Devendra Ashish Singh Death: प्रशासन को जगाने की पहल, अमोल केन्द्रे ने उठाई आवाज!

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Devendra Ashish Singh death: दीवा में स्वर्गीय देवेंद्र आशीष सिंह (उम्र 12 साल) की मौत की पूरी जांच करने के बाद संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के बारे में। साथ ही, दिवा शहर में फर्जी मेडिकल चलाने वाले फर्जी डॉक्टरो के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के बारे में ताकि किसी और की जान न जाए।

देवेंद्र आशीष सिंह (उम्र 12 साल) नाम का एक नाबालिग लड़का बदकिस्मती से 01/06/2026 को गुज़र गया। यह घटना बहुत गंभीर है और इस मामले में मेडिकल लापरवाही, बिना इजाज़त मेडिकल प्रैक्टिस या गलत दवा की संभावना है, इसलिए निष्पक्ष और पूरी जांच बहुत ज़रूरी है। जानकारी के मुताबिक, लड़के को एक व्यक्ति ने दवा दी थी।

दवा देने के कुछ ही मिनटों में लड़के की हालत गंभीर हो गई, वह बेहोश हो गया और कहा जा रहा है कि उसके हाथ-पैर मुड़ गए थे। इसके बाद उसे इलाज के लिए डोंबिवली के एक हॉस्पिटल में ले जाया गया। वहां से उसे मुंबई के KEM हॉस्पिटल में शिफ्ट कर दिया गया। 7 दिनों के इलाज के बाद लड़का कोमा में चला गया और बदकिस्मती से 01/06/2026 को उसकी मौत हो गई।

इस मामले में इन बातों की पूरी जांच होनी चाहिए:

  • दिवा में बंगाली डॉक्टर ने लड़के को कौन सी दवा दी गई थी?
  • वह दवा किस मेडिकल स्टोर से ली गई थी?
  • क्या दवा डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन पर दी गई थी? क्या संबंधित व्यक्ति के पास मेडिकल प्रैक्टिस करने के लिए ज़रूरी एजुकेशनल क्वालिफिकेशन, रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस हैं?
  • क्या संबंधित व्यक्ति ने मेडिकल प्रैक्टिस करने के लिए ज़रूरी लीगल परमिशन ली है?

स्थायी लोगों से मिली जानकारी के मुताबिक घटना के बाद संबंधित डॉक्टर गांव गया था पर ऐसा नहीं है वह जगह बदल कर और बंगाली डॉक्टर के नाम से बिल्डर के ऑफिस में इलाज कर रहा था। अगर संबंधित जगह के मालिक, ऑफिस मैनेजर या बिल्डिंग मालिक ने मेडिकल प्रैक्टिस के लिए जगह दी है, तो उनके रोल की भी जांच होनी चाहिए। दोषियों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाना चाहिए।

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देवेंद्र आशीष सिंह बाला ने सिर्फ 12 साल की उम्र में अपनी जान गंवा दी। ऐसा हादसा किसी और के साथ न हो। किसी की जान न जाए। इसके लिए दिवा शहर में बिना इजाज़त के मेडिकल प्रैक्टिस करने वाले सभी डॉक्टरों, संदिग्ध क्लीनिकों, बिना लाइसेंस वाली डिस्पेंसरियों और दवा बेचने वाले सेंटरों के खिलाफ जॉइंट इंस्पेक्शन कैंपेन चलाया जाना चाहिए।

क्वालिफिकेशन, रजिस्ट्रेशन, लाइसेंस और लीगल डॉक्यूमेंट्स को वेरिफाई करने के बाद, अगर कोई वायलेशन पाया जाता है, तो संबंधित के खिलाफ इंडियन पीनल कोड (IPC), ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, नेशनल मेडिकल कमीशन एक्ट और दूसरे लागू कानूनों के मुताबिक सख्त एक्शन लिया जाना चाहिए। अमोल धनराज केन्द्रे द्वारा निम्न प्रशासनिक अधिकारीयो को लिखित पत्र भेजे हैं।

  • मिस्टर पुलिस कमिश्नर, ठाणे शहर
  • मिस्टर कलेक्टर
  • मिस्टर कलेक्टर ऑफिस, ठाणे
  • मिस्टर सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर, मुंब्रा पुलिस स्टेशन
  • मिस्टर मेडिकल हेल्थ ऑफिसर, ठाणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन
  • मिस्टर फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA), ठाणे

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