Bhiwandi Drain Cleaning: 51 प्रतिशत नाला सफाई के दावे पर उठे सवाल, महापौर समेत पार्षदों ने जताई नाराजगी

Bhiwandi Drain Cleaning

Written by

in

,

Bhiwandi Drain Cleaning: मानसून पूर्व तैयारियों के तहत भिवंडी महानगरपालिका द्वारा शहर में नाला सफाई का कार्य युद्धस्तर पर किए जाने का दावा किया जा रहा है। निगम प्रशासन के अनुसार अब तक 51 प्रतिशत नालों की सफाई पूरी कर ली गई है, जबकि इस कार्य पर करीब 2 करोड़ 40 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। हालांकि, महापौर नारायण चौधरी समेत कई जनप्रतिनिधियों ने इस दावे पर सवाल उठाते हुए कार्य की गुणवत्ता और प्रगति पर असंतोष व्यक्त किया है।

महापौर नारायण चौधरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नाला सफाई का कार्य कागजों पर अधिक और जमीनी स्तर पर कम दिखाई दे रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले सप्ताह उन्होंने स्वयं विभिन्न क्षेत्रों का आकस्मिक निरीक्षण किया था, जिसमें कई स्थानों पर कार्य संतोषजनक नहीं पाया गया। इस दौरान संबंधित ठेकेदारों और अधिकारियों को फटकार भी लगाई गई थी, लेकिन उसके बावजूद अपेक्षित सुधार नजर नहीं आ रहा है।

महापौर ने कहा कि निगम अधिकारियों को ठेकेदारों से गुणवत्तापूर्ण तरीके से नाला सफाई कराने के निर्देश दिए गए हैं। यदि मानसून के दौरान शहर में जलभराव या बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न होती है, तो इसके लिए लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि शहर की स्वच्छता प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और नागरिकों का सहयोग भी आवश्यक है।

कागजों पर आंकड़ेबाजी का आरोप
स्थायी समिति के सदस्य एडवोकेट मयूरेश विलास पाटिल ने निगम प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अधिकारियों द्वारा केवल कागजों पर प्रतिशत दिखाकर ठेकेदारों के हितों की रक्षा की जा रही है। उनका दावा है कि वास्तविकता में 20 प्रतिशत नाला सफाई भी पूरी नहीं हुई है।

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मात्र बीस दिनों में इतने बड़े पैमाने पर नाला सफाई का कार्य पूरा किया जा सकता है? उनके अनुसार स्वास्थ्य एवं स्वच्छता विभाग के कुछ कर्मचारी केवल आंकड़े प्रस्तुत कर रहे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर कार्य की स्थिति अलग है। पाटिल ने मांग की कि प्रशासन को वास्तविक निरीक्षण और सत्यापन के बिना ठेकेदारों के बिलों का भुगतान नहीं करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान यदि नागरिकों को जलभराव की समस्या का सामना करना पड़ा, तो लोग ठेकेदारों को नहीं बल्कि अपने जनप्रतिनिधियों को जिम्मेदार ठहराएंगे। इसलिए आयुक्त और महापौर की जिम्मेदारी है कि वे ठेकेदारों से गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध कार्य सुनिश्चित कराएं।

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *