Halal Certificate Row Rocks Gokul Milk Union: गोकुल दूध संघ के हलाल प्रमाणपत्र पर मचा बवाल, चुनाव से पहले धार्मिक और राजनीतिक बहस तेज

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17 लाख लीटर प्रतिदिन दूध संकलन करने वाले गोकुल संघ में हलाल प्रमाणपत्र का मुद्दा बना चुनावी बहस का केंद्र।

कोल्हापुर | प्रतिनिधि
कोल्हापुर जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ (गोकुल) द्वारा अपने कुछ उत्पादों के लिए प्राप्त किए गए हलाल प्रमाणपत्र (Halal Certificate Row Rocks Gokul Milk Union) को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। गोकुल के घी, मक्खन और दूध पाउडर जैसे उत्पादों के लिए जारी हलाल प्रमाणपत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विभिन्न संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसकी आवश्यकता पर सवाल उठाए हैं। इस मुद्दे ने अब धार्मिक और राजनीतिक रंग भी ले लिया है।
जानकारी के अनुसार, मार्च 2023 में जारी किए गए हलाल प्रमाणपत्र की प्रतियां हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हुईं। इसके बाद कुछ संगठनों ने सवाल उठाया कि दुग्ध उत्पादों के लिए हलाल प्रमाणपत्र लेने की आवश्यकता क्या थी। उनका कहना है कि दूध और उससे बने उत्पादों का सीधे तौर पर पशु वध से संबंध नहीं होता, ऐसे में हलाल प्रमाणन की जरूरत समझ से परे है।
गोकुल दूध संघ के विरोध में याचिका दायर करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश बेलवाडे ने आरोप लगाया है कि तत्कालीन प्रबंधन के कार्यकाल में यह प्रमाणपत्र प्राप्त किया गया। उन्होंने दावा किया कि हलाल प्रमाणपत्र के जरिए उत्पादों को खाड़ी देशों के बाजार में उतारने की योजना बनाई गई थी और इसके पीछे आर्थिक हित जुड़े हो सकते हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
गौरतलब है कि गोकुल दूध संघ कोल्हापुर जिले की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। प्रतिदिन लगभग 17 लाख लीटर दूध संकलन करने वाले इस संघ का वार्षिक कारोबार करोड़ों रुपये का है। यही कारण है कि गोकुल केवल एक दुग्ध संघ नहीं बल्कि जिले की राजनीति और सहकारिता का प्रमुख केंद्र भी माना जाता है।
विवाद ऐसे समय सामने आया है जब गोकुल दूध संघ की चुनाव प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। वर्तमान संचालक मंडल का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और सदस्यता पंजीकरण में कथित अनियमितताओं को लेकर मामला न्यायालय तक पहुंचा था। हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने 90 दिनों के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले हलाल प्रमाणपत्र का मुद्दा सामने आने से यह चुनावी बहस का प्रमुख विषय बन सकता है। विरोधी गुट इस मुद्दे को लेकर सत्ताधारी पैनल को घेरने की तैयारी में हैं, जबकि गोकुल प्रबंधन की ओर से अब तक कोई विस्तृत स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
फिलहाल हलाल प्रमाणपत्र को लेकर शुरू हुआ विवाद कोल्हापुर की सहकारिता राजनीति में नई हलचल पैदा कर रहा है और आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

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