Twisha Sharma case: विकास पाहवा ने ट्विशा शर्मा मामले में ‘मीडिया ट्रायल’ के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का किया स्वागत!

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Twisha Sharma case: वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाहवा ने सोमवार को ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में उच्चतम न्यायालय की टिप्पणियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह आदेश सार्वजनिक दबाव और मीडिया द्वारा गढ़ी गयी कहानियों से मुक्त, निष्पक्ष और तटस्थ आपराधिक जांच के महत्व को और मज़बूत करता है।

पाहवा ने कहा कि न्यायालय ने जांच में जनता का भरोसा बनाए रखने और कानूनी प्रक्रिया की गरिमा की रक्षा करने के बीच एक संतुलन बनाया है। उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत ने इस मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति के दोषी होने या निर्दोष होने पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

पाहवा ने “मीडिया ट्रायल” के खिलाफ उच्चतम न्यायालय की चेतावनी पर कहा कि आपराधिक मामले तेज़ी से सार्वजनिक तमाशे बनते जा रहे हैं, जहाँ सबूतों की ठीक से जांच किए जाने से पहले ही आरोप और निष्कर्ष बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा माहौल आरोपी के अधिकारों को नुकसान पहुँचा सकता है और गवाहों, जांचकर्ताओं तथा न्याय के समग्र प्रशासन पर बुरा असर डाल सकता है।

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अदालत की टिप्पणियों का ज़िक्र करते हुए पाहवा ने कहा कि शीर्ष अदालत ने मीडिया, परिवार के सदस्यों, आरोपियों और आम जनता सहित सभी संबंधित पक्षों को याद दिलाया है कि बयान जांच एजेंसियों के सामने दिए जाने चाहिए, न कि टेलीविज़न बहसों या सार्वजनिक अभियानों के ज़रिए। उन्होंने कहा कि जांच को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने का कदम संस्थागत भरोसे को बहाल करने और इस मामले में एक स्वतंत्र तथा निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया प्रतीत होता है।

पाहवा ने कहा कि इस आदेश से संवेदनशील आपराधिक मामलों में ज़िम्मेदार रिपोर्टिंग पर एक व्यापक राष्ट्रीय बहस शुरू होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बोलने की आज़ादी और प्रेस की आज़ादी के साथ यह कर्तव्य भी जुड़ा है कि न्याय की प्रक्रिया में कोई दखल न दिया जाए। उन्होंने कहा, “एक युवती की दुर्भाग्यपूर्ण मौत एक निष्पक्ष, तटस्थ और पेशेवर जांच की हकदार है।” उन्होंने कहा कि यह उद्देश्य तभी हासिल किया जा सकता है जब संस्थाओं को सनसनीखेज़पन या बाहरी दबाव के बिना काम करने दिया जाए।

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