं।
ढोल-ताशों, डीजे संगीत और बाल स्वयंसेवकों द्वारा प्रस्तुत दंड प्रदर्शन ने शोभायात्रा को और भी आकर्षक बना दिया। मार्ग में स्थानीय रहवासियों ने पुष्पवर्षा और जलपान के माध्यम से श्रद्धालुओं का स्वागत किया।
कार्यक्रम की सफलता में स्थानीय पुलिस प्रशासन का विशेष सहयोग रहा, जिससे शोभायात्रा शांतिपूर्ण और भव्य रूप से संपन्न हो सकी। आयोजन समिति ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी हिंदू धर्मावलंबियों का आभार व्यक्त किया है।
कामन में हनुमान जन्मोत्सव पर भव्य शोभायात्रा एवं कवि सम्मेलन सम्पन्न
वसई पूर्व: हनुमान जन्मोत्सव के शुभ अवसर पर वसई पूर्व के कामन क्षेत्र में एक भव्य शोभायात्रा तथा कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। रविवार प्रातः 11:00 बजे, कोल्ही गांव स्थित गांवदेवी मंदिर से भगवा ध्वज थामे रामभक्तों की विशाल जनसमूह यात्रा प्रारंभ हुई। भजन-कीर्तन और जयकारों के साथ यह यात्रा लगभग 7 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए कामन के श्रीराम मंदिर तक पहुंची।
यात्रा के उपरांत श्री राम सेवा समिति की ओर से महाप्रसाद का आयोजन किया गया, जिसके बाद कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि श्री सदाशिव चतुर्वेदी ‘मधुर’ ने की तथा संचालन उमेश मिश्र ‘प्रभाकर’ ने किया।
इस अवसर पर युवा ओज कवि राजेश ‘अल्हड़ असरदार’ के संयोजन में सुप्रसिद्ध कवियों—डाॅ. मृदुल ‘महक’, अन्नपूर्णा ‘सरगम’, तथा रामकृष्ण गुप्ता ने अपनी शानदार कविताओं से उपस्थित जनसमूह को रससिक्त किया।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख अतिथियों में:
दिनेश म्हात्रे
जीत सिंह
सुनील मिश्रा
बाला सकपाल
तथा श्रीराम सेवा समिति के अध्यक्ष श्री फूलचंद जी प्रजापति शामिल रहे।
शोभायात्रा का आयोजन सकल हिंदू समाज के प्रमोद मिश्रा, अश्विन कुमार, शिवम यादव, विमलेश दुबे, दिनेश विश्वकर्मा, निलेश दुबे, बिपिन पांडे, आकाश हजारे, राहुल दुबे, निशांत भुसाले और रतन पटेल द्वारा किया गया।
भीषण गर्मी के बावजूद, हजारों की संख्या में रामभक्त महिलाएं, पुरुष और बच्चे इस यात्रा में सम्मिलित हुए। यात्रा मार्ग पर जलपान व शरबत की व्यवस्था स्थानीय व्यापारियों और ग्रामवासियों द्वारा की गई थी। अंत में राजेश दुबे ने सभी सहयोगियों और उपस्थित जनसमूह का आभार व्यक्त किया।
भिवंडी: भिवंडी-निजामपुर शहर महानगरपालिका के प्रशासक तथा आयुक्त अनमोल सागर की अध्यक्षता में दिनांक 8 अप्रैल 2025 को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। यह बैठक मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी 100 दिवसीय कार्य योजना कार्यक्रम के अंतर्गत, महानगरपालिका क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से बुलाई गई थी।
इस बैठक में भिवंडी क्षेत्र के औद्योगिक संगठनों, गैर-सरकारी संस्थाओं और निजी प्रतिष्ठानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक का उद्देश्य था:
औद्योगिक नीति के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु अनुकूल वातावरण तैयार करना,
औद्योगिक विकास में आ रही वास्तविक समस्याओं पर चर्चा करना,
सीएसआर फंड के माध्यम से शहर के सौंदर्यीकरण में सहयोग लेना,
और ‘माझी भिवंडी, स्वच्छ भिवंडी’ अभियान को और प्रभावी बनाना।
बैठक में कुल 52 संगठनों के प्रतिनिधियों ने सहभाग लिया। इस अवसर पर अतिरिक्त आयुक्त ने बैठक की प्रस्तावना प्रस्तुत की, जबकि आयुक्त अनमोल सागर ने आयोजन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।
सभी प्रतिनिधियों ने अपनी ओर से सुधारों और अपेक्षाओं से संबंधित ज्ञापन प्रस्तुत किए, जिनका आयुक्त ने उत्तर देकर समाधान का आश्वासन दिया। साथ ही, उन्होंने यह भी अपेक्षा जताई कि शहर के विकास में सभी प्रतिनिधि मिलकर सहयोग करें।
भिवंडी: भिवंडी-निजामपुर शहर महानगरपालिका के प्रशासक तथा आयुक्त अनमोल सागर की अध्यक्षता में दिनांक 8 अप्रैल 2025 को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। यह बैठक मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी 100 दिवसीय कार्य योजना कार्यक्रम के अंतर्गत, महानगरपालिका क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से बुलाई गई थी। इस बैठक में भिवंडी क्षेत्र के औद्योगिक संगठनों, गैर-सरकारी संस्थाओं और निजी प्रतिष्ठानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक का उद्देश्य औद्योगिक नीति के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु अनुकूल वातावरण तैयार करना, औद्योगिक विकास में आ रही वास्तविक समस्याओं पर चर्चा करना, सीएसआर फंड के माध्यम से शहर के सौंदर्यीकरण में सहयोग लेना, और ‘माझी भिवंडी, स्वच्छ भिवंडी’ अभियान को और प्रभावी बनाना।
बैठक में कुल 52 संगठनों के प्रतिनिधियों ने सहभाग लिया। इस अवसर पर अतिरिक्त आयुक्त ने बैठक की प्रस्तावना प्रस्तुत की, जबकि आयुक्त अनमोल सागर ने आयोजन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। सभी प्रतिनिधियों ने अपनी ओर से सुधारों और अपेक्षाओं से संबंधित ज्ञापन प्रस्तुत किए, जिनका आयुक्त ने उत्तर देकर समाधान का आश्वासन दिया। साथ ही, उन्होंने यह भी अपेक्षा जताई कि शहर के विकास में सभी प्रतिनिधि मिलकर सहयोग करें। बैठक में मंच पर अतिरिक्त आयुक्त (1): देविदास पवार, अतिरिक्त आयुक्त (2): विठ्ठल डाके, उपायुक्त (मुख्यालय): रोहिदास दोरकुळकर, उपायुक्त (समाज कल्याण): विक्रम दराडे, सहायक आयुक्त (स्वास्थ्य): शैलेश दोंदे, सहायक आयुक्त (प्रशासन): डॉ. अनुराधा बाबर, समाज कल्याण विभाग प्रमुख: नितेश चौधरी और अन्य कर्मचारीगण उपस्थित रहे।
भिवंडी: भिवंडी के पास खोणी ग्राम पंचायत क्षेत्र में भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की जयंती के उत्सव के दौरान एक युवक द्वारा नंगी तलवारें लहराकर आतंक फैलाने की सनसनीखेज घटना सामने आई है। आरोपी की पहचान देविदास बालाराम पाटील के रूप में हुई है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, सिद्धार्थनगर बस्ती, खोणी गांव में रविवार रात आंबेडकर जयंती के सार्वजनिक समारोह का आयोजन किया गया था। लगभग सौ से अधिक महिला-पुरुष ऑर्केस्ट्रा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से जश्न मना रहे थे। कार्यक्रम की वजह से कुछ समय के लिए सड़क बंद की गई थी।इसी दौरान बाइक से पहुंचे देविदास पाटील ने सड़क बंद होने पर जातिसूचक गालियां देते हुए हंगामा शुरू कर दिया। थोड़ी देर बाद वह अपने घर से दो नंगी तलवारें लेकर मौके पर लौटा और तलवारें लहराकर लोगों पर हमला करने की कोशिश की। इससे कार्यक्रम स्थल पर अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया।
हालांकि, समय रहते गांव के युवक सागर पाटील ने साहस दिखाते हुए देविदास से तलवारें छीन लीं और स्थिति को काबू में किया। इस संबंध में स्थानीय निवासी बालाराम जाधव की शिकायत पर निजामपुर पुलिस थाने में देविदास पाटील के खिलाफ भारतीय दंड संहिता, दहशत फैलाने और अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपी फिलहाल फरार है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी है। घटना के बाद इलाके में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। आंबेडकरवादी समाज और सामाजिक संगठनों ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए आरोपी की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है।