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  • RSS News :आरएसएस 100 वर्ष कार्यक्रम में मोहन भागवत का स्पष्ट संदेश-                                                                 संघ न तो पैरामिलिट्री है, न राजनीतिक पार्टी

    RSS News :आरएसएस 100 वर्ष कार्यक्रम में मोहन भागवत का स्पष्ट संदेश- संघ न तो पैरामिलिट्री है, न राजनीतिक पार्टी

    मुंबई। महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के “संघ यात्रा के 100 वर्ष–नए क्षितिज” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने संघ की भूमिका और विचारधारा को लेकर उठने वाली भ्रांतियों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि संघ को दूर से देखने पर गलतफहमी हो सकती है, इसलिए संघ को समझने के लिए उसकी शाखाओं और स्वयंसेवकों के जीवन को देखना जरूरी है।

    मोहन भागवत ने स्पष्ट किया कि संघ के स्वयंसेवक रूट मार्च करते हैं, लाठी-काठी सीखते हैं और घोष की धुन बजती है, लेकिन संघ न तो कोई पैरामिलिट्री संगठन है, न अखाड़ा और न ही संगीतशाला। उन्होंने कहा कि संघ में राजनीति से जुड़े स्वयंसेवक जरूर हैं, लेकिन संघ स्वयं कोई राजनीतिक पार्टी नहीं है।

    उन्होंने जोर देकर कहा कि संघ का काम अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे देश और समाज के लिए है। संघ न तो किसी के विरोध में बना है और न ही किसी से प्रतिस्पर्धा के लिए। संघ को न लोकप्रियता चाहिए और न सत्ता, उसका उद्देश्य केवल समाज को संगठित करना है।

    “संघ को समझना है तो शाखा देखिए”
    आरएसएस प्रमुख ने कहा कि संघ को समझने के लिए उसकी शाखाओं, कार्यकर्ताओं के परिवारों और उनके सामाजिक व्यवहार को देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी देश का उत्थान या पतन समाज की एकता पर निर्भर करता है, इसका उदाहरण अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन और जर्मनी जैसे देशों के इतिहास से लिया जा सकता है।

    हिंदू शब्द और समाज पर विचार
    मोहन भागवत ने कहा कि ‘हिंदू’ को केवल धर्म या पूजा-पद्धति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह किसी एक समुदाय का नाम नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन है। उन्होंने कहा कि भारत धर्म-प्राण देश है, जहां सबको साथ लेकर चलने की परंपरा रही है।

    बीजेपी और संघ पर टिप्पणी
    संघ प्रमुख ने साफ किया कि बीजेपी संघ की पार्टी नहीं है, हालांकि संघ के स्वयंसेवक उसमें कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि संघ का एकमात्र उद्देश्य संपूर्ण समाज को संगठित करना है।

    अपने संबोधन के अंत में मोहन भागवत ने कहा कि भारत का स्वभाव सनातन है और “सबका सम्मान, सबका स्वीकार” ही हमारी संस्कृति की मूल भावना है। सबको साथ लेकर चलना ही देश की ताकत है।

  • Bangladesh Japan Economic Partnership: चुनाव से पहले यूनुस सरकार की बड़ी ट्रेड डिप्लोमेसी कामयाबी, बांग्लादेश-जापान के बीच ऐतिहासिक आर्थिक साझेदारी समझौता

    Bangladesh Japan Economic Partnership: चुनाव से पहले यूनुस सरकार की बड़ी ट्रेड डिप्लोमेसी कामयाबी, बांग्लादेश-जापान के बीच ऐतिहासिक आर्थिक साझेदारी समझौता

    ढाका/टोक्यो। बांग्लादेश में आगामी चुनावों से पहले यूनुस सरकार ने ट्रेड डिप्लोमेसी के मोर्चे पर एक बड़ा और रणनीतिक कदम उठाया है। भारत के करीबी और भरोसेमंद मित्र जापान के साथ बांग्लादेश ने इकॉनमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (EPA) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस समझौते को बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था के लिए सही समय पर उठाया गया एक मील का पत्थर माना जा रहा है।

    जापान की राजधानी टोक्यो में हुए इस समझौते से न सिर्फ दोनों देशों के बीच व्यापार को नई रफ्तार मिलेगी, बल्कि निवेश, तकनीकी सहयोग, सर्विस सेक्टर और सप्लाई चेन मैनेजमेंट में भी दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी का रास्ता खुलेगा।


    सिर्फ ड्यूटी-फ्री नहीं, दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग का रोडमैप

    यह समझौता केवल ड्यूटी-फ्री मार्केट एक्सेस तक सीमित नहीं है। इसके तहत दोनों देशों के बीच

    • निवेश सुरक्षा
    • टेक्नोलॉजी ट्रांसफर
    • सर्विस सेक्टर में ट्रेड
    • स्किल्ड ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट
    • और मजबूत सप्लाई चेन सहयोग

    जैसे क्षेत्रों में व्यापक और संरचित सहयोग तय किया गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह डील बांग्लादेश को क्षेत्रीय और वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत स्थिति दिला सकती है।


    चार साल में पूरा हुआ समझौता, इंटरनेशनल स्टैंडर्ड से भी तेज़

    बांग्लादेश-जापान आर्थिक साझेदारी समझौते की सबसे बड़ी खासियत इसकी तेज़ गति है। यह एग्रीमेंट सिर्फ चार साल में पूरा हुआ, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से बेहद कम समय माना जाता है।

    इसकी शुरुआत 2022 में दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों की 50वीं वर्षगांठ पर गठित जॉइंट स्टडी टीम से हुई थी। टीम का मकसद लंबे समय के लिए मजबूत और संरचित दोतरफा आर्थिक रिश्तों का फ्रेमवर्क तैयार करना था।

    दिसंबर 2023 में सिफारिशें सौंपने के बाद, 12 मार्च 2024 को औपचारिक बातचीत शुरू हुई। 2024 और 2025 के दौरान ढाका और टोक्यो में कुल सात दौर की बातचीत हुई, जिसमें टैरिफ, नॉन-टैरिफ बाधाएं, सर्विस सेक्टर, बौद्धिक संपदा अधिकार, लेबर और पर्यावरण मानकों जैसे मुद्दों पर सहमति बनी।

    सितंबर 2025 में ड्राफ्ट फाइनल हुआ और 22 दिसंबर को बांग्लादेश के कॉमर्स एडवाइजर शेख बशीरुद्दीन तथा जापान के विदेश मंत्री इवाओ होरी ने बातचीत पूरी होने की औपचारिक घोषणा की।


    बांग्लादेश को 7,379 उत्पादों पर ड्यूटी-फ्री एक्सेस

    बांग्लादेश के वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, इस समझौते के लागू होते ही

    • बांग्लादेश को जापान में 7,379 उत्पादों पर ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलेगा
    • जबकि जापान को बांग्लादेश में 1,039 उत्पादों पर यह सुविधा दी जाएगी

    सबसे अहम बात यह है कि बांग्लादेश का प्रमुख निर्यात क्षेत्र रेडीमेड गारमेंट्स समझौते के साथ ही जापान में पूरी तरह ड्यूटी-फ्री हो जाएगा। इसके अलावा गारमेंट सेक्टर के लिए स्टेप-अप प्रोडक्शन ट्रांसफॉर्मेशन का प्रावधान भी शामिल है, जिससे प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।


    सर्विस सेक्टर और निवेश में भी बड़ा विस्तार

    समझौते के तहत सर्विस सेक्टर में भी बड़े स्तर पर प्रतिबद्धताएं की गई हैं।

    • बांग्लादेश जापान के लिए 97 सब-सेक्टर खोलेगा
    • जबकि जापान चार अलग-अलग मैकेनिज्म के जरिए बांग्लादेश के लिए 120 सब-सेक्टर खोलेगा

    इससे बांग्लादेश में जापानी निवेश, तकनीकी सहयोग और कुशल मानव संसाधन के विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।


    दोनों देशों के बीच कितना है व्यापार?

    बांग्लादेश बैंक के आंकड़ों के मुताबिक,

    • वित्तीय वर्ष 2024-25 में बांग्लादेश ने जापान से 1.8745 बिलियन डॉलर का आयात किया
    • और जापान को 1.4115 बिलियन डॉलर का निर्यात किया

    वहीं, 2020 से 30 सितंबर 2025 तक बांग्लादेश में जापान का कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 469.6 मिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है।
    वित्तीय वर्ष 2023-24 तक जापान के कमिटेड लोन 32.32 बिलियन डॉलर रहे, जिनमें से 22.36 बिलियन डॉलर माफ किए जा चुके हैं।


    LDC से बाहर निकलने की चुनौती में बड़ी राहत

    जॉइंट स्टडी टीम ने आगाह किया था कि बांग्लादेश के जल्द ही कम विकसित देश (LDC) की श्रेणी से बाहर निकलने के बाद मौजूदा ड्यूटी-फ्री सुविधाएं खत्म हो सकती हैं। ऐसे में जापान जैसी दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्था के साथ यह साझेदारी बांग्लादेश के निर्यात सेक्टर की प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए बेहद अहम होगी।

    गारमेंट इंडस्ट्री एसोसिएशन के पूर्व निदेशक मोहिउद्दीन रुबेल के मुताबिक,
    “सिर्फ चार साल में किसी विकसित देश के साथ इतना जटिल समझौता पूरा करना दिखाता है कि स्पष्ट रणनीति, राजनीतिक इच्छाशक्ति और फोकस्ड बातचीत के दम पर बांग्लादेश हाई-इम्पैक्ट अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां बना सकता है।”

  • MP Pappu Yadav : NEET छात्रा की मौत और पप्पू यादव की गिरफ्तारी पर राहुल गांधी का तीखा हमला, बोले– “यह राजनीति नहीं, इंसाफ का सवाल है”

    MP Pappu Yadav : NEET छात्रा की मौत और पप्पू यादव की गिरफ्तारी पर राहुल गांधी का तीखा हमला, बोले– “यह राजनीति नहीं, इंसाफ का सवाल है”

    पटना। बिहार की राजधानी पटना में NEET की तैयारी कर रही एक छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत और इस मामले में आवाज उठाने वाले पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर भाजपा और NDA सरकार पर सीधा हमला बोला है।

    राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि पटना में NEET की आकांक्षी छात्रा की मौत और उसके बाद की कार्रवाई ने “सिस्टम की गहरी सड़ांध” को एक बार फिर उजागर कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब पीड़ित परिवार ने निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की, तो भाजपा-NDA का वही पुराना तरीका सामने आया—मामले को भटकाना, परिजनों को प्रताड़ित करना और अपराधियों को सत्ता का संरक्षण देना।

    “पप्पू यादव की गिरफ्तारी राजनीतिक प्रतिशोध”

    राहुल गांधी ने कहा कि इस बेटी के लिए न्याय की आवाज बनकर सांसद पप्पू यादव मजबूती से खड़े हुए, लेकिन आज उनकी गिरफ्तारी साफ तौर पर राजनीतिक प्रतिशोध का उदाहरण है। इसका मकसद उन सभी आवाज़ों को डराना और दबाना है, जो जवाबदेही की मांग करती हैं।

    उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला सिर्फ एक घटना तक सीमित नहीं लगता, बल्कि यह एक खतरनाक पैटर्न की ओर इशारा करता है, जहां लगातार बेटियां शिकार बन रही हैं और सत्ता आंखें मूंदे बैठी है।
    राहुल गांधी ने लिखा, “यह राजनीति नहीं, इंसाफ का सवाल है। यह बिहार की बेटी की इज्जत और सुरक्षा का सवाल है।”


    प्रियंका गांधी ने पप्पू यादव से की बात, सरकार पर साधा निशाना

    इस पूरे मामले में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। शनिवार सुबह उन्होंने पप्पू यादव से फोन पर बात की। पप्पू यादव के एक समर्थक के माध्यम से यह बातचीत कराई गई, जिसमें प्रियंका गांधी ने उन्हें अच्छा वकील करने की सलाह दी।

    बाद में प्रियंका गांधी ने एक्स पर लिखा कि पटना के हॉस्टल में NEET की तैयारी कर रही छात्रा के साथ रेप और हत्या का मामला झकझोर देने वाला है। उन्होंने कहा कि इस केस के सामने आने के बाद सरकार का रवैया उससे भी ज्यादा डरावना है।

    प्रियंका ने सवाल उठाया,
    “FIR से लेकर जांच और कार्रवाई तक सब कुछ संदिग्ध बना दिया गया है। यह सब किसे बचाने के लिए किया जा रहा है?”

    उन्होंने हाथरस, उन्नाव, अंकिता भंडारी और अब पटना का ज़िक्र करते हुए कहा कि जहां-जहां महिलाओं के साथ अत्याचार हुआ, वहां भाजपा की सरकारें पीड़ितों के बजाय आरोपियों के साथ खड़ी नजर आईं। पप्पू यादव की गिरफ्तारी को उन्होंने इसी असंवेदनशील रवैये की एक और कड़ी बताया।


    तबीयत बिगड़ने पर पप्पू यादव IGIMS शिफ्ट

    इस बीच, गिरफ्तारी के बाद पप्पू यादव की तबीयत बिगड़ गई। सीने में दर्द की शिकायत के बाद उन्हें पहले पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) ले जाया गया, जहां से बाद में इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान (IGIMS) में शिफ्ट किया गया।


    1995 के मामले में हुई गिरफ्तारी

    पुलिस के अनुसार, पप्पू यादव को 1995 के एक कथित जमीन विवाद मामले में गिरफ्तार किया गया है। यह केस गर्दनीबाग थाना से जुड़ा है और इसमें IPC की धारा 419, 420, 468, 448, 506 और 120B के तहत मामला दर्ज है, जिन्हें अब भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत माना जा रहा है।

    पटना सिटी एसपी भानु प्रताप सिंह ने बताया कि मामला कोर्ट में ट्रायल के स्तर पर था और सांसद को पेश होना था, लेकिन तय तारीख पर वे उपस्थित नहीं हुए, जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी की गई।


    “मुझे नहीं पता मेरे साथ क्या होगा” – पप्पू यादव

    जब पुलिस उन्हें पटना स्थित उनके आवास से कस्टडी में लेने पहुंची, तो पप्पू यादव ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। उन्होंने मीडिया से कहा,
    “मैं ठीक नहीं हूं… मुझे नहीं पता कि मेरे साथ क्या होगा।”

  • Half Marathon 2026 : रविवार को दौड़ेगा ठाणे, स्ट्राइडर्स हाफ मैराथन का 12वां संस्करण

    Half Marathon 2026 : रविवार को दौड़ेगा ठाणे, स्ट्राइडर्स हाफ मैराथन का 12वां संस्करण

    ठाणे। स्ट्राइडर्स द्वारा आयोजित ठाणे हाफ मैराथन(Thane Half Marathon) का 12वां संस्करण रविवार, 8 फरवरी को हीरानंदानी एस्टेट, ठाणे में आयोजित होगा। इस प्रतिष्ठित रन में 21 किमी और 10 किमी (समयबद्ध) तथा 4 किमी (फन रन) कैटेगरी शामिल हैं। यह मैराथन फिटनेस और एक्टिव लाइफस्टाइल को बढ़ावा देने वाला शहर का प्रमुख स्पोर्टिंग इवेंट बन चुका है।

    2026 संस्करण में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया टाइटल स्पॉन्सर है, जो हेल्थ, वेलनेस और कम्युनिटी एंगेजमेंट के प्रति बैंक की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस साल इवेंट की खास आकर्षण होंगे मशहूर फिटनेस आइकन और एंड्योरेंस एथलीट मिलिंद सोमन, जो ब्रांड एंबेसडर के रूप में रनर्स का उत्साह बढ़ाएंगे।

    पिछले संस्करण में 15 हजार से ज्यादा रनर्स की भागीदारी के बाद, इस बार भी बड़ी संख्या में प्रोफेशनल, एमेच्योर और नए रनर्स के शामिल होने की उम्मीद है। हाफ मैराथन की शुरुआत न्यू होराइजन स्कूल गेट, ठाणे से होगी और समापन टीएमसी ग्राउंड पर किया जाएगा।

  • Bihar News: अश्लील एवं द्विअर्थी गाने बजाने पर बिहार सरकार का बड़ा फैसला, पुलिस को विशेष अभियान के आदेश

    Bihar News: अश्लील एवं द्विअर्थी गाने बजाने पर बिहार सरकार का बड़ा फैसला, पुलिस को विशेष अभियान के आदेश

    पटना। बिहार में सार्वजनिक स्थानों और वाहनों में अश्लील एवं द्विअर्थी गाने बजाने वालों के खिलाफ राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। उपमुख्यमंत्री सह गृहमंत्री सम्राट चौधरी ने पुलिस मुख्यालय को स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि भोजपुरी, मगही, मैथिली या किसी भी भाषा में फूहड़ और अश्लील गानों(Vulger Songs) को तत्काल रोका जाए।

    उन्होंने कहा कि बस, ऑटो, टैक्सी, ट्रेन और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर ऐसे गाने बजाने वालों के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। आदेश के बाद राज्यभर में पुलिस को अलर्ट मोड पर रखा गया है।

    सम्राट चौधरी ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया है कि वे ऐसे मामलों की पहचान कर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर अश्लील गानों से समाज में फूहड़ता बढ़ती है और इसका सबसे नकारात्मक प्रभाव बच्चों और युवाओं की मानसिकता पर पड़ता है। साथ ही, यह महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती है।

    उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल देना सरकार की प्राथमिकता है, और इसी उद्देश्य से अश्लील गानों पर प्रतिबंध अनिवार्य हो गया है। इस फैसले के बाद बिहार पुलिस ने ‘अश्लील गाने नहीं, सभ्य समाज बनाएं’ के संकल्प के साथ राज्यव्यापी अभियान शुरू करने की घोषणा की है।

    पुलिस प्रशासन ने चेतावनी दी है कि अब किसी भी सार्वजनिक स्थल या वाहन में अश्लील गाना बजाना दंडनीय अपराध की श्रेणी में आएगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माने के साथ-साथ जेल की सजा भी हो सकती है।

    कानूनी प्रावधानों के तहत पुलिस भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 296, 79 सहित अन्य सुसंगत धाराओं में तत्काल प्राथमिकी दर्ज करेगी।

    बिहार पुलिस ने ‘जन विश्वास हमारा संकल्प’ अभियान के तहत आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह की अश्लीलता का विरोध करें और इसकी सूचना तुरंत नजदीकी थाने को दें। सरकार का मानना है कि जनभागीदारी और सख्त कानून के माध्यम से ही बिहार को एक सभ्य और सुरक्षित राज्य बनाया जा सकता है।

  • 15 साल बाद मिली मेहनताना राशि, राजस्थान हाईकोर्ट में महिला वकील की याचिका खत्म

    15 साल बाद मिली मेहनताना राशि, राजस्थान हाईकोर्ट में महिला वकील की याचिका खत्म

    जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट में करीब 32 वर्षों से प्रैक्टिस कर रहीं एक महिला अधिवक्ता को नेशनल रूरल हेल्थ मिशन (NRHM) के लिए की गई पैरवी की प्रोफेशनल फीस आखिरकार राज्य सरकार के खिलाफ कानूनी लड़ाई के 15 साल बाद मिल गई। मामला कुल 84 याचिकाओं से जुड़ा था, जिनमें उन्होंने बतौर सरकारी वकील पेश होकर पैरवी की थी।

    याचिकाकर्ता अधिवक्ता को वर्ष 2010 में NRHM द्वारा 84 याचिकाओं के एक समूह में पेश होने के लिए नियुक्त किया गया था। इन सभी मामलों का निस्तारण हाईकोर्ट ने वर्ष 2011 में कर दिया। इसके बाद अधिवक्ता ने अपनी प्रोफेशनल सेवाओं के एवज में 4.25 लाख रुपये का बिल संबंधित विभाग को भेजा, लेकिन भुगतान वर्षों तक लंबित रहा।

    बताया गया कि वर्ष 2019 तक फीस का भुगतान नहीं होने पर अधिवक्ता ने तत्कालीन प्रोजेक्ट डायरेक्टर, NRHM को कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। मजबूरन, भुगतान दिलाने के लिए राज्य सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई।

    याचिका दायर होने के लगभग सात साल बाद, संबंधित प्रोजेक्ट डायरेक्टर, NRHM की ओर से कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल किया गया, जिसमें यह जानकारी दी गई कि याचिकाकर्ता अधिवक्ता को उनकी प्रोफेशनल फीस के रूप में 4.25 लाख रुपये का चेक जारी कर दिया गया है।

    हलफनामे और भुगतान की पुष्टि के बाद अधिवक्ता की ओर से याचिका वापस लेने का आवेदन पेश किया गया, जिसे जस्टिस गणेश राम मीना की एकलपीठ ने स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही यह लंबे समय से चला आ रहा विवाद समाप्त हो गया।

    यह मामला सरकारी विभागों में लंबित भुगतानों और अधिवक्ताओं को समय पर फीस न मिलने की समस्या को एक बार फिर उजागर करता है।

  • Supreme Court:सिर्फ कल्याण नहीं, माता-पिता की भूमिका भी तय करेगी फैसला: बच्चों की कस्टडी पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त संदेश

    Supreme Court:सिर्फ कल्याण नहीं, माता-पिता की भूमिका भी तय करेगी फैसला: बच्चों की कस्टडी पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त संदेश

    नई दिल्ली। बच्चों की कस्टडी (child-custody) तय करते समय केवल उनके “कल्याण” को ही एकमात्र आधार मानना सही नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में अदालतों को माता-पिता के आचरण, उनकी आर्थिक स्थिति, जीवन-स्तर, बच्चों की सुविधा और शिक्षा जैसे अन्य प्रासंगिक पहलुओं पर भी गंभीरता से विचार करना होगा।

    जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एस. वी. एन. भट्टी की खंडपीठ ने यह महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें दो नाबालिग बच्चों की कस्टडी उनकी मां को बहाल की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बच्चों का कल्याण सर्वोपरि जरूर है, लेकिन वही अकेला निर्णायक कारक नहीं हो सकता।

    खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा,

    “कस्टडी मामलों में बच्चों का कल्याण सर्वोच्च विचार है, इसमें कोई विवाद नहीं है। लेकिन इसके साथ-साथ कई अन्य कारक भी होते हैं, जैसे पक्षकारों का आचरण, उनकी आर्थिक क्षमता, जीवन-स्तर, तथा बच्चों की सुविधा और शिक्षा। इसलिए यह कहना कि ये कारक बहुत प्रासंगिक नहीं हैं और केवल कल्याण के आधार पर ही निर्णय होगा—पूरी तरह सही नहीं है।”

    क्या है मामला

    यह अपील एक तलाकशुदा दंपति के बीच लंबे समय से चल रहे कस्टडी विवाद से जुड़ी है। दोनों पक्ष भारतीय नागरिक हैं और उनके दो नाबालिग पुत्र हैं, जिनका जन्म क्रमशः 2017 और 2019 में हुआ था। सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि हाईकोर्ट ने कस्टडी तय करते समय मां के आचरण समेत कई अहम तथ्यों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया।

    शीर्ष अदालत ने कहा कि ऐसे पहलू “महत्वपूर्ण” हैं और इन्हें इस तर्क पर नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता कि केवल बच्चों का कल्याण ही निर्णायक है।

    हाईकोर्ट को दोबारा सुनवाई का निर्देश

    अंततः, सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए मामला पुनः गुण-दोष के आधार पर विचार के लिए वापस भेज दिया। साथ ही निर्देश दिया कि हाईकोर्ट इस कस्टडी विवाद का निपटारा यथाशीघ्र, अधिमानतः चार महीने के भीतर करे।

    यह फैसला देशभर में चल रहे कस्टडी मामलों के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि अदालतें अब बच्चों के हित को व्यापक दृष्टिकोण से परखेंगी, न कि केवल एक ही कसौटी पर।

  • अमेरिका के टैरिफ का भारत पर गंभीर प्रभाव , दुनिया में जो 40 वर्षों में नहीं हुआ, वह हो रहा है

    अमेरिका के टैरिफ का भारत पर गंभीर प्रभाव , दुनिया में जो 40 वर्षों में नहीं हुआ, वह हो रहा है

    अमेरिका के टैरिफ को लेकर पहले बजट पर बड़े पैमाने पर चर्चाएँ होती थीं और उसे विस्तार से समझाया जाता था, लेकिन अब बजट ही निरर्थक होता जा रहा है। बजट को लेकर जनता में उत्सुकता समाप्त हो चुकी है, और यह स्थिति अत्यंत निराशाजनक व चिंताजनक है। राहुल गांधी ने यह स्पष्ट किया कि बजट का “हलवा” किस सामाजिक वर्ग को मिलता है, यह सामाजिक न्याय पर की गई एक सटीक टिप्पणी थी। लेकिन आज बजट से सामाजिक न्याय की भूमिका पूरी तरह गायब हो चुकी है और यह केवल पैसे फेंकने का तमाशा बनकर रह गया है, ऐसा महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा।

    तिलक भवन में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल की अध्यक्षता में बजट पर विशेष परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस चर्चा में अर्थशास्त्री अजित जोशी, संजीव चांदोरकर, एस. नागराजन, विश्वास उटगी तथा पूर्व सांसद कुमार केतकर ने भाग लिया।

    इस अवसर पर सपकाल ने कहा कि बजट के माध्यम से देश की वार्षिक प्रगति और आम नागरिक के जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया जाता है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से न तो सरकार और न ही आम जनता बजट को लेकर गंभीर दिखाई देती है। यदि हम अर्थव्यवस्था को इसी प्रकार उदासीनता से देखते रहे, तो समय हमें माफ़ नहीं करेगा। किसान और बेरोज़गारी जैसे मुद्दों पर आंदोलन होते रहे हैं, और अब ऐसा लगता है कि बजट पर भी आंदोलन करने की नौबत आ सकती है। पहले ग्रामीण नेतृत्व की प्रशासन और नीति निर्धारण में मज़बूत भूमिका होती थी, जिससे सामाजिक न्याय बना रहता था, लेकिन अब यह स्थिति पूरी तरह बदल गई है। डॉ. मनमोहन सिंह के बाद देश की दिशा बदल गई और नई तरह की शक्तियाँ प्रभावी हो गईं। ग्रामीण और बहुजन वर्ग की पकड़ कमज़ोर हुई और उसकी जगह दलालों का वर्चस्व बढ़ता गया, यह अत्यंत चिंताजनक है।

    हाल ही में संपन्न नगरपालिका और महानगरपालिका चुनावों में भारी धनबल और गुंडागर्दी का प्रयोग किया गया। दलालों द्वारा खुलेआम खर्च किए गए इस धन के गंभीर परिणाम क्या होंगे, इसका किसी को अंदाज़ा नहीं है। आज देश का हर नागरिक असुरक्षा और भय की स्थिति में है। जो भरोसे का चेहरा दिखाया गया था, वह भी अब गायब है। नीतियाँ स्पष्ट नहीं हैं। देश की मौजूदा परिस्थितियाँ किसी विस्फोटक स्थिति की ओर इशारा कर रही हैं, जो किसी भी समय ज्वालामुखी की तरह फूट सकती हैं, ऐसी आशंका सपकाल ने व्यक्त की।

    अर्थशास्त्री संजीव चांदोरकर ने कहा कि बजट में वित्तीय संसाधनों और उनके वितरण की रूपरेखा प्रस्तुत की जाती है। मोदी सरकार के 11 वर्षों के कार्यकाल को देखते हुए इस बजट को केवल एक वर्ष का बजट मानकर नहीं देखा जा सकता। इन 11 वर्षों में सरकार की आर्थिक नीतियों में एक स्पष्ट निरंतरता रही है। इसलिए किसी एक बजट के बजाय पूरे आर्थिक मॉडल को समग्रता में समझना आवश्यक है। पिछले वर्ष अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प के राष्ट्रपति बनने के बाद उसके वैश्विक प्रभाव भारत पर भी दिखाई देने लगे हैं। जो पिछले 40 वर्षों में दुनिया में नहीं हुआ, वह अब घटित हो रहा है, और यह केवल शुरुआत है।

    अनिश्चितता के इस दौर में अर्थव्यवस्था को अधिक मज़बूत और लचीला बनाना आवश्यक है, ताकि किसी भी वैश्विक झटके का न्यूनतम प्रभाव पड़े। लेकिन भारत की अर्थव्यवस्था को व्यापक बनाने के प्रयास नाकाफ़ी रहे हैं। बजट में कृषि की पूरी तरह उपेक्षा की गई है। कृषि का जीडीपी में योगदान घटकर 15 प्रतिशत रह गया है, जबकि कोरोना काल में कृषि ने पूरे देश को संभाला। कर सुधारों की अनदेखी हो रही है। कर्ज़ का बोझ लगातार बढ़ रहा है — केवल कर्ज़ चुकाने के लिए ही 19 लाख करोड़ रुपये खर्च करने होंगे। कर्ज़ लेकर कर्ज़ चुकाने की यह नीति ख़तरनाक है। भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की बातें तो की जा रही हैं, लेकिन उसके लिए अमीरों पर कर लगाने, संसाधनों की पुनर्वितरण नीति अपनाने और आर्थिक समानता बढ़ाने की राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई नहीं देती।

    प्रशांत गावंडे ने कहा कि केंद्रीय बजट में किसान पूरी तरह गायब है और मुख्यधारा के मीडिया ने भी इस तथ्य को नज़रअंदाज़ किया है। कृषि अनुसंधान, तकनीक और निवेश के लिए बजट में अत्यंत नगण्य प्रावधान किए गए हैं। सोयाबीन, कपास, ज्वार, बाजरा, सरसों और गन्ना जैसी प्रमुख फसलों की अनदेखी की गई है। देश में 550 चीनी मिलें हैं, जिनमें से अधिकांश घाटे में हैं, जबकि करोड़ों किसान इन पर निर्भर हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक जमा घट रही हैं, जो गंभीर चेतावनी है। भारत में 92 प्रतिशत किसान छोटे और मध्यम हैं, जिनके पास 2 से 8 एकड़ भूमि है, जबकि अमेरिका में ‘छोटे’ किसान के पास भी कम से कम 2,000 एकड़ भूमि होती है। ऐसी असमान प्रतिस्पर्धा में भारत सरकार का मज़बूत समर्थन आवश्यक है, जो पूरी तरह अनुपस्थित है। सरकार की मौजूदा कृषि नीति से किसानों की आत्महत्याएँ बढ़ने की आशंका है।

  • आदोशी टनल के पास पलटा गैस टैंकर: 32 घंटे बाद मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर ट्रैफिक बहाल

    आदोशी टनल के पास पलटा गैस टैंकर: 32 घंटे बाद मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर ट्रैफिक बहाल

    मुंबई। मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे पर आदोशी टनल के पास गैस टैंकर पलटने से बनी आपात स्थिति अब पूरी तरह सामान्य हो गई है। रायगढ़ हाईवे पुलिस के अनुसार, टैंकर से हो रहे गैस रिसाव को पूरी तरह रोक लिया गया है और दुर्घटनाग्रस्त टैंकर को एक्सप्रेसवे से हटा दिया गया है। इसके बाद करीब 32 घंटे तक बंद रही मुंबई की ओर जाने वाली लेन को खोल दिया गया, जिससे यातायात फिर से सुचारू रूप से शुरू हो गया है।

    रायगढ़ क्षेत्र की हाईवे सेफ्टी टीम के पुलिस अधीक्षक की ओर से गुरुवार को जारी प्रेस नोट में पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी गई। प्रेस नोट के मुताबिक, 3 फरवरी को शाम करीब 5 बजे यशवंतराव चव्हाण मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे पर किलोमीटर 41/000, आदोशी टनल के पास मुंबई की ओर जा रही लेन में प्रोपाइलीन गैस से भरा एक टैंकर पलट गया था।

    हादसे के बाद टैंकर से अत्यधिक ज्वलनशील प्रोपाइलीन गैस का रिसाव शुरू हो गया, जिससे यात्रियों की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एहतियातन एक्सप्रेसवे पर यातायात को तत्काल बंद कर दिया गया।

    यात्रियों को होने वाली असुविधा को कम करने के लिए पुलिस प्रशासन ने मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार अपडेट साझा किए। हादसे की सूचना मिलते ही हाईवे पुलिस, रायगढ़ जिला पुलिस, फायर ब्रिगेड, एनडीआरएफ, बीपीसीएल, हेल्प फाउंडेशन और रासायनिक विशेषज्ञों की टीमें मौके पर पहुंच गईं।

    प्रेस नोट में बताया गया कि गैस लीकेज को रोकना तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण था, लेकिन सभी एजेंसियों और विशेषज्ञों के संयुक्त प्रयासों से 5 फरवरी 2026 को तड़के करीब 1:30 बजे गैस रिसाव को पूरी तरह रोकने में सफलता मिली। इसके बाद टैंकर को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कर दिया गया।

    राहत कार्य पूरा होने के बाद अब यशवंतराव चव्हाण मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे के साथ-साथ पुराने मुंबई–पुणे राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-48) पर भी यातायात सामान्य रूप से शुरू हो गया है।

    पुलिस प्रशासन ने यात्रियों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। गौरतलब है कि इस हादसे के चलते एक्सप्रेसवे पर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया था और हजारों यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। ट्रैफिक बहाल होने के बाद यात्रियों ने राहत की सांस ली है।

  • Earth Quake Japan:रयूक्यू द्वीपसमूह में 5.8 तीव्रता का भूकंप, दहशत का माहौल

    Earth Quake Japan:रयूक्यू द्वीपसमूह में 5.8 तीव्रता का भूकंप, दहशत का माहौल

    बीजिंग (शिन्हुआ): जापान के रयूक्यू द्वीपसमूह (Ryukyu Islands, Japan) में बुधवार को 5.8 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया। जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज़ (GFZ) के अनुसार, भूकंप के झटके स्थानीय समय शाम को महसूस किए गए, जिससे क्षेत्र में कुछ देर के लिए दहशत फैल गई।

    GFZ ने बताया कि भूकंप का केंद्र धरती की सतह से लगभग 10 किलोमीटर की गहराई में था। भूकंप का एपिसेंटर 29.07 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 130.41 डिग्री पूर्वी देशांतर पर स्थित बताया गया है।

    जान-माल के नुकसान की खबर नहीं

    भूकंप के बाद अब तक किसी जान-माल के नुकसान या इमारतों के क्षतिग्रस्त होने की कोई आधिकारिक सूचना सामने नहीं आई है। इसके साथ ही सुनामी को लेकर कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है।

    भूकंप संभावित क्षेत्र है रयूक्यू द्वीपसमूह

    गौरतलब है कि रयूक्यू द्वीपसमूह जापान के उन इलाकों में शामिल है जो पैसिफिक रिंग ऑफ फायर के अंतर्गत आते हैं, जहां भूकंपीय गतिविधियां अक्सर दर्ज की जाती रहती हैं। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

    विशेषज्ञों की सलाह

    विशेषज्ञों ने लोगों को अफवाहों से बचने और सरकारी एजेंसियों द्वारा जारी अपडेट पर ही भरोसा करने की सलाह दी है।