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  • The Freedom Trail Mumbai: मुंबई का फ्रीडम ट्रेल खुद आज़ादी को तरस रहा, आज़ादी के रास्ते पर हॉकर्स का कब्ज़ा

    The Freedom Trail Mumbai: मुंबई का फ्रीडम ट्रेल खुद आज़ादी को तरस रहा, आज़ादी के रास्ते पर हॉकर्स का कब्ज़ा

    मुंबई। भारत की आज़ादी की कहानी को ज़मीन पर उतारने वाला मुंबई का ‘फ्रीडम ट्रेल’(Mumbai Freedom Trail) आज खुद बेबसी की तस्वीर बन चुका है। जिस ऐतिहासिक पैदल मार्ग को देश के स्वतंत्रता संग्राम, खासकर अगस्त क्रांति मैदान (ग्वालिया टैंक) से जुड़े Quit India Movement की स्मृति को संजोने के लिए विकसित किया गया था, वही ट्रेल आज हॉकर्स, अतिक्रमण और अव्यवस्था का शिकार है।

    आजादी के नायकों की विरासत को दर्शाने वाला यह क्यूरेटेड वॉकिंग रूट आज भी हॉकर्स से आज़ाद नहीं हो पाया है। जगह-जगह ठेले, अस्थायी दुकानें और अवैध कब्ज़े न सिर्फ पैदल यात्रियों की राह रोक रहे हैं, बल्कि इस ऐतिहासिक धरोहर की गरिमा पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं।

    विडंबना यह है कि जिस रास्ते ने देश को “अंग्रेज़ों भारत छोड़ो” का नारा दिया, उसी रास्ते पर आज नागरिकों को चलने की आज़ादी तक नहीं मिल रही। पर्यटक, इतिहास प्रेमी और स्थानीय नागरिक—सभी को संकरे रास्तों, भीड़ और गंदगी से जूझना पड़ता है। सूचना पट्टिकाएं, विरासत चिन्ह और गाइडेड साइनबोर्ड कई जगह हॉकर्स के पीछे छिप चुके हैं।

    नगर निगम और प्रशासन ने फ्रीडम ट्रेल को सांस्कृतिक और पर्यटन विरासत के रूप में विकसित करने के बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों को आईना दिखा रही है। सवाल यह है कि जब मुंबई स्मार्ट सिटी, हेरिटेज सिटी और टूरिज़्म हब बनने की बात करती है, तो क्या उसकी आज़ादी की सबसे बड़ी कहानी को यूं ही अतिक्रमण के हवाले छोड़ दिया जाएगा?

    आज ज़रूरत इस बात की है कि फ्रीडम ट्रेल को सिर्फ इतिहास की निशानी नहीं, बल्कि सच में ‘फ्री’ बनाया जाए।

    अगर यही हाल रहा, तो आने वाली पीढ़ियां आज़ादी की कहानी किताबों में पढ़ेंगी—और मुंबई में उसका रास्ता तलाशती रह जाएंगी।

  • PM E-Bus Service Scheme:महाराष्ट्र में पीएम-ई-बस सेवा योजना कागज़ों तक सीमित, एक भी ई-बस सड़क पर नहीं उतरी: सांसद वर्षा गायकवाड़

    PM E-Bus Service Scheme:महाराष्ट्र में पीएम-ई-बस सेवा योजना कागज़ों तक सीमित, एक भी ई-बस सड़क पर नहीं उतरी: सांसद वर्षा गायकवाड़

    मुंबई। केंद्र की मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना (PM E-Bus Service Scheme) महाराष्ट्र में अब तक केवल कागज़ों तक ही सीमित दिखाई दे रही है। इस योजना के तहत राज्य के 22 शहरों के लिए 1,609 इलेक्ट्रिक बसों को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 1,411 बसों के लिए टेंडर भी जारी हो चुके हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक एक भी ई-बस प्रत्यक्ष सेवा में शामिल नहीं हुई है।

    यह जानकारी कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ द्वारा लोकसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने दी है। सांसद वर्षा गायकवाड़ ने महाराष्ट्र में पीएम-ई-बस सेवा योजना के वास्तविक क्रियान्वयन को लेकर सरकार को घेरा और योजना की प्रगति पर गंभीर सवाल उठाए।

    उन्होंने पूछा कि महाराष्ट्र में इस योजना के अंतर्गत कितने शहर शामिल हैं, कितनी इलेक्ट्रिक बसों को अब तक मंजूरी दी गई है, कितनी बसों के लिए निविदाएं निकाली गई हैं और कितनी बसें वास्तव में सेवा में आई हैं। साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या केंद्र सरकार ने राज्य में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, बस डिपो की तैयारी और बिजली की उपलब्धता की पर्याप्त समीक्षा की है या नहीं, और इस योजना से यात्रियों को वास्तविक रूप से क्या लाभ मिलने वाला है।

    केंद्र सरकार की ओर से नगर विकास मंत्रालय ने लिखित जवाब में बताया कि पीएम-ई-बस सेवा योजना के तहत ‘बिहाइंड-द-मीटर’ (BTM) इलेक्ट्रिकल और सिविल डिपो इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए 370.49 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इनमें से अब तक 200.18 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं।

    मंत्रालय के अनुसार, इस योजना के तहत प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन कमेटी (PMEC) और सेंट्रल स्टियरिंग एंड अप्रूवल कमेटी (CSAC) के माध्यम से राज्यों द्वारा भेजे गए प्रस्तावों का मूल्यांकन किया जाता है। पीएम-ई-बस सेवा योजना का उद्देश्य देश के 100 से अधिक शहरों में 10,000 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें शुरू करना है, ताकि शहरी परिवहन को स्वच्छ, स्मार्ट और समावेशी बनाया जा सके।

    इस योजना में 3 से 40 लाख आबादी वाले शहरों, 3 लाख से कम आबादी वाले राज्यों की राजधानियों तथा पूर्वोत्तर और पर्वतीय क्षेत्रों की राजधानियों को शामिल किया गया है। सरकार का दावा है कि इससे छोटे शहरों और उन इलाकों में रहने वाले यात्रियों को बड़ा लाभ मिलेगा, जहां संगठित बस सेवा उपलब्ध नहीं है।

    हालांकि, सांसद वर्षा गायकवाड़ ने महाराष्ट्र में अब तक एक भी ई-बस के सेवा में न आने को लेकर योजना के जमीनी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े किए हैं और इसे सरकार की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न बताया है।

  • RSS News :आरएसएस 100 वर्ष कार्यक्रम में मोहन भागवत का स्पष्ट संदेश-                                                                 संघ न तो पैरामिलिट्री है, न राजनीतिक पार्टी

    RSS News :आरएसएस 100 वर्ष कार्यक्रम में मोहन भागवत का स्पष्ट संदेश- संघ न तो पैरामिलिट्री है, न राजनीतिक पार्टी

    मुंबई। महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के “संघ यात्रा के 100 वर्ष–नए क्षितिज” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने संघ की भूमिका और विचारधारा को लेकर उठने वाली भ्रांतियों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि संघ को दूर से देखने पर गलतफहमी हो सकती है, इसलिए संघ को समझने के लिए उसकी शाखाओं और स्वयंसेवकों के जीवन को देखना जरूरी है।

    मोहन भागवत ने स्पष्ट किया कि संघ के स्वयंसेवक रूट मार्च करते हैं, लाठी-काठी सीखते हैं और घोष की धुन बजती है, लेकिन संघ न तो कोई पैरामिलिट्री संगठन है, न अखाड़ा और न ही संगीतशाला। उन्होंने कहा कि संघ में राजनीति से जुड़े स्वयंसेवक जरूर हैं, लेकिन संघ स्वयं कोई राजनीतिक पार्टी नहीं है।

    उन्होंने जोर देकर कहा कि संघ का काम अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे देश और समाज के लिए है। संघ न तो किसी के विरोध में बना है और न ही किसी से प्रतिस्पर्धा के लिए। संघ को न लोकप्रियता चाहिए और न सत्ता, उसका उद्देश्य केवल समाज को संगठित करना है।

    “संघ को समझना है तो शाखा देखिए”
    आरएसएस प्रमुख ने कहा कि संघ को समझने के लिए उसकी शाखाओं, कार्यकर्ताओं के परिवारों और उनके सामाजिक व्यवहार को देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी देश का उत्थान या पतन समाज की एकता पर निर्भर करता है, इसका उदाहरण अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन और जर्मनी जैसे देशों के इतिहास से लिया जा सकता है।

    हिंदू शब्द और समाज पर विचार
    मोहन भागवत ने कहा कि ‘हिंदू’ को केवल धर्म या पूजा-पद्धति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह किसी एक समुदाय का नाम नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन है। उन्होंने कहा कि भारत धर्म-प्राण देश है, जहां सबको साथ लेकर चलने की परंपरा रही है।

    बीजेपी और संघ पर टिप्पणी
    संघ प्रमुख ने साफ किया कि बीजेपी संघ की पार्टी नहीं है, हालांकि संघ के स्वयंसेवक उसमें कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि संघ का एकमात्र उद्देश्य संपूर्ण समाज को संगठित करना है।

    अपने संबोधन के अंत में मोहन भागवत ने कहा कि भारत का स्वभाव सनातन है और “सबका सम्मान, सबका स्वीकार” ही हमारी संस्कृति की मूल भावना है। सबको साथ लेकर चलना ही देश की ताकत है।

  • महात्मा फुले एजुकेशन ट्रस्ट में ‘उड़ान–2026’ का भव्य आयोजन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन

    महात्मा फुले एजुकेशन ट्रस्ट में ‘उड़ान–2026’ का भव्य आयोजन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन

    मुंबई (धारावी)।
    विद्यार्थियों की छिपी प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने और उनके अंतर्निहित कला-गुणों को निखारने के उद्देश्य से महात्मा फुले एजुकेशन ट्रस्ट की ओर से आयोजित वार्षिक स्नेह सम्मेलन ‘उड़ान–2026’ का भव्य और रंगारंग आयोजन शनिवार शाम ट्रस्ट के पीएमजी कॉलोनी, धारावी स्थित प्रांगण में उत्साहपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ।

    कार्यक्रम की शुरुआत शारदा माता के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से की गई, जबकि बच्चों ने गणेश वंदना प्रस्तुत कर समारोह का शुभारंभ किया।


    समसामयिक मुद्दों पर आधारित प्रस्तुतियों ने बांधा समां

    राजे शिवाजी विद्यालय, छत्रपति शिवाजी महाराज विद्यालय (मराठी, हिंदी, उर्दू एवं अंग्रेजी माध्यम) तथा मनोहर जोशी महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने इस अवसर पर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।
    कार्यक्रम में:

    • राष्ट्रीय एकता पर आधारित कव्वाली
    • सावित्रीबाई फुले के कन्या शिक्षा अभियान
    • नारी शक्ति
    • वृद्धाश्रमों का बढ़ता चलन
    • मोबाइल की बढ़ती लत

    जैसे समसामयिक और सामाजिक विषयों पर आधारित प्रभावशाली सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं, जिन्हें दर्शकों से भरपूर सराहना मिली।


    शिक्षा, समाज और प्रशासन के गणमान्य अतिथि रहे मौजूद

    वार्षिक स्नेह सम्मेलन में
    मुख्य अतिथि आयकर अधिकारी रामकृष्ण झा उपस्थित रहे।
    विशेष अतिथियों में:

    • ‘दोपहर का सामना’ के उप-संपादक संदीप पांडेय
    • स्थानीय नगरसेविका आशा काले
    • धारावी पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक राजू बिडकर
    • डब्ल्यूपीपी स्वयंसेवी संस्था की रमा मैडम

    तथा ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक बाबूराव माने प्रमुख रूप से शामिल हुए।


    विद्यार्थियों को किया गया सम्मानित

    इस अवसर पर ट्रस्ट अध्यक्ष बाबूराव माने ने विद्यार्थियों की हौसलाअफजाई करते हुए कहा कि शिक्षा के साथ-साथ कला, संस्कृति और खेलों में भागीदारी बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है।
    वर्षभर शिक्षा, कला और खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार एवं पारितोषिक प्रदान कर सम्मानित किया गया।


    शिक्षक, अभिभावक और ट्रस्ट पदाधिकारी रहे उपस्थित

    कार्यक्रम में ट्रस्ट के सचिव दिलीप शिंदे, कोषाध्यक्ष प्रमोद माने, मुख्याध्यापिका वीणा दोनवलकर, अंग्रेजी माध्यम की प्रिंसिपल व ट्रस्टी मेंबर स्वाती होलमुखे, प्राथमिक विभाग की प्रिंसिपल सौ. श्रद्धा माने, मनोहर जोशी महाविद्यालय की प्राचार्या मृणाल रसाल, समस्त शिक्षकवृंद, शिक्षकेतर कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में अभिभावक उपस्थित रहे।


    सांस्कृतिक संध्या ने छोड़ी यादगार छाप

    शानदार नृत्य, प्रभावशाली कव्वाली और सामाजिक संदेशों से सजी प्रस्तुतियों ने उपस्थित कला-प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के समापन पर दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया।

  • Congress 2026: भाजपा पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाळ का हमला, कहा – सत्ता के अहंकार में समाज में नफरत फैलाने का काम कर रही है भारतीय जनता पार्टी

    Congress 2026: भाजपा पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाळ का हमला, कहा – सत्ता के अहंकार में समाज में नफरत फैलाने का काम कर रही है भारतीय जनता पार्टी

    मुंबई: महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाळ ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी सत्ते के लिए समाज में जाति और धर्म के नाम पर भांडने कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा केवल हिंदू-मुस्लिम विवाद तक सीमित नहीं रही, बल्कि मराठा, ओबीसी, आदिवासी और दलित समाज में भी भड़के पैदा कर महाराष्ट्र के सामाजिक एकता को बिगाड़ने का काम कर रही है।

    सपकाळ ने छत्रपती संभाजीनगर जिले के लाडसावंगी, गणोरी, बाजार सावंगी और नागव में जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव के लिए आयोजित प्रचार सभाओं में यह बयान दिया। इस अवसर पर जालना के सांसद डॉ. कल्याण काळे, कांग्रेस सेवादल के प्रदेशाध्यक्ष विलास औताडे, जिला अध्यक्ष किरण पाटील डोणगावकर, प्रदेश सचिव सुदामराव मते, शिवसेना उपजिल्हाप्रमुख जगन्नाथराव पवार, फुलंब्री नगराध्यक्ष राजेंद्र ठोंबरे सहित कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता उपस्थित थे।

    सपकाळ ने कहा कि भाजपा सरकार देश की लोकतंत्र और संविधान को कमजोर करने का काम कर रही है। विपक्षी दलों को खत्म करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव में पैसे की बर्बादी और धमकियों का खेल चल रहा है, और चुनाव आयोग भी सत्ताधारी पार्टी के पक्ष में काम कर रहा है। बावजूद इसके, कांग्रेस जनता के हित, लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए संघर्ष कर रही है।

    सपकाळ ने जनता से अपील की कि नगरपालिका और महानगरपालिका चुनावों में कांग्रेस को मिली सफलता को जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों में भी दोहराएं। उन्होंने कहा कि भाजपा को किसान, महिला, कामगार और युवाओं की समस्याएं दिखाई नहीं देतीं। किसानों की आत्महत्याएं बढ़ रही हैं, फसल के सही दाम नहीं मिल रहे हैं, युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा है और महंगाई चरम पर है। इसके बावजूद भाजपा सामाजिक तेढ फैलाकर जनता का ध्यान भटका रही है।

    सपकाळ ने कहा, “भारतीय जनता पार्टी का यह चालाकी भरा खेल जनता पहचानें और चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवारों को विजयी बनाएं।”

  • Spring Festival 2026: मुंबई में राष्ट्रीय हिंदी साहित्य अधिवेशन ‘बसंतोत्सव 2026’ का होगा आयोजन

    Spring Festival 2026: मुंबई में राष्ट्रीय हिंदी साहित्य अधिवेशन ‘बसंतोत्सव 2026’ का होगा आयोजन

    मुंबई: पूर्वांचल मानस मंडल के तत्वावधान में राष्ट्रीय हिंदी साहित्य अधिवेशन ‘बसंतोत्सव 2026’ आज आयोजित किया जा रहा है। यह साहित्यिक अधिवेशन सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक शारदा इंटरनेशनल स्कूल सभागार, दत्त मंदिर रोड, मलाड पूर्व, मुंबई में संपन्न होगा।

    अधिवेशन की अध्यक्षता डॉ. भगवान तिवारी करेंगे। कार्यक्रम के कार्याध्यक्ष रामकृष्ण सहस्रबुद्धे और स्वागताध्यक्ष देवेंद्र तिवारी होंगे।

    इस अवसर पर हिंदी साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले साहित्यकारों को जवाहर लाल ‘निर्झर’ शब्द साधक सम्मान 2026 और भारतीय जनभाषा प्रचार समिति – साहित्य सेवा सम्मान 2026 से सम्मानित किया जाएगा।

    कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 9 से 9.30 बजे पंजीकरण से होगी, इसके बाद माता सरस्वती पूजन किया जाएगा। अधिवेशन को तीन सत्रों में आयोजित किया गया है:

    • प्रथम सत्र: सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक
    • द्वितीय सत्र: दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक
    • तृतीय सत्र: शाम 5.30 बजे से रात 8.30 बजे तक

    इन सत्रों में देशभर से आए कवि, लेखक, पत्रकार और साहित्यकार अपने विचार साझा करेंगे।

    कार्यक्रम में अखिल भारतीय साहित्य परिषद (मुंबई), संगीत साहित्य मंच सहित कई सामाजिक और साहित्यिक संस्थाओं का सहयोग प्राप्त है। अधिवेशन के निमंत्रक राजेश दुबे ‘अल्हड़ असरदार’ और सदाशिव चतुर्वेदी हैं। आयोजकों ने साहित्यप्रेमियों से बड़ी संख्या में उपस्थित होने की अपील की है।

  • Talent Hunt 2026: कांग्रेस ने शुरू किया ‘प्रतिभा खोज’ अभियान, विशेषज्ञों को मिलेगा पार्टी में जुड़ने का अवसर

    Talent Hunt 2026: कांग्रेस ने शुरू किया ‘प्रतिभा खोज’ अभियान, विशेषज्ञों को मिलेगा पार्टी में जुड़ने का अवसर

    मुंबई: अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने नई और विशेषज्ञ प्रतिभाओं को अवसर देने के उद्देश्य से ‘प्रतिभा खोज’ अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत देशभर के विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को कांग्रेस पार्टी में काम करने का मंच उपलब्ध कराया जाएगा। यह जानकारी कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व विधायक हरि शंकर गुप्ता ने पत्रकार परिषद में दी।

    हरि शंकर गुप्ता ने बताया कि यह अभियान तीन चरणों में आयोजित किया जाएगा। पहले चरण में ऑनलाइन आवेदन 15 फरवरी तक स्वीकार किए जाएंगे। इसके बाद इन आवेदनों की छानबीन की जाएगी और वरिष्ठ नेताओं, अनुभवी पत्रकारों और समाज के विशेषज्ञों की समिति द्वारा प्रत्यक्ष साक्षात्कार लिया जाएगा। साक्षात्कार के आधार पर अंतिम चयन किया जाएगा।

    गुप्ता ने कहा कि इस अभियान से चयनित लोगों को कांग्रेस पार्टी के साथ काम करने का मौका मिलेगा। उन्हें प्रवक्ता, सोशल मीडिया और शोध कार्यों में योगदान देने का अवसर मिलेगा। इसका मुख्य उद्देश्य कांग्रेस पार्टी की विचारधारा को देशभर में पहुंचाना और पार्टी में नए, ताजगी भरे चेहरों को जोड़ना है।

    मुंबई कांग्रेस के प्रवक्ता सुरेशचंद्र राजहंस ने बताया कि मुंबई कांग्रेस अध्यक्षा वर्षाताई गायकवाड़ के नेतृत्व में टैलेंट हंट कमिटी बनाई गई है। इस कार्यक्रम को सफल बनाने और सभी जिलों में समन्वय स्थापित करने का काम कमिटी द्वारा किया जाएगा। राजहंस ने कहा कि यह अभियान कांग्रेस संगठन को मजबूत बनाने और पार्टी के विचारों को व्यापक स्तर पर पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

    इस अवसर पर मुंबई कांग्रेस के अन्य नेता निजामुद्दीन राईन, शकील चौधरी और अनुसूचित जाति विभाग मुंबई अध्यक्ष सुभाष भालेराव भी उपस्थित थे।

  • Ajit Pawar Death: NCP at Crossroads, Sharad Pawar Emerges as Bhishma Pitamah: शरद पवार एक बार फिर एनसीपी के भीष्म पितामह की भूमिका में उभरकर आएंगे

    Ajit Pawar Death: NCP at Crossroads, Sharad Pawar Emerges as Bhishma Pitamah: शरद पवार एक बार फिर एनसीपी के भीष्म पितामह की भूमिका में उभरकर आएंगे

    अजित पवार के असामयिक निधन ने महाराष्ट्र की राजनीति को एक ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां हर फैसला इतिहास लिख सकता है। उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रमुख के रूप में अजित पवार केवल एक नेता नहीं थे, बल्कि सत्ता संतुलन की धुरी थे। उनके जाने के बाद न केवल पार्टी, बल्कि पूरी महायुति और विपक्षी खेमे में भी राजनीतिक भूचाल आ गया है।

    इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के बाद शरद पवार एक बार फिर एनसीपी के भीष्म पितामह की भूमिका में उभर आए हैं। भले ही अजित पवार की बगावत के बाद एनसीपी दो गुटों में बंटी हो, लेकिन संकट की इस घड़ी में परिवार और पार्टी—दोनों के सबसे वरिष्ठ मार्गदर्शक के रूप में शरद पवार की ओर सभी की निगाहें टिक गई हैं।

    क्या होगा अजित पवार गुट का भविष्य?

    सबसे बड़ा और निर्णायक सवाल यही है कि अब अजित पवार की एनसीपी का रास्ता क्या होगा? क्या यह गुट स्वतंत्र पहचान बनाए रख पाएगा या फिर इतिहास खुद को दोहराते हुए दोनों एनसीपी का विलय होगा?

    महानगरपालिका चुनाव के दौरान पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में बीजेपी को हराने के लिए अजित पवार का शरद पवार के साथ आना कोई सामान्य राजनीतिक घटना नहीं थी। तभी से यह संकेत मिलने लगे थे कि दोनों गुटों के बीच जमी बर्फ पिघल रही है। खुद अजित पवार ने भी एक इंटरव्यू में यह स्वीकार किया था कि कार्यकर्ता एकजुटता चाहते हैं और सही समय पर बड़ा फैसला लिया जाएगा।
    अब वही “सही समय” नियति ने तय कर दिया है।

    41 विधायक, एक सांसद और सत्ता की चाबी

    फिलहाल अजित पवार गुट के पास महाराष्ट्र विधानसभा में 41 विधायक और लोकसभा में एक सांसद—सुनील तटकरे—हैं। यह संख्या किसी भी गठबंधन सरकार को बनाने या गिराने की ताकत रखती है। यही वजह है कि बीजेपी, शिंदे सेना और शरद पवार—तीनों खेमे इस गुट पर नज़र गड़ाए बैठे हैं।

    अगर दोनों गुटों का विलय होता है तो सत्ता समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। ऐसे में शरद पवार गुट के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल डिप्टी सीएम पद के प्रबल दावेदार के रूप में उभर सकते हैं। लेकिन यह राह आसान नहीं होगी। इसके लिए उन्हें प्रफुल पटेल और सुनील तटकरे जैसे कद्दावर नेताओं का भरोसा जीतना होगा—जो कभी अजित पवार के सबसे विश्वस्त सिपहसालार रहे हैं।

    पटेल–तटकरे–भुजबल: किंगमेकर की भूमिका

    अजित पवार के बाद उनके गुट में सबसे मजबूत स्तंभ प्रफुल पटेल और सुनील तटकरे हैं। दोनों नेताओं ने एनसीपी के विभाजन में निर्णायक भूमिका निभाई थी। अब वही नेता तय करेंगे कि पार्टी का भविष्य किस दिशा में जाएगा—शरद पवार की छांव में या बीजेपी के साथ सत्ता के केंद्र में।

    इसके अलावा छगन भुजबल जैसे अनुभवी नेता भी इस राजनीतिक शतरंज के अहम मोहरे हैं। उनका एक कदम कई समीकरणों को उलट सकता है।

    सुनेत्रा पवार की अग्निपरीक्षा

    अजित पवार के निधन के बाद सबसे कठिन परीक्षा उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार के सामने है। निजी शोक और राजनीतिक जिम्मेदारी—दोनों का बोझ एक साथ उठाना आसान नहीं होगा। राज्यसभा सांसद होने के नाते वे पहले ही संसद में मौजूद हैं, लेकिन अब उन्हें पार्टी की विरासत को संभालने का प्रस्ताव भी मिल सकता है।

    राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि बीजेपी सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम पद का प्रस्ताव दे सकती है। इससे एक ओर अजित समर्थकों में भावनात्मक जुड़ाव बना रहेगा, तो दूसरी ओर महायुति की स्थिरता भी सुनिश्चित होगी। साथ ही कैबिनेट में एक महिला चेहरे की एंट्री भी बीजेपी के लिए राजनीतिक रूप से लाभकारी हो सकती है। हालांकि इस पर अंतिम फैसला शिंदे सेना से विचार-विमर्श के बाद ही होगा।

    पार्थ और जय पवार: उत्तराधिकार का संकट

    अजित पवार के बड़े बेटे पार्थ पवार पहले ही जमीन घोटाले के आरोपों और 2019 की लोकसभा हार के चलते कमजोर स्थिति में हैं। ऐसे में उन्हें तत्काल बड़ी जिम्मेदारी मिलना मुश्किल माना जा रहा है। छोटे बेटे जय पवार राजनीति में अभी सक्रिय नहीं हैं।
    इस हालात में शरद पवार की भूमिका निर्णायक हो जाती है। माना जा रहा है कि उनकी सहमति और मार्गदर्शन के बिना पवार परिवार और एनसीपी का कोई भी बड़ा फैसला संभव नहीं है।

    अजित पवार का जाना केवल एक नेता का जाना नहीं है, बल्कि यह महाराष्ट्र की राजनीति में एक युगांतकारी क्षण है। आने वाले दिनों में तय होगा कि एनसीपी फिर से एकजुट होकर नई ताकत बनेगी या इतिहास के पन्नों में बिखर जाएगी। इतना तय है कि इस पूरे घटनाक्रम की धुरी—एक बार फिर—शरद पवार ही होंगे।

  • Maharashtra News : आज सुबह बारामती में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार के विमान में लैंडिंग के समय लगी भीषण आग से हुई मौत

    Maharashtra News : आज सुबह बारामती में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार के विमान में लैंडिंग के समय लगी भीषण आग से हुई मौत

    बारामती। आज सुबह बारामती, महाराष्ट्र में डिप्टी सीएम अजित पवार के विमान ने लैंडिंग के समय भारी दुर्घटना का सामना किया। विमान क्रैश होते ही भीषण आग लग गई और उसके मलबे से धुआँ उठता हुआ देखा गया। यह हादसा एयरपोर्ट के लगभग खेत के पास सामने आया जहाँ विमान लैंड करने की कोशिश कर रहा था। मौके पर पुलिस, जिला प्रशासन और आपदा प्रतिक्रिया टीम तुरंत पहुंच चुकी हैं और राहत व बचाव कार्य शुरू किया गया है। जहां महाराष्ट्र के बारामती के पास एनसीपी नेता और डिप्टी सीएम अजित पवार का निजी विमान दुर्घटना में मौत हो गई है. लैंडिंग के दौरान विमान हादसा हुआ, जिसमें अजित पवार सहित विमान में सवार सभी लोगों की जान चली गई. 

    🚨 अजित पवार की स्थिति
    प्राप्त रिपोर्ट्स के अनुसार वे बारामती में होने वाली एक भारी जनसभा कार्यक्रम के लिए आ रहे थे।महाराष्ट्र के बारामती के पास एनसीपी नेता और डिप्टी सीएम अजित पवार का निजी विमान दुर्घटना में मौत हो गई है. लैंडिंग के दौरान विमान हादसा हुआ, जिसमें अजित पवार सहित विमान में सवार सभी लोगों की जान चली गई. 

    🧯 बचाव कार्य और प्रशासन की प्रतिक्रिया

    • पुलिस और फायर ब्रिगेड ने आग पर काबू पाने के लिए कार्य शुरू कर दिया है।
    • जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन अधिकारी स्थल पर पहुंचकर राहत प्रयासों का नेतृत्व कर रहे हैं।

    📰 आगे क्या होने वाला है

    सरकारी सूत्रों और अधिकारियों की तरफ से अभी तक आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है, लेकिन केंद्रीय और राज्य स्तर पर जांच शुरू होने की उम्मीद है।

    छह बार डिप्टी सीएम बनने वाले अजित पवार का सियासी सफर, सत्ता के हर समीकरण में निभाई अहम भूमिका


    महाराष्ट्र की राजनीति में अजित पवार का नाम उन नेताओं में शुमार है, जिन्होंने सत्ता के बदलते दौर में खुद को हर बार प्रासंगिक बनाए रखा। रणनीतिक फैसलों, संगठन पर पकड़ और निर्णायक राजनीति के चलते वे अब तक छह बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री रहे।

    अजित पवार पहली बार नवंबर 2010 में उपमुख्यमंत्री बने। इसके बाद उसी वर्ष दूसरी बार उन्हें यह जिम्मेदारी मिली। इसके बाद 2019 में उन्होंने देवेंद्र फडणवीस के साथ उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली, हालांकि यह सरकार अल्पकालिक रही।

    जब उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में महाविकास अघाड़ी की सरकार बनी, तब भी अजित पवार को उपमुख्यमंत्री बनाया गया। इसके बाद 2023 में राजनीतिक समीकरण बदले और वे शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल होकर एक बार फिर डिप्टी सीएम बने।
    2024 में वे छठी बार उपमुख्यमंत्री बने, जो महाराष्ट्र की राजनीति में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी गई।


    2022 में आया सियासी टर्निंग पॉइंट, चाचा से अलग चुनी अपनी राह

    अजित पवार ने राजनीति में कदम अपने चाचा शरद पवार के मार्गदर्शन में रखा था, लेकिन 2022 में उनके राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा मोड़ आया।
    जब शरद पवार ने अपनी बेटी सुप्रिया सुले को राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में आगे बढ़ाना शुरू किया, तब अजित पवार ने अपनी अलग राजनीतिक राह चुनने का फैसला किया।

    उन्होंने एनसीपी के कई वरिष्ठ नेताओं के साथ मिलकर बीजेपी के नेतृत्व वाली महायुति सरकार में शामिल होने का कदम उठाया।
    2023 में अजित पवार ने पार्टी संगठन पर मजबूत पकड़ बनाई और एनसीपी के नेतृत्व पर नियंत्रण स्थापित किया।
    2024 में वे सत्ता में अपनी स्थिति को और मजबूत करने में सफल रहे और खुद को महाराष्ट्र की राजनीति में एक प्रभावशाली केंद्र के रूप में स्थापित किया।


    महाराष्ट्र की राजनीति में मजबूत पकड़

    लंबे राजनीतिक अनुभव और सत्ता के गलियारों की गहरी समझ के चलते अजित पवार ने खुद को केवल एक नेता नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीतिकार के रूप में स्थापित किया।
    उनका सियासी सफर यह दर्शाता है कि वे बदलते राजनीतिक हालात में भी निर्णायक भूमिका निभाने की क्षमता रखते थे।

  • Western Railway News: चलती लोकल बनी कत्लखाना! मलाड स्टेशन पर प्रोफेसर की चाकुओं से नृशंस हत्या, रेलवे की नाक के नीचे गैंगराज

    Western Railway News: चलती लोकल बनी कत्लखाना! मलाड स्टेशन पर प्रोफेसर की चाकुओं से नृशंस हत्या, रेलवे की नाक के नीचे गैंगराज

    सुजीत मिश्र | मुंबई।
    मुंबई की लोकल ट्रेनें अब सिर्फ सफर का जरिया नहीं रहीं, बल्कि दिनदहाड़े अपराध की चलती-फिरती प्रयोगशाला बन चुकी हैं। पश्चिम रेलवे की लोकल ट्रेनों में कानून, सुरक्षा और इंसानियत—तीनों का सार्वजनिक रूप से अंतिम संस्कार हो चुका है। गुरुवार, 22 जनवरी को बोरीवली जाने वाली स्लो लोकल में मलाड रेलवे स्टेशन पर मामूली बहस ने वह भयावह मोड़ लिया, जिसने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया। 33 वर्षीय प्रोफेसर आलोक कुमार सिंह की चलती ट्रेन में चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी गई।

    यह सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि सरकारी नाकामी का खून से लिखा दस्तावेज़ है। आरोपी 27 वर्षीय ओमकार शिंदे की गिरफ्तारी अगले दिन हो गई, लेकिन असली सवाल गिरफ्तारी का नहीं—सवाल यह है कि ऐसे कातिल लोकल ट्रेनों में बेखौफ कैसे घूम रहे हैं?

    मुंबई लोकल में अब अकेले यात्री नहीं चलते—गुंडों के झुंड चलते हैं। ये गिरोह तय करते हैं कि कौन चढ़ेगा, कौन उतरेगा और कौन ज़िंदा बचेगा। विरोध किया तो मारपीट, लूट और अब हत्या तय है। विकलांग डिब्बों तक पर दबंगों और माफियाओं का कब्ज़ा है, जहाँ असल में दिव्यांग यात्रियों की एंट्री ही मुश्किल हो चुकी है। यह अव्यवस्था नहीं, बल्कि संस्थागत अपराध है।

    रेलवे के उच्चाधिकारी और कमर्शियल विभाग या तो गहरी नींद में हैं या जानबूझकर आँखें मूंदे बैठे हैं। न नियमित पेट्रोलिंग, न अपराधियों पर सख़्त लगाम। बीते साल महिला डिब्बे में मारपीट का वीडियो वायरल हुआ, चेतावनियाँ दी गईं—लेकिन प्रशासन ने खून बहने तक इंतज़ार किया।

    मृतक आलोक कुमार सिंह उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के चंदवक थाना क्षेत्र के पड़रछा गाँव के निवासी थे और मुंबई के प्रतिष्ठित एन.एम. कॉलेज, विले पार्ले में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थे। एक शिक्षक, एक शिक्षित नागरिक अगर लोकल ट्रेन में सुरक्षित नहीं है, तो मजदूर, छात्र और महिला यात्रियों की सुरक्षा का दावा कौन करेगा?

    सीधा सवाल, सीधा आरोप—
    क्या मुंबई लोकल अब अपराधियों के लिए फ्री ज़ोन बन चुकी है?
    क्या रेलवे प्रशासन को चेतना सिर्फ लाशों की गिनती से आती है?

    यह घटना चेतावनी नहीं, अंतिम अलार्म है। अगर अब भी सख़्त और दिखाई देने वाली कार्रवाई नहीं हुई, तो अगली मौत किसी और की होगी—और जिम्मेदार फिर भी कोई नहीं होगा।