Palghar Atrocity Case: पीड़िता को न्याय मिलने तक जारी रहेगा संघर्ष, डॉ. नीलम गोरे ने की आरोपी की नॉन-बेलब्ल डिमांड!

Palghar Atrocity Case

Written by

in

Palghar Atrocity Case: पालघर जिले के कासा पुलिस थाना क्षेत्र में एक नाबालिग आदिवासी लड़की के साथ कथित “भोंदू बाबा” द्वारा किए गए दुष्कर्म के मामले ने गंभीर रूप ले लिया है। इस घटना पर महाराष्ट्र विधान परिषद की उपसभापति डॉ. नीलम गोरे ने सख्त रुख अपनाते हुए पीड़िता और उसके परिवार से मुलाकात की तथा न्याय दिलाने का भरोसा दिया।

डॉ. गोरे ने स्पष्ट कहा कि पीड़ित परिवार की एकमात्र मांग न्याय है और किसी भी स्थिति में आरोपी को जमानत नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने पुलिस और प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर मामले की त्वरित जांच और न्यायिक प्रक्रिया को तेज करने की बात कही।

पीड़िता के भविष्य पर विशेष ध्यान
डॉ. गोरे ने बताया कि पीड़िता आगे पढ़ाई कर पुलिस अधिकारी बनना चाहती है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार की सभी योजनाओं के माध्यम से उसकी शिक्षा और करियर को पूरा समर्थन दिया जाएगा।

दबाव बनाने वालों पर भी होगी कार्रवाई
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई व्यक्ति आरोपी की मदद करता है, गवाहों को प्रभावित करता है या किसी भी प्रकार का दबाव बनाता है, तो उसके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

डीएनए जांच और गवाह सुरक्षा पर जोर
मामले को मजबूत बनाने के लिए डीएनए जांच सहित सभी वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए जाएंगे। साथ ही गवाह संरक्षण कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने पर भी बल दिया गया है।

उपमुख्यमंत्री ने जताया भरोसा
इस दौरान डॉ. गोरे ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से फोन पर बात कर पूरी जानकारी दी। उपमुख्यमंत्री ने पीड़िता और उसके परिवार से बातचीत कर उन्हें भरोसा दिलाया कि सरकार पूरी तरह उनके साथ है और आरोपी को कड़ी सजा दिलाने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने पीड़िता की शिक्षा की जिम्मेदारी भी लेने की बात कही।

‘मनोधैर्य’ योजना के तहत मदद
प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि पीड़िता को ‘मनोधैर्य’ योजना के अंतर्गत आर्थिक सहायता, पुलिस सुरक्षा, चिकित्सा सुविधा और मानसिक परामर्श तुरंत उपलब्ध कराया जाए। इसके अलावा अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ भी दिया जाएगा।

अंधविश्वास के खिलाफ सख्ती
डॉ. गोरे ने अंधविश्वास और भोंदूगिरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में कड़े कानूनों के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।

फास्ट ट्रैक कोर्ट की मांग
राज्य में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को देखते हुए उन्होंने फास्ट ट्रैक कोर्ट की संख्या बढ़ाने की मांग की। उन्होंने कहा कि अपेक्षित अदालतों की तुलना में कम अदालतें कार्यरत हैं, जिससे मामलों में देरी हो रही है।

प्रशासनिक समीक्षा बैठक
इस मामले को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक भी की गई, जिसमें जांच की प्रगति, साक्ष्य संग्रह और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई।

अंत में डॉ. गोरे ने दोहराया कि पीड़िता को न्याय मिलने तक यह लड़ाई जारी रहेगी और किसी भी कीमत पर आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *