Bogus Attendance Case: बोगस हाजिरी मामले में स्वच्छता निरीक्षक निलंबित, पार्षदों के लगातार प्रयास को मिली सफलता

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Bogus Attendance Case: भिवंडी निजामपुर शहर महानगरपालिका के स्वच्छता विभाग में कथित फर्जी हाजिरी प्रकरण में बड़ी कार्रवाई करते हुए नगर निगम प्रशासन ने एक स्वच्छता निरीक्षक को निलंबित कर दिया है। निलंबित स्वच्छता निरीक्षक का नाम संतोष जाधव बताया गया है। यह कार्रवाई नगर निगम आयुक्त के निर्देश पर उपायुक्त विक्रम दराडे द्वारा की गई।

जानकारी के अनुसार, नगर निगम के विभिन्न स्वच्छता केबिनों में कर्मचारियों की लगातार अनुपस्थिति के कारण शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इसी मुद्दे को लेकर नव-निर्वाचित पार्षद लगातार प्रशासन का ध्यान आकर्षित कर रहे थे।

प्रभाग क्रमांक 14 के पार्षद अब्दुल रहमान खान उर्फ सद्दाम भाई ने अपने क्षेत्र के स्वच्छता केबिन की जांच की। जांच के दौरान कथित रूप से यह सामने आया कि स्वच्छता कर्मचारी भारती खर्डीकर और प्रवीण जाधव लंबे समय से ड्यूटी पर अनुपस्थित थे। आरोप है कि इसके बावजूद उनकी नियमित उपस्थिति दर्ज की जा रही थी और वेतन भी जारी किया जा रहा था।

शिकायत के अनुसार, स्वच्छता निरीक्षक संतोष जाधव ने कथित रूप से ‘मैजिक पेन’ का उपयोग कर अनुपस्थित कर्मचारियों की हाजिरी दर्ज की। मामले की शिकायत नगर निगम प्रशासन को किए जाने के बाद जांच की गई, जिसमें प्रथम दृष्टया अनियमितताओं की पुष्टि होने पर आयुक्त ने कार्रवाई के निर्देश दिए।

आयुक्त के आदेशानुसार उपायुक्त विक्रम दराडे ने स्वच्छता निरीक्षक संतोष जाधव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई को पार्षदों के लगातार प्रयासों और शिकायतों की सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

इस संबंध में पार्षद अब्दुल रहमान खान उर्फ सद्दाम भाई ने कहा कि शहर के कई प्रभागों में इसी प्रकार की स्थिति होने की आशंका है, जहां कर्मचारी अनुपस्थित रहते हुए भी वेतन प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे एक ओर शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है, वहीं दूसरी ओर नगर निगम के राजस्व को भी नुकसान पहुंच रहा है।

उन्होंने सभी पार्षदों से अपने-अपने प्रभागों के स्वच्छता केबिनों के हाजिरी रजिस्टर और कार्यप्रणाली पर नियमित निगरानी रखने की अपील की, ताकि ऐसी अनियमितताओं पर अंकुश लगाया जा सके और नागरिकों को बेहतर सफाई व्यवस्था उपलब्ध कराई जा सके। हालांकि, मामले में अंतिम निष्कर्ष विस्तृत विभागीय जांच के बाद ही सामने आएगा।

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